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दूषित पेयजल: बिहार, बंगाल और यूपी आर्सेनिक मिले पेयजल से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य

जल-संसाधन मंत्रालय की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक देश की सघन आबादी वाले आठ राज्यों में भूमिगत जल विषैले रसायन आर्सेनिक से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. रिपोर्ट में असम, बिहार, गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश, पंजाब, उत्तरप्रदेश तथा पश्चिम बंगाल के आर्सेनिक प्रभावित इलाकों पर विशेष चर्चा की गई है.

 

कुएं तथा चापाकल से लिए गये पानी के नमूने में आर्सेनिक की 0.01 से 0.05 मिलीग्राम प्रतिलीटर सांद्रता के आधार पर रिपोर्ट में देश के कुल 94 जिलों को सबसे ज्यादा आर्सेनिक प्रभावित इलाके के रुप में चिह्नित किया गया है. इनमें 19 जिले सिर्फ बिहार में हैं.

 

रिपोर्ट के मुताबिक आर्सेनिक की विशेष सांद्रता वाला जिलों की संख्या सबसे ज्यादा (19) बिहार में है. प्रतिलीटर 0.01-0.05 मिलीग्राम आर्सेनिक सांद्रता वाले जिलों की संख्या उत्तरप्रदेश तथा गुजरात में प्रत्येक में 12 तथा पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश में प्रत्येक में 8 है. असम में ऐसे जिलों की तादाद 7 है.

 

गौरतलब है कि प्रतिलीटर 0.05 मिलीग्राम से ज्यादा आर्सेनिक-सांद्रता वाले जिलों की संख्या सबसे ज्यादा(6) पश्चिम बंगाल में है. उत्तरप्रदेश में प्रतिलीटर 0.05 मिलीग्राम से ज्यादा आर्सेनिक-सांद्रता वाले जिलों की संख्या 5 है जबकि असम और पंजाब में ऐसे जिलों की संख्या 3-3 है. देश में कुल 26 जिलों/संघशासित प्रदेशों में पानी के नमूने में प्रतिलीटर 0.05 मिलीग्राम से ज्यादा आर्सेनिक-सांद्रता पायी गई है.

 

गौरतलब है कि आर्सेनिक-प्रभावित जिलों की तादाद भले ही बिहार में ज्यादा हो लेकिन आर्सेनिक-संदूषित पेयजल से प्रभावित सर्वाधिक बस्तियां पश्चिम बंगाल में है. पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के राज्यमंत्री श्री रमेश चंदप्पा जिगजीनगी ने लोकसभा में एक सवाल (अतारांकित प्रश्न संख्या 2671) के जवाब में 27 दिसंबर 2018 को बताया था कि आर्सेनिक-प्रभावित सबसे ज्यादा बस्तियां पश्चिम बंगाल (9,250) है. आर्सेनिक प्रभावित बस्तियों की तादाद के मामले में असम दूसरे नंबर (कुल 4,327) पर है. बिहार में ऐसी बस्तियों की तादाद 815, उत्तरप्रदेश में 745 तथा पंजाब में 652 है. (इससे संबंधित आरेख के लिए यहां क्लिक करें)

 

जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल में 8 जिलों के 79 प्रखंडों में भूमिगत जल में आर्सेनिक की मात्रा अनुमोदित-सीमा (0.05 मिलीग्राम प्रतिलीटर) से ज्यादा है. पश्चिम बंगाल में माल्दा, मुर्शिदाबाद, नादिया, उत्तरी 24 परगना, दक्षिणी 24 परगना, हावड़ा, हुगली तथा बर्दवान जिले में भूमिगत जल में आर्सेनिक की सांद्रता सर्वाधिक है. सूबे में 100 मीटर की गहराई तक मौजूद पानी में आर्सेनिक की सांद्रता पायी गई है, हालांकि इससे ज्यादा गहराई का पानी आर्सेनिक के सदूषण से मुक्त है.

 

आर्सेनिक-संदूषित पेयजल का स्वास्थ्य पर प्रभाव

 

इस बाबत लोकसभा में 20 जुलाई 2018 को स्वास्थ्य एवं परिवार-कल्याण मंत्रालय की राज्यमंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल के उत्तर को देखा जा सकता है. उन्होंने एक सवाल(अतारांकित प्रश्न 550) के क्रम में पूछा गया कि क्या देश के पिछड़े और ग्रामीण इलाकों में आर्सेनिक के संदूषण के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं तो मंत्री का जवाब था कि कोई खास बीमारी सिर्फ आर्सेनिक के संदूषण के कारण पैदा हो रही, ऐसा नहीं कहा जा सकता और इस बाबत सरकार के पास अलग से कोई ब्यौरा मौजूद नहीं है.

 

पानी में आर्सेनिक की सांद्रता ज्यादा होना कैंसरकारक माना जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक लंबे समय तक आर्सेनिक के संदूषण वाले पेयजल और खाद्य-पदार्थ का इस्तेमाल करने से चमड़ी, फेफड़े तथा मूत्राशय का कैंसर हो सकता है.

 

लंबे समय तक आर्सेनिक के संदूषण वाले पानी तथा खाद्य पदार्थ के इस्तेमाल से मधुमेह, श्वांस रोग तथा हृदय संबंधी रोग होने की बात भी सामने आयी है. आर्सेनिक के संदूषण का मनुष्य की याददाश्त और बोध-क्षमता पर भी असर होता है.