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भारत में धर्म और जाति के नाम पर ऑनलाइन ट्रोलिंग सबसे ज्यादा- नई रिपोर्ट

डिजिटल होते इंडिया में बांग्लादेश या पाकिस्तान के मुकाबले ऑनलाइन उत्पीड़न का शिकार होने वाले लोगों की तादाद ज्यादा है.


साल 2017 में इंटरनेट की आभासी दुनिया में मौजूद 15-65 साल के हर पांच में से एक भारतीय को ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रत्येक 100 इंटरनेट उपभोक्ताओं में 12 उपभोक्ता ऑनलाइन उत्पीड़न के शिकार हुए.


यह जानकारी सूचना और प्रौद्योगिकी से संबंधित नीतियों तथा नियमन के विषय पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में काम करने वाले थिंक टैंक एलआईआरएनईएशिया की एक नई रिपोर्ट में सामने आयी है.


आफ्टर एक्सेस: आईसीटी एक्सेस एंड यूज इन इंडिया एंड द ग्लोबल साऊथ शीर्षक इस रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करने वाले 28 फीसद भारतीय उपभोक्ताओं(सैम्पल साइज: 919) ने बुरे अनुभव से गुजरने के बाद किसी खास वेबसाइट का इस्तेमाल कम कर दिया जबकि उत्पीड़न के शिकार ऐसे 48 फीसद इंटरनेट उपभोक्ताओं का कहना था कि उन्होंने खास वेबसाइट का इस्तेमाल पहले की ही तरह जारी रखा है.


इंटरनेट के आभासी संसार में उत्पीड़न का सामना करने वाले लोगों में से मात्र 15 फीसद ने किसी एप्प या अपने प्रोफाइल को डिलीट किया जबकि 5 प्रतिशत की तादाद में ऐसे लोगों ने कांटेक्ट को अनफ्रेंड अथवा ब्लॉक करने या किसी खास ग्रुप/फोरम को छोड़ने का विकल्प अपनाया. उत्पीड़न के शिकार केवल 4 प्रतिशत लोग ही ऐसे थे जिन्होंने बुरे अनुभव से गुजरने के बाद इंटरनेट का इस्तेमाल पहले की तुलना में कम किया.


ऑनलाइन उत्पीड़न के सबसे ज्यादा अनुभव सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर हुए.. भारत में सोशल मीडिया के इस खास पहलू पर रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स ने भी कुछ दिनों पहले ध्यान दिलाया था.


ऑनलाइन उत्पीड़न के शिकार लोगों में 39 फीसद के साथ बुरा वाकया फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पेश आया जबकि 29 प्रतिशत के साथ ह्वाट्सएप्प जैसे चैट एप्लीकेशन्स पर. उत्पीड़न का सामना करने वाले लोगों में 16 प्रतिशत के साथ बुरा वाकया वेबसाइट के कमेंट सेक्शन में पेश आया. ऑनलाइन गेमिंग के दौरान उत्पीड़न का शिकार होने वाले लोगों की तादाद 7 प्रतिशत थी और 3 प्रतिशत तादाद ईमेल के जरिए उत्पीड़न के शिकार होने वालों लोगों की रही.


एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि शहरी इलाके की तुलना में ग्रामीण इलाके के इंटरनेट उपभोक्ता ज्यादा संख्या में ऑनलाइन उत्पीड़न का शिकार हुए. ऑनलाइन उत्पीड़न के शिकार शहरी इलाके के इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 17 फीसद रही जबकि ग्रामीण इलाके के इंटरनेट उपभोक्ताओं के लिए यह तादाद रिपोर्ट में 20 प्रतिशत बतायी गई है.


गौरतलब है कि ऑनलाइन उत्पीड़न के शिकार पुरुष इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या(20 प्रतिशत) महिलाओं(17 प्रतिशत) से ज्यादा है.


रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन उत्पीड़न के शिकार लोगों में तकरीबन 50 फीसद ऐसे थे जिन्हें अपमानजनक नाम देकर चोट पहुंचायी गई जबकि ऐसे 20 प्रतिशत लोगों की एक ना एक तरीके से जान-बूझकर निन्दा या आलोचना की गई ताकि उन्हें शर्मिन्दगी झेलनी पड़ी साथ ही उन्हें अपमानजनक नाम से पुकारा किया गया.


ऑनलाइन उत्पीड़न झेलने वालों में 13 फीसद तादाद ऐसे लोगों की रही जो जिन्हें शारीरिक रुप से हानि पहुंचाने की धमकी दी गई, 3 प्रतिशत को यौन-उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा जबकि 16 प्रतिशत तादाद ऐसे लोगों की रही जिनसे एक ना एक तरीके से संपर्क किया गया और उन्हें महसूस हुआ कि उनका ऑनलाइन पीछा किया जा रहा है.


रिपोर्ट के अनुसार सर्वेक्षण के दौरान ऑनलाइन उत्पीड़न के शिकार हुए भारतीय लोगों के जवावों से पता चलता है कि 21 फीसद मामलों में लैंगिक कारणों से उत्पीड़न किया गया. इतने ही(21 प्रतिशत) मामले धर्म या जातिगत भेदभाव के कारणों से किये जाने वाले ऑनलाइन उत्पीड़न के रहे जबकि राजनीतिक कारणों से होने वाले ऑनलाइन उत्पीड़न की तादाद 20 प्रतिशत थी.


ऑनलाइन उत्पीड़न का शिकार होनेवाले तकरीबन एक तिहाई लोगों का कहना था कि इंटरनेट के जरिए चोट पहुंचाने वाले व्यक्ति से वे पहले ऑफलाइन मिल चुके हैं, एक तिहाई का कहना था कि चोट पहुंचाने वाले व्यक्ति से उनका संपर्क ऑनलाइन ही हुआ और उससे उनकी ऑफलाइन मुलाकात नहीं हुई है जबकि 33 प्रतिशत का कहना था कि चोट पहुंचाने वाले व्यक्ति के साथ ऑनलाइन या ऑफलाइन उनका कभी संपर्क नहीं रहा है.


सोशल मीडिया का इस्तेमाल

भारत में सोशल मीडिया के इस्तेमाल के बारे में रिपोर्ट में दी गई कुछ अहम जानकारी निम्नलिखित है:

--- सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले खास आयुवर्ग (15-65 साल) के लोगों में पुरुषों की तादाद(22 प्रतिशत) महिलाओं(9 प्रतिशत) से ज्यादा है. कुल 16 देशों के बीच सोशल मीडिया के इस्तेमाल के मामले में सबसे ज्यादा जेंडर गैप बांग्लादेश में है, उसके बाद भारत में.


--- सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोगों की तादाद शहरी क्षेत्र में ज्यादा है, ग्रामीण क्षेत्र में कम( शहरी: 24 प्रतिशत, ग्रामीण: 11 प्रतिशत).


---- भारत में बेसिक फोन के जरिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों की तादाद 3 फीसद है, फीचर फोन के जरिए सोशल मीडिया के प्लेटफार्म का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 6 प्रतिशत जबकि स्मार्टफोन के जरिए सोशल मीडिया के प्लेटफार्म से जुड़ने वालों की तादाद 72 प्रतिशत है.


सोशल मीडिया से जुड़ने की वजह: (सैम्पल साइज : 754):

• चैटिंग (लिखकर): 86 प्रतिशत

• दोस्त तथा परिवार के साथ संपर्क में रहना : 91 प्रतिशत

• कॉल करने के लिए : 83 प्रतिशत

• वीडिया / पिक्चर/ म्यूजिक शेयर करने के लिए: 74 प्रतिशत

• नये दोस्त बनाने के लिए: 68 प्रतिशत

•समाचार पढ़ने के लिए: 77 प्रतिशत

• गेम खेलने के लिए: 66 percent

• शैक्षणिक सामग्री देखने के लिए: 71 प्रतिशत

• अपनी राय या अनुभव साझा करने के लिए: 63 प्रतिशत

• पेशवर तथा व्यावसायिक संपर्क साधने के लिए: 57 प्रतिशत

• सरकारी सोशल मीडिया पेज को फॉलो करने के लिए(नीतियों, नौकरियों आदि के बारे में जानने के ख्याल से: 58 प्रतिशत

• स्थानीय राजनेताओं को फॉलो करने के लिए : 47 प्रतिशत

• अपने प्रॉडक्ट कंटेट को शेयर करने के लिए: 55 प्रतिशत

• आपके प्राडक्ट या सेवाओं की मार्केंटिंग के लिए: 45 प्रतिशत


रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले 58 फीसद भारतीय ऐसे मीडिया प्लेटफार्म पर मौजूद समाचारों पर विश्वास नहीं करते जबकि 4 प्रतिशत तादाद ऐसे लोगों की भी है जो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मौजूद समाचारों पर बहुत ज्यादा यकीन करते हैं जबकि 25 प्रतिशत तादाद सोशल मीडिया पर मौजूद समाचारों के बारे में सामान्य तौर पर विश्वास करने वालों की है.


रिपोर्ट के बारे में


ऑफ्टर एक्सेस रिपोर्ट के लिए 19 राज्यों के 108 जिलों में 250 वार्ड और गांवों का रैंडम पद्धति से चयन कर 5069 घरों तथा लोगों से संपर्क किया गया. आमने-सामने का साक्षात्कार लोगों और घर के सदस्यों से औसतन 90 मिनट तक चला. फील्डवर्क 2017 के अक्तूबर-नवंबर महीने में हुआ.

 

इस कथा के विस्तार के लिए कृपया निम्नलिखित लिंक्स देखें:

 

AfterAccess India Report, 7 August, 2018, please click here to access


Indians online: One in five harassed, here is how, why -Karishma Mehrotra, The Indian Express, 9 August, 2018, please click here to access 


Online Trolling Takes Its Toll On The Country's Press Freedom Ranking, News alert by Inclusive Media for Change, 27 April, 2018, please click here to read more