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किस हाल में है देश के बुजुर्ग , 2016 में कितने हुए बुजुर्गों के खिलाफ अपराध, पढ़ें इस न्यूज एलर्ट में..

बीते तीन सालों में देश की बुजुर्ग आबादी के खिलाफ हुई अपराध की घटनाओं में लगातार इजाफा हुआ है. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के नये आंकड़ों के मुताबिक 2016 में 60 साल या इससे ज्यादा उम्र के नागरिकों के खिलाफ देश में कुल 21,410 मामले प्रकाश में आये.


साल 2014 में बुजुर्ग लोगों के खिलाफ अपराध के कुल 18,714 मामले प्रकाश में आये थे जबकि 2015 में ऐसे अपराधों की संख्या 9.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 20,532 हो गई. 2015 की तुलना में 2016 में बुजुर्ग आबादी के खिलाफ होने वाले अपराधों में 4.3 फीसद का इजाफा हुआ है और अपराध की दर(प्रति लाख बुजुर्ग आबादी के खिलाफ अपराधों की संख्या) तीन सालों में 18.3 से बढ़कर 20.6 हो गई है.


बुजुर्ग आबादी के खिलाफ हुए अपराधों में सबसे ज्यादा तादाद ठगी के मामलों ( कुल 1941) की है और अपराध के ऐसे मामलों में महाराष्ट्र (कुल-800) सबसे अव्वल है. इसके बाद तेलंगाना और आंध्रप्रदेश का नंबर है. साठ साल या इससे ज्यादा उम्र के लोगों के खिलाफ ठगी के तेलंगाना में 224 मामले प्रकाश में जबकि आंध्रप्रदेश में 209 मामले.


ठगी के अलावे बुजुर्ग आबादी के खिलाफ हुए अपराध अन्य गंभीर मामले हत्या और डकैती के रहे. साल 2016 में 60 साल या इससे अधिक उम्र के लोगों की हत्या की कुल 1055 घटनाएं प्रकाश में आईं जबकि डकैती के कुल मामलों की संख्या 1024 रही. वरिष्ठ नागरिकों की हत्या की सबसे ज्यादा घटनाएं यूपी (188) में हुईं जबकि डकैती के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र( 416) में प्रकाश में आये.


गौरतलब है कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के नये आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र 60 साल और इससे ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी के लिहाज से देश में दूसरे नंबर ( 2016 में 111 लाख) पर है जबकि दस्तावेज में 2016 में यूपी में बुजुर्ग आबादी की तादाद सबसे ज्यादा(154 लाख) होने का अनुमान किया गया है.


अगर राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को मिलाकर देखें तो देश की बुजुर्ग आबादी के खिलाफ हिंसा की सबसे ज्यादा घटनाएं महाराष्ट्र (4,694 मामले) में प्रकाश में आयी हैं. इसके बाद मध्यप्रदेश (3,877 मामले) तथा तमिलनाडु (2,895 मामले) का स्थान है. वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ हुए कुल अपराधों में इन राज्यों का हिस्सा क्रमशः 21.9%, 18.1% तथा 13.5% है.


गौरतलब है कि देश में 60 साल या इससे ज्यादा उम्र के लोगों की तादाद 10 करोड़ से ज्यादा है और ज्यादातर बुजुर्गों की माली हालत ठीक नहीं हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक ग्रामीण भारत में 66.4 प्रतिशत बुजुर्ग पुरुष और 28.4 प्रतिशत बुजुर्ग महिलाएं मुख्य या सीमांत कामगार के रुप में आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय हैं. शहरों में बुजुर्ग पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 46.1 प्रतिशत का और बुजुर्ग महिलाओं के लिए 11.3 प्रतिशत का है. साल 2001 से 2011 के बीच शहरी और ग्रामीण भारत में आर्थिक गतिविधि में भाग लेने वाली महिलाओं का अनुपात बढ़ा है.(देखें एलर्ट के नीचे लिखे गये तथ्य)


नेशनल सैंपल सर्वे की एक रिपोर्ट(2011) में बताया गया था कि देश के 65 फीसद बुजुर्ग रोजमर्रा के भरण-पोषण के लिए दूसरों पर निर्भर हैं और बुजुर्गों के सशक्तीकरण के लिए सक्रिय नागरिक संगठन हैल्पेज इंडिया की एक रिपोर्ट(2014) में कहा गया था कि दुर्व्यवहार के शिकार 46 फीसद बुजुर्ग आर्थिक रुप से दूसरे पर निर्भर होने को अपने साथ होने वाले बुरे बरताव की प्रमुख वजह मानते हैं.


यूनाइडेट नेशन्स पॉपुलेशन फंड की एक रिपोर्ट के अनुसार बुजुर्गों के बीच सबसे दयनीय दशा महिलाओं की है. 59 फीसद बुजुर्ग महिलाओं को वेतन, पेंशन, सूद आदि किसी भी साधन से किसी किस्म की निजी आय हासिल नहीं होती जबकि कुल 26 फीसद महिलाओं को 12 हजार रुपये सालाना की आय में अपना गुजारा करना पड़ रहा है.यूनाइटेड नेशन्स की इस रिपोर्ट के अनुसार जिन बुजुर्गों महिलाओं के पास निजी आय का कोई साधन नहीं है उनमें 42 प्रतिशत गरीब हैं, 4 प्रतिशत अकेले जीवन व्यतीत करती हैं जबकि 49 फीसद विधवा हैं. तकरीबन 66 प्रतिशत बुजुर्ग महिलाएं आसरे के लिए पूरी तरह किसी दूसरे पर निर्भर हैं जबकि 21 फीसद बुजुर्ग महिलाएं गुजारे के लिए आंशिक रुप से किसी पर निर्भर हैं.


देश के बुजुर्गों से संबंधित कुछ प्रमुख तथ्य नीचे लिखे जा रहे हैं :


बुजुर्गों की आबादी पर केंद्रित नई सरकारी रिपोर्ट Elderly in India: Profile and Programmes 2016 के महत्वपूरण तथ्य---


• लगभग सात करोड़ तीस लाख यानि देश की 71 फीसद बुजुर्ग आबादी गांवों में रहती है जबकि 3 करोड़ 60 हजार की की संख्या में बुजुर्ग आबादी(कुल का 29 प्रतिशत) शहरी इलाकों में रहती है.


• साल 2001 से 2011 के बीच बुजुर्ग आबादी की वृद्धि 35.5 प्रतिशत रही जबकि इसके पिछले दशक में बुजुर्ग आबादी में बढोत्तरी 25.2 प्रतिशत हुई थी. आम आबादी 2001-2011 के बीच 17.7 प्रतिशत बढ़ी जबकि इसके पहले के दशक में आम आबादी में 21.5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई थी.


• साल 1961 से 2011 के बीच ग्रामीण भारत में बुजुर्ग आबादी की तादाद 5.8 प्रतिशत से बढ़कर 8.8 प्रतिशत तथा शहरी भारत में 4.7 प्रतिशत से बढ़कर 8.1 प्रतिशत हो गई है.


• जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि 0-14 आयु-वर्ग की आबादी में 1971 तक बढ़ोत्तरी हुई लेकिन इसके बाद के दशकों में धीरे-धीरे कमी होती गई. साल 2011 में 0-14 आयु-वर्ग के लोगों की संख्या कुल आबादी में 30.8 प्रतिशत थी. बुजुर्गों की आबादी में 1951 से बढोत्तरी हो रही है और साल 2011 में यह बढोत्तरी 8.6 प्रतिशत पर पहुंच गई है. काम करने योग्य उम्र(15-59 वर्ष) के लोगों की संख्या 1971 से बढ़ रही है और इस आयु-वर्ग के लोगों की संख्या 2011 में कुल आबादी का 60.3 प्रतिशत थी.

 

• प्रांतवार देखें तो केरल की आबादी में बुजुर्ग लोगों की तादाद सबसे ज्यादा(12.6प्रतिशत) है. इसके बाद गोवा(11.2 प्रतिशत) और तमिलनाडु(10.4 प्रतिशत) का स्थान है. इसकी वजह जीवनशैली और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं हो सकती हैं.

 

•देश के कुल 68.7 प्रतिशत परिवार या कह लें घरों कोई भी व्यक्ति 60 साल या इससे ज्यादा उम्र का नहीं है. ग्रामीण भारत में 67.5 प्रतिशत घरों में तथा शहरी भारत में 71.2 प्रतिशत घरों में कोई भी व्यक्ति 60 साल या इससे ज्यादा उम्र का नहीं है. देश के तकरीबन 21.6 प्रतिशत घरों में कोई एक व्यक्ति 60 साल या इससे ज्यादा उम्र का है जबकि 9.9 प्रतिशत घरों में दो व्यक्ति इस उम्र के हैं.


• 2011 की जनगणना के मुताबिक आम आबादी के लिए लिंगानुपात(प्रति 1 हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या) 943 है जबकि बुजुर्ग आबादी के लिए लिंगानुपात 1033 है. 1951 में भी तकरीबन यही स्थिति थी जब आम आबादी में लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 946 स्त्रियों का था और बुजुर्ग आबादी में 1028 स्त्रियों का.


• नई जनगणना(2011) से पता चलता है कि बुजुर्ग आबादी के बीच विवाहित महिलाओं की संख्या विवाहित पुरुषों की तुलना में कम है. 70 साल की उम्र के बाद 60 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं विधवा हो जाती हैं.


• भारत में आयु-प्रत्याशा शहरी और ग्रामीण दोनों ही इलाके में बढ़ी है. सन् 1970-75 में ग्रामीण इलाके में किसी नवजात की आयु-प्रत्याशा 48 वर्ष की थी जो 2009-13 में बढ़कर 66.3 वर्ष हो गई है, शहरी इलाके में यह वृद्धि 58.9 वर्ष से बढ़कर 71.2 साल पर आ पहुंची है. ग्रामीण भारत के 60 साल की उम्र वाले लोगों के लिए आयु-प्रत्याशा 197-75 में 13.5 वर्ष की थी जो 2009-13 में बढ़कर 17.5 साल की हो गई है. शहरी भारत के 60 साल की उम्र वाले लोगों की लिए यह आंकड़ा 15.7 वर्ष से बढ़कर 19.1 साल का हो गया है.


• 60 साल की उम्र वालों के लिए सर्वाधिक आयु-प्रत्याशा वाला राज्य पंजाब है जहां इसका आंकड़ा पुरुषों के लिए 19.3 वर्ष का है. 60 वर्ष की आयु वाले लोगों के लिए सबसे कम आयु-प्रत्याशा वाले राज्य असम और मध्य प्रदेश हैं जहां आंकड़ा 15.4 वर्ष का है. 60 साल की उम्र की महिलाओं के लिए सर्वाधिक आयु-प्रत्याशा वाला राज्य केरल(21.6 वर्ष) है और बिहार इस उम्र की महिलाओं के लिए सबसे कम आयु-प्रत्याशा(17.5 वर्ष) वाला राज्य.


• 2011 की जनगणना के मुताबिक ग्रामीण भारत में 66.4 प्रतिशत बुजुर्ग पुरुष और 28.4 प्रतिशत बुजुर्ग महिलाएं मुख्य या सीमांत कामगार के रुप में आर्थिक गतिविधियों में भाग लेते हैं. शहरों में बुजुर्ग पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 46.1 प्रतिशत का और बुजुर्ग महिलाओं के लिए 11.3 प्रतिशत का है. साल 2001 से 2011 के बीच शहरी और ग्रामीण भारत में आर्थिक गतिविधि में भाग लेने वाली महिलाओं का अनुपात बढ़ा है.


• बुजुर्ग महिलाओं में साक्षरता-दर(28प्रतिशत) बुजुर्ग पुरुषों की साक्षरता-दर(59फीसद) की तकरीबन आधा है.


• शहरी इलाकों में 30.3 प्रतिशत बुजुर्ग व्यक्ति माध्यमिक स्तर तक शिक्षित हैं जबकि ग्रामीण भारत में ऐसे बुजुर्गों की तादाद 7.1 प्रतिशत है.


• 2011 की जनगणना के मुताबिक बुजुर्ग आबादी को दो तरह के रोग सबसे ज्यादा है- एक तो दृष्टि संबंधी और दूसरे चलने-फिरने से सबंधित.


• गांवों में 5.59 प्रतिशत और शहरों में 4.18 प्रतिशत बुजुर्ग एक ना एक तरह की (रोगजन्य) असमर्थता से पीड़ित हैं.