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जम्मू-कश्मीर: हिंसा के कारण विस्थापित होने वालों की तादाद सबसे ज्यादा तादाद

पाकिस्तान से बढ़ती सैन्य तनातनी और युद्ध की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने घोषणा की : ‘जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास रहने वाले नागरिकों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाएगा.' लेकिन क्या सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग सचमुच आरक्षण का लाभ हासिल कर पाने की स्थिति में हैं ?

 

इस सवाल का उत्तर ढूंढ़ने के लिए इन तथ्यों पर गौर कीजिए : बीते साल जनवरी से जून महीने के दौरान संघर्ष और हिंसा की घटनाओं के कारण पूरी दुनिया में लगभग सवा पचास लाख लोग अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होने पर मजबूर हुये. भारत में ऐसे लोगों की तादाद 2018 के पहले छह महीनों में 1 लाख 66 हजार रही और सबसे ज्यादा संख्या में लोग जम्मू-कश्मीर में विस्थापित हुये.


ये तथ्य इंटरनल डिस्प्लेस्मेंट मॉनिटरिंग सेंटर के हैं. संस्था की नई रिपोर्ट के मुताबिक 2018 के पूर्वाद्ध में संघर्ष और हिंसा के हालात के कारण जिन दस देशों में सबसे ज्यादा लोग विस्थापन के शिकार हुये, भारत ऐसे देशों में युद्ध-जर्जर अफगानिस्तान से बस थोड़ा ही पीछे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2018 के पूर्वाद्ध में 1.66 लाख लोग हिंसाजन्य परिस्थितियों में विस्थापन को मजबूर हुये जबकि अफगानिस्तान में कुल 1.68 लाख. इथोपिया(14 लाख विस्थापित) और सीरिया(12 लाख विस्थापित) ऐसे देशों की सूची में शीर्ष पर हैं.

 

उक्त अवधि में भारत में हिंसाजन्य परिस्थितियों के कारण जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा तादाद में लोग विस्थापित हुये. विस्थापन की सबसे बड़ी वजह रही सूबे में नियंत्रण रेखा पर होनेवाली गोलीबारी- इससे 1,59000 लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा. रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में अकेले मई महीने की घटना(पाकिस्तान की तरफ से गोलीबारी) में ही 1,00,000 लोग विस्थापित हो गये.

 

गौरतलब है कि भारत में अंदरुनी विस्थापन की एक बड़ी वजह विकास-परियोजनाओं को बताया जाता है. एक शोध अध्ययन( नलिन नेगी एवं सुजाता गांगुली, 2011) के मुताबिक बीते पचास सालों में विकास-परियोजनाओं के कारण भारत में लगभग 5 करोड़ लोग विस्थापित हुये हैं. उनमें बांध, खदान, औद्योगिक विकास आदि की परियोजनाओं के कारण विस्थापित होने वाले लोगों की तादाद 2 करोड़ 10 लाख है.

 

लेकिन इंटरनल डिस्प्लेस्मेंट मॉनिटरिंग सेंटर के तथ्यों का संकेत है कि भारत में प्राकृतिक आपदा तथा हिंसाजन्य परिस्थितियों के कारण विस्थापित होने वाले लोगों की तादाद हाल के सालों में अच्छी-खासी रही है. मिसाल के लिए 2017 में भारत में अंदरुनी तौर पर विस्थापन का शिकार होने वाले लोगों में 1,346,000 का इजाफा हुआ और विस्थापन की एक बड़ी वजह रही मॉनसून के समय आने वाली बाढ़. साल 2017 में अकेले बिहार में 855,000 लोग बाढ़ के कारण विस्थापन के शिकार हुये.


इसी तरह, हिंसाजन्य परिस्थितियों के कारण विस्थापित हो रहे लोगों की तादाद भी लाखों में है. आईडीएमसी के तथ्यों के मुताबिक 2017 में संघर्ष तथा हिंसा के कारण लगभग 78 हजार लोग भारत में विस्थापित हुये और इनमें 50 प्रतिशत से ज्यादा तादाद जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाके के लोगों की है.

 

भारत में 2016 में आपदा, हिंसा तथा संघर्षपूर्ण परिस्थितियों के कारण विस्थापित होने वाले लोगों की तादाद 24 लाख थी और हिंसाजन्य परिस्थितियों के बीच होने वाले विस्थापन के मामले में भारत विश्व में चीन और फिलीपिन्स के बाद तीसरे नंबर पर था.


संघर्षपूर्ण तथा हिंसाजन्य परिस्थितियों में होने वाले विस्थापन के बारे में तकनीकी जानकारी के लिए कृपया यहां क्लिक कीजिए

 

(पोस्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीर प्रतीकात्मक है. तस्वीर के मूल स्रोत के लिए कृपया इस समाचार पर क्लिक कीजिए)