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जलवायु संकट पर बात करनी होगी, वरना गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहिए

लंदन स्थित एक अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनक्रिश्चियन एड की एक हालिया रिपोर्ट का कहना है कि 2020 में दुनिया पर सिर्फ COVID-19 महामारी की मार ही नहीं पड़ी थी, बल्कि वास्तव में उसे जलवायु संकट के तीव्रीकरण के कारण जीवन और आजीविका के बड़े पैमाने पर नुकसान का सामना भी करना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका में आग, चीन, भारत और जापान में बाढ़, यूरोप और अमेरिका में तूफान जैसी जलवायु से संबंधित आपदाओं ने लाखों लोगों को प्रभावित किया।  

जून-अक्तूबर के दौरान मानसून की अत्यधिक वर्षा के कारण भारत में कम से कम 2,067 मौतें हुईं और 10 बिलियन अमरीकी डॉलर का नुकसान हुआ। बाढ़ ने पिछले साल 40 लाख भारतीयों को विस्थापित किया था। २०१९ में भी देश में कई राज्यों में अत्यधिक बारिश देखी गई थी। 2020 में अत्यधिक बारिश के कारण केरल के एक चाय बागान में एक ही भूस्खलन में करीब 49 लोगों की मौत हो गई थी। असम में मई से अक्तूबर के बीच बाढ़ से 60,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए और 149 लोगों की मौत हुई। हैदराबाद में 24 घंटे (पिछले रिकॉर्ड वर्षा से लगभग 6 सेमी अधिक) में 29.8cm की वर्षा का रिकॉर्ड स्तर देखा गया, जहां लगभग एक करोड़लोग शहर में रहते हैं। बाढ़ में कारें और घर जलमग्न हो गए, जिसमें कम से ५० लोगों की मौत हो गई।

पिछले 65 वर्षों में अतिवृष्टि की घटनाओं की संख्या में तीन गुना वृद्धि हुई है। पूर्वानुमान मॉडलों का अनुमान है कि भारत में बाढ़ की आवृत्ति कम कार्बन उत्सर्जन परिदृश्य की तुलना में उच्च कार्बन उत्सर्जन परिदृश्य में दोगुनी हो जाएगी। जाहिर है, जलवायु परिवर्तन चरम मौसम की घटनाओं के पीछे मुख्य कारणों में से एक होने की संभावना है।

मानसून की अत्यधिक बौछारों के अलावा देश ने मई महीने में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और अंडमान द्वीप समूह में चक्रवात अम्फन के प्रकोप का भी अनुभव किया। इस सुपर साइक्लोन से कम से कम 128 लोगों की मौत हो गई थी, जिससे भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान के शहरों में भारी नुकसान हुआ था। बंगाल की खाड़ी में रिकॉर्ड पर आए सबसे मजबूत तूफानों में से एक चक्रवात अम्फन से 13 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ। सुपर साइक्लोन ने 49 लाख लोगों को विस्थापित कर दिया। ग्लोबल वार्मिंग के कारण उत्तर हिंद महासागर की सीमा से सटे देशों को प्रभावित करने वाले चक्रवात पहले से ज्यादा ताकतवर हो गए हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारत ने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य निर्धारित किए हैं जो पूर्व-औद्योगिक समय की तुलना में धरती के तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से उसे नीचे रखने के साथ "सुसंगत" हैं।

काउंटिंग दि कॉस्‍ट 2020: अ इयर ऑफ क्‍लाइमेट ब्रेकडाउन नामक इस रिपोर्ट ने 2020 मे प्राकृतिक आपदाओं की आर्थिक लागत का अनुमान किया है जिसने विभिन्‍न देशों और क्षेत्रों को प्रभावित किया था, जो इस प्रकार है:

1. ऑस्ट्रेलिया बुशफायर (ऑस्ट्रेलिया, $ 5 बिलियन)

2. टिड्डी झुंड (पूर्वी अफ्रीका, 8.5 अरब डॉलर)

3. धूल भरी आँधी सियारा और एलेक्स (यूरोप, 5.9 अरब डॉलर)

4. चक्रवात अम्फन (भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, 13 अरब डॉलर)

5. अटलांटिक हरिकेन का मौसम (अमेरिका, मध्य अमेरिका, 40 अरब डॉलर)

6. चीन की बाढ़ (चीन, 32 अरब डॉलर)

7. भारत की बाढ़ (भारत, 10 अरब डॉलर)

8. क्यूशू की बाढ़ (जापान, 5 अरब डॉलर)

9. पाकिस्तान की बाढ़ (पाकिस्तान, 1.5 अरब डॉलर)

10. अमेरिका के वेस्ट कोस्ट की आग (अमेरिका, 20 अरब डॉलर)

2020 में आई अन्य प्रमुख आपदाएं हैं:

11. साइबेरियन हीटवेव (रूस)

12. दक्षिण सूडान की बाढ़ (दक्षिण सूडान)

13. दक्षिण अमेरिकी आग (ब्राजील, उरुग्वे, अर्जेंटीना, पैराग्वे)

14. तूफान गोनी और वाम्को (फिलीपींस)

15. वियतनाम की बाढ़ (वियतनाम)

चूंकि क्रिश्चियन एड की रिपोर्ट में उद्धृत अनुमानों में से अधिकांश बीमित नुकसान पर आधारित हैं, इसलिए सही आंकड़ा बहुत अधिक होने की संभावना है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि २०५० तक 3 डिग्री सेल्सियस की वैश्विक तापमान वृद्धि होती है (जैसा कि नवंबर २०२० में प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र के एमिशंस गैप' रिपोर्ट द्वारा भविष्यवाणी की गई है, तो इससे बड़े पैमाने पर प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी और धरती का बड़ा हिस्‍सा निर्जन हो जाएगा।

रिपोर्ट में निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं:

आगे की आपदाओं को रोकने के लिए, देशों को तत्काल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करनी चाहिए। जहां कुछ देशों ने महत्वाकांक्षी योजनाओं को आगे रखा है, वहीं दूसरों को आगे आने की जरूरत है। तत्काल कार्यान्वयन एक सर्वोच्च राजनीतिक प्राथमिकता होनी चाहिए।

अमीर देशों को गरीब देशों में रहने वाले कमजोर समुदायों का समर्थन करने के लिए और अधिक धन प्रदान करने की जरूरत है ताकि उन्हें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल बनाने और लचीलापन बनाने में मदद मिल सके। इन देशों ने जलवायु संकट में न्‍यूनतम योगदान दिया है लेकिन इसके प्रभाव को असंगत रूप से इन्‍हें भुगतना पड़ता है।

सभी सरकारों को नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ऊर्जा संक्रमण में निवेश करना चाहिए। अमीर देशों को विकासशील देशों का समर्थन करना चाहिए ताकि वे अमीर देशों द्वारा उठाए गए जीवाश्म प्रेरित विकास पथ को आगे बढ़ा सकें.

 

References:

Counting the cost 2020: A year of climate breakdown, Christian Aid, released in December, 2020, please click here to access

Emissions Gap Report 2020, United Nations Environment Programme (UNEP), released in November 2020, please click here to access

News alert: Extreme weather events destroying our economy in a big way, indicates official data, Inclusive Media for Change, Published on Oct 14, 2019, please click here to access

India bore maximum brunt of extreme weather events in 2020: Report -Jayanta Basu, Down to Earth, 28 December, 2020, please click here to access

 

Image Courtesy: Counting the cost 2020: A year of climate breakdown, Christian Aid, released in December, 2020, please click here to access