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बिहार के 20 जिलों में सूखे के हालात, बचाव और राहत के जल्द हों उपाय- एनएपीएम

बिहार के 20 जिलों में मॉनसून ने दगा किया है, इन जिलों में जून-जुलाई के महीने में 80 से 50 फीसद तक कम बारिश हुई है लेकिन कम बारिश वाले जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया जाना अभी बाकी है.

 

कम बारिश वाले जिलों में धान की रोपाई के रकबे में आई कमी की तरफ ध्यान दिलाते हुए जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय(एनएपीएम) की बिहार इकाई ने मांग की है कि प्रदेश की सरकार को हालात के मद्देनजर जल्दी से जल्दी राहत के उपाय करने चाहिए.

 

गौरतलब है कि जून और जुलाई के महीने में कुल बारिश अगर सामान्य से 50 प्रतिशत या इससे कम हो तो राज्य की सरकार किसी इलाके को सूखाग्रस्त करार दे सकती है. यह बात केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सूखे की समस्या और उसके निदान से संबंधित 2016 निर्देशिका में लिखी है लेकिन बिहार सरकार के कृषि विभाग या फिर आपदा प्रबंधन विभाग ने इस एलर्ट के लिखे जाने तक राज्य में जारी सूखे की स्थिति के बारे में कोई सूचना जारी नहीं की है.

 

मौसम विभाग के नये आंकड़ों संकेत करते हैं कि वैशाली और पटना जिले में सूखे की हालात ज्यादा गंभीर रुप ले सकते हैं. वैशाली जिले में इस साल 1 जून से 25 जुलाई के बीच सामान्य से 83 फीसद और पटना जिले में 81 फीसद कम बारिश हुई है. बिहार के सारण जिले की स्थिति भी वैशाली और पटना से कम गंभीर नहीं. मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जून-जुलाई के महीने में सारण जिले में मॉनसून की बारिश सामान्य से 77 फीसद कम रही है.( देश भर में जून जुलाई महीने में बारिश की स्थिति देखने के लिए यहां क्लिक करें. इस लिंक पर मौजूद मानचित्र में बिहार के जिलों में बारिश की स्थिति जानी जा सकती है.)

 

सारण सहित मुंगेर, सहरसा, सीवान, भोजपुर और शेखपुरा में जिले में 1 जून से 25 जुलाई के बीच मॉनसून की बारिश सामान्य से 70 फीसद से 70 फीसद तक कम रही है जबकि मुजफ्फरपुर, अरवल, खगड़िया और जहानाबाद में उक्त अवधि में बारिश सामान्य से 60 से 69 फीसद कम हुई है. जून-जुलाई के महीने में बेगूसराय, नालंदा, समस्तीपुर, लखीसराय, अररिया, जमुई, शिवहर और गोपालगंज में मॉनसून की वर्षा में 50 से 59 फीसद की कमी रही है. (बिहार के कुल 38 जिलों में बारिश की स्थिति के लिए देखें नीचे की तालिका)

 

उल्लेखनीय है कि बिहार में बीते एक दशक में बार-बार सूखे के हालात पैदा हुए हैं. बिहार सरकार के आपदा-प्रबंधन से संबंधित एक रोडमैप प्लान के मुताबिक साल 2009 में बिहार के 26 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था जबकि साल 2010 में सभी 38 जिले सूखाग्रस्त घोषित हुए. इसी तरह 2013 में सूबे के 33 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया. आपदा-प्रबंधन के रोडमैप प्लान के मुताबिक 2012, 2014 तथा 2015 के साल भी बिहार के लिए सूखे के लिहाज से गंभीर माने जायेंगे क्योंकि इन सालों में भी मॉनसून की बारिश में नियमितता नहीं रही तथा 2015 के मार्च में बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि से सूबे में फसलों को भारी नुकसान हुआ था.

 

Name of District

Rainfall (in mm.)

Name of District

Rainfall (in mm.)

01.06.2018 to 25.07.2018

01.06.2018 to 25.07.2018

%Deficient

%Deficient

वैशाली

-83

गोपालगंज

-50

पटना

-81

पूर्वी चम्पारण

-49

सारण

-77

गया

-43

मुंगेर

-74

कटिहार

-40

सहरसा

-74

पूर्णिया

-40

सिवान

-73

बक्सर

-39

भोजपुर

-71

दरभंगा

-39

शेखपुरा

-70

मधेपुरा

-39

मुजफ्फरपुर

-69

सुपौल

-38

अलवर

-67

नवादा

-35

खगड़िया

-66

रोहतास

-34

जहानाबाद

-60

कैमूर

-28

बेगुसराय

-59

औरंगाबाद

-27

नालंदा

-55

सीतामढ़ी

-25

समस्तीपुर

-55

भागलपुर

-18

लखीसराय

-55

किशनगंज

-15

अररिया

-52

मधुबनी

-13

जमुई

-51

पश्चिमी चंपारण

-1

शिवहर

-51

बांका

5

स्रोत- http://www.imd.gov.in

 

सूबे के 50 फीसद से ज्यादा जिलों में धनरोपनी के मुख्य समय में मॉनसून की बारिश के कम होने से हालात ग्रामीण आबादी की जीविका के लिहाज से हालात संगीन हो सकते हैं. सूबे की अर्थव्यवस्था में कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र मुख्य बने हुए हैं. बिहार में 77 फीसद आबादी कृषि-कर्म में लगी है और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में खेती-बाड़ी तथा सहायक क्षेत्रों का योगदान लगभग एक चौथाई का है. सूखे की स्थिति वाले जिलों में कृषि के प्रभावित होने से एक बड़ी आबादी के लिए जीविका का संकट पैदा हो सकता है. इंडियास्पेन्ड के एक आकलन के मुताबिक बिहार में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की तादाद 33.7 प्रतिशत(राष्ट्रीय औसत से ज्यादा) है तथा बिहार गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली आबादी के मामले में छत्तीसगढ़( 39.9 प्रतिशत) और झारखंड (36.9 प्रतिशत) के साथ शीर्ष के राज्यों में शुमार है.

 

जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय(एनएपीएम) की बिहार इकाई ने सूखे की आशंका से जूझते सूबे के 20 जिलों में मौजूद गरीब आबादी को जीविका के संकट से उबारने के लिए निम्नलिखित मांग की है:

 

-- राज्य सरकार सूबे के 20 जिलों को जल्द से जल्द सूखाग्रस्त घोषित करे.

-- राज्य में आकस्मिक फसल बीमा योजना को लागू कर बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार का काम किया जाए.

-- राज्य के सभी किसानों की कर्ज माफी हो, लगान और पटवन माफ़ हो, बिजली संचालित पम्प का बिजली बिल माफ़ हो,

-- एपीएल और बीपीएल की बाध्यता खत्म करके सभी वर्गों के लोगों के लिए तत्काल राशन वितरण सुनिश्चित किया जाए.

-- सरकार बड़े पैमाने पर मनरेगा का काम खोले और सूखाग्रस्त जिलों में 200 दिनों के काम का हक दे.

-- सभी स्कूलों में मिड-डे मील के लिए राशन की आपूर्ति और संचालन को निश्चित किया जाए.

 

पोस्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीर साभार बीबीसी और फ्लिकर