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पिछले 20 सालों में सांप डसने से हुई 10 लाख से अधिक भारतीयों की मौत

हाल ही में, ‘ट्रेंडस् इन स्नेकबाइट मोर्टिलिटी इन इंडिया फ्रॉम 2000 टू 2019’ नामक एक शोध लेख प्रकाशित हुआ है, जोकि राष्ट्रीय स्तर पर, भारत में सांप के डसने मृत्यु दर के रुझानों से अवगत कराता है. शोध लेख के मुताबिक, जहरीले सांपों के डसने के कारण पिछले दो दशकों में 10 लाख से अधिक भारतीयों की मौत हुई है. ओपन एक्सेस जर्नल elifesciences.org में प्रकाशित इस शोध-आधारित अध्ययन में पाया गया है कि सांप के डसने से हर वर्ष दुनिया में होने वाली मौतों की कुल संख्या की लगभग आधी मौतें भारत में होती हैं.

सांप के डसने के शिकार कौन हैं?

पहले के एक अध्ययन में 611,483 शवों की जांच-परख में सांप के डसने से हुई 2,833 मौतों के विश्लेषण (2001 से 2014 तक इंडियन मिलियन डेथ स्टडी, जिसमें अनुमान है कि भारत में सांप के डसने से 46,000 मौतें प्रतिवर्ष हुईं) और 2000-2019 के अवधि में 87,590 सांप के डसने की घटनाओं व उपलब्ध आंकड़ों की व्यवस्थित समीक्षा करने के बाद, शोध लेख के लेखकों ने अनुमान लगाया है कि भारत देश में 2000 और 2019 के बीच 12 लाख लोगों की सांप के डसने से मृत्यु हुई (प्रति वर्ष औसतन 58,000 मौतें).

सांप के डसने से हुईं 12 लाख मौतों में से 6.02 लाख पुरुषों और 5.65 लाख महिलाओं की मृत्यु हुईं हैं.

जहरीले सांप के डसने के पीड़ितों में से लगभग आधे (यानी 46.5 प्रतिशत) 30-69 वर्ष की आयु के थे और एक चौथाई (यानी 27.8 प्रतिशत) 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे थे. कृपया विवरण के लिए तालिका -1 देखें.

तालिका 1: साल 2000 से 2019 तक अनुमानित भारत में सांप के डसने से हुई मौतें (हजारों में) (लैंगिक व उम्र के हिसाब से)

स्रोत: ट्रेंडस् इन स्नेकबाइट मोर्टिलिटी इन इंडिया फ्रॉम 2000 टू 2019 इन ए नैशनली रिप्रेजेंटेटिव मोर्टिलिटी, जुलाई 2020 में प्रकाशित, https://elifesciences.org/articles/54076

नोट: इंडियन मिलियन डेथ स्टडी पीरियड 2001-2014 के अनुसार कुल मौतें 807,500 थीं. 2000-2019 अवधि में मौतों की गणना इन वार्षिक मौतों के डेटा के एक्सट्रपलेशन के बाद की गई है. अध्ययन की अवधि के बाहर अतिरिक्त वार्षिक मौतें (हजारों में) 2000 में 54.0, 2015 में 62.3, 2016 में 62.0, 2017 में 61.4, 2018 में 60.3 और 2019 में 59.8 हैं. लोवर लिमिट (एलएल) और अपर लिमिट (यूएल) कम हैं और अनुमानों की अनिश्चितता सीमित है. विश्लेषण में प्रमुख अनिश्चितता, मृत्यु के कारण का वर्गीकरण है, जनसांख्यिकीय जोड़ नहीं है. इसप्रकार, लोवर लिमिट सांप के डसने मौत के लिए ICD-10 कोड पर दो चिकित्सकों की तत्काल सहमति पर आधारित थी और अपर लिमिट सांप के डसने से मौत के रूप में दो चिकित्सकों में से किसी एक चिकित्सक की सहमति पर आधारित थी.

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2001-2014 की अवधि के दौरान सांप के डसने के कारण मरने वाले पीड़ितों में से 70 प्रतिशत लोग बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश (तेलंगाना सहित) राजस्थान और गुजरात के घनी आबादी वाले कृषि आधारित इलाकों से थे. सांप के डसने से संबंधित ज्यादातर मौतें ग्रामीण इलाकों में बारिश के मौसम के दौरान हुई हैं, गोकि इस मौसम में सांप अधिक सक्रिय होते हैं. कृपया चार्ट -1 देखें, जिसमें समीक्षा किए गए अध्ययन के परिणाम दिए गए हैं.

चार्ट 1: 2000-2019 के दौरान प्रकाशित अध्ययन में 88,000 सांप के डसने की घटनाओं की विश्लेषित विशेषताएं

स्रोत: ट्रेंडस् इन स्नेकबाइट मोर्टिलिटी इन इंडिया फ्रॉम 2000 टू 2019 इन ए नैशनली रिप्रेजेंटेटिव मोर्टिलिटी, जुलाई 2020 में प्रकाशित, https://elifesciences.org/articles/54076

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अध्ययन में पाया गया है कि सांप के डसने से मौत होने के जोखिम 250 में लगभग 1 है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में (जैसे ऊपर चर्चा की गई), मौत होने के जोखिम 100 में 1 तक भी हैं.

अध्ययन के अनुसार, साल 2015 के दौरान भारत में अनुमानित 11.1-17.7 लाख सांप के डसने के मामले देखे गए, जिनमें से 70 प्रतिशत मामलों में जहरीले सांप के डसने के लक्षण पाए गए. इस लेख में यह भी कहा गया है कि, भारत सहित एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और ओशिनिया के कई हिस्सों में गरीब ग्रामीण समुदायों में सांप के डसने से होने वाली मृत्यु और विकलांगता एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है.

भारत में रसेल वाइपर (दबोइया रुसेली), क्रिट्स (बुंगारस प्रजाति) और कोबरा (नाज़ा प्रजाति) के अलावा, अन्य अज्ञात सांप की प्रजातियों से इंसान की मौत होने का खतरा है. उदाहरण के लिए, धान के खेतों में काम कर रहे किसानों को रसेल वाइपर दिन के समय डसता है, या रात में तब डसता है जब कोई बिना टॉर्च के घूम रहा होता है और लापरवाही से सांप पर पैर रख देता है.

मानव जीवन कैसे बचाएं?

लेख में यह बताया गया है कि रोकथाम और उपचार रणनीतियों से देश में सांप के डसने की मृत्यु दर और रुग्णता में काफी कमी आ सकती है. अनुसंधान से पता चलता है कि यदि कम ऊँचाई वाले घने कृषि क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को सांप के डसने से बचने के सरल तरीकों, जैसे कि 'साँप-सुरक्षित' फसल बुआई, रबर के जूते और दस्ताने पहनना और रिचार्जेबल टॉर्च (या मोबाइल फोन के फ्लैशलाइट) का उपयोग करने के बारे में शिक्षित किया जाए तो सांप के डसने के खतरे बहुत हद तक कम हो सकते है. ग्रामीण क्षेत्रों में और जरूरतमंद आबादी में प्रभावी एंटी-वेनम (जहर का असर खत्म करने वाली दवा) का वितरण, सर्पदंश मृत्यु दर को भी कम कर सकता है. बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में सांप के डसने से होने वाली मौतों और रुग्णता को रोकने के लिए एम्बुलेंस सेवाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी शुरू की जा सकती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2030 तक सांप के डसने के कारण होने वाली मौतों और रुग्णता की घटनाओं की संख्या को कम कर आधा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. यदि भारत सांप के डसने से होने वाली मौतों को रोकने और नियंत्रित करने में सक्षम है, तो सर्पदंश से होने वाली मौतों और रुग्णता दर को रोकने का वैश्विक लक्ष्य को 2030 तक पूरा कर लिया जाएगा.

सांप के डसने की घटनाओं का डेटा

हालाँकि भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर अस्पतालों में 2003 से 2015 की अवधि के दौरान सांप के डसने से केवल 15,500 मौतों को दर्ज किया है, लेकिन इंडियन मिलियन डेथ स्टडी के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में सांप के डसने से 1,54,200 मौतें हुई हैं, जो आधिकारिक आंकड़ों की तुलना में लगभग दस गुना अधिक है.

इस अध्ययन में भारत सरकार से सिफारिश की है कि सांप से डसने से संबंधित मृत्यु दर और रुग्णता की सही रिपोर्टिंग के लिए एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के तहत सांप के डसने को ‘नोटिफ़िएबल डिसीज़’ के रूप में नामित और लागू करना चाहिए. चूंकि अधिकांश मौतें घर पर होती हैं, इसलिए मृत्यु दर पर निगरानी के माध्यम से समुदायिक ट्रैकिंग की भी जरूरत है.

 

References:

Trends in snakebite deaths in India from 2000 to 2019 in a nationally representative mortality study -Wilson Suraweera, David Warrell, Romulus Whitaker, Geetha Menon, Rashmi Rodrigues, Sze Hang Fu, Rehana Begum, Prabha Sati, Kapila Piyasena, Mehak Bhatia, Patrick Brown and Prabhat Jha, published on July 7th, 2020, please click here to access

Study estimates more than one million Indians died from snakebite envenoming over past two decades, World Health Organisation Newsroom, 10 July, 2020, please click here to access

Snakebite Mortality in India: A Nationally Representative Mortality Survey -Bijayeeni Mohapatra, David A. Warrell, Wilson Suraweera, Prakash Bhatia, Neeraj Dhingra, Raju M Jotkar, Peter S Rodriguez, Kaushik Mishra, Romulus Whitaker and Prabhat Jha, published in PLoS on April 12th, 2011, please click here to access

1.2 million died from snake bite in India between 2000-2019: Report -Anirudh Bhattacharyya, Hindustan Times, 7 July, 2020, please click here to access
 

Image Courtesy: World Health Organisation/ Ben Owens