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राजद्रोह के मामले बिहार और झारखंड में सबसे ज्यादा-- एनसीआरबी की नई रिपोर्ट

 

अलगाववादी रुझान वाले पूर्वोत्तर या जम्मू-कश्मीर में नहीं बल्कि बिहार और झारखंड में राजद्रोह की सबसे ज्यादा घटनाएं प्रकाश में आयी हैं.

नेशनल क्राईम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) विगत दो वर्षों से राजद्रोह के मामलों के बारे में आंकड़े प्रकाशित कर रहा है और ये आंकड़े बताते हैं कि अन्य राज्यों की तुलना में 2015 में राजद्रोह के सर्वाधिक घटनाएं बिहार में प्रकाश में आईं जबकि झारखंड 2014 में राजद्रोह की घटनाओं के लिहाज से सभी राज्यों में शीर्ष पर था.


अचरज नहीं कि राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार नागरिकों की संख्या के लिहाज से बिहार 2015 में तो झारखंड 2014 में शीर्ष के राज्यों में शुमार रहे हैं.


एनसीआरबी की नई रिपोर्ट क्राईम इन इंडिया 2015 के तथ्यों के मुताबिक बीते साल(2015) देश में राजद्रोह के कुल 30 मामले दर्ज हुए और इसमें तकरीबन एक तिहाई(9) मामले बिहार से हैं.


गत वर्ष देश भर में राजद्रोह के 30 मामलों में कुल 73 नागरिकों को गिरफ्तार किया गया और गिरफ्तार नागरिकों की सबसे ज्यादा संख्या(40) बिहार में रही.


2014 में देश भर से राजद्रोह के कुल 47 मामले प्रकाश में आये थे और इनमें तकरीबन 40 फीसद(18 मामले) झारखंड से थे. 2014 में राजद्रोह के आरोप में कुल 58 नागरिकों को गिरफ्तारी हुई और गिरफ्तार नागरिकों में सबसे ज्यादा बिहार(28) और झारखंड(18) के थे.


गौरतलब है कि 2015 में अलगाववादी रुझान वाले पूर्वोत्तर के राज्यों मिजोरम, नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में राजद्रोह का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ जबकि मणिपुर से राजद्रोह के 1 मामले की सूचना है.


माओवादी हिंसा से प्रभावित झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओड़ीशा से भी 2015 में राजद्रोह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ जबकि राजद्रोह के 4 मुकदमों के साथ पश्चिम बंगाल दूसरे स्थान पर है. हरियाणा, कर्नाटक और केरल में प्रत्येक में राजद्रोह के तीन-तीन मामले दर्ज हुए.

 

राजद्रोह का मुकदमा भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत दर्ज किया जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने बिलाल अहमद कल्लू बनाम आंध्रप्रदेश सरकार के मुकदमे(1997) में इस धारा के बारे में कहा कि भारत में विधि द्वारा स्थापित सरकार के प्रति अपने आचरण से घृणा या निन्दा के भाव पैदा करना या ऐसे शासन के प्रति अप्रेम जगाना राजद्रोह है.

 

अंग्रेजी जमाने के इस कानून के तहत कभी बाल गंगाधर तिलक और महात्मा गांधी जैसे स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं की गिरफ्तारी हुई थी. ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत कानूनी सुनवाई की सर्वोच्च संस्था प्रिवी काउंसिल ने धारा 124ए को व्यक्ति के मौलिक अधिकार के विरुद्ध मानकर गैर-जरुरी करार दिया था लेकिन स्वतंत्र भारत में कतिपय शर्तों के साथ राजद्रोह से संबंधित धारा को कायम रखा गया.

 

हाल के समय में राजद्रोह की धारा के दुरुपयोग को लेकर स्वयंसेवी संस्था कॉमनकॉज द्वारा दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह के मामलों में केदारनाथ सिंह बनाम बिहार सरकार(1962) पर दिए गये फैसले को नजीर मानते हुए कहा कि राजसत्ता के विरुद्ध हिंसा या अराजकता फैलाने की स्थिति को ही राजद्रोह का आधार माना जाय.

 

क्राईम इन इंडिया दस्तावेज के दो संस्करणों के आधार पर राजद्रोह के मामलों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य नीचे लिखे गये हैं---


----क्राईम इन इंडिया 2015 के मुताबिक 2015 में राजद्रोह के कुल 30 प्रकरण प्रकाश में आये और इन प्रकरणों में गिरफ्तार लोगों की संख्या 73 रही(गिरफ्तार किए गए सभी पुरुष हैं)

 

---- साल 2014 में राजद्रोह के 47 प्रकरण प्रकाश में आये और उनमें गिरफ्तार लोगों की संख्या 58 रही(55 पुरुष तथा 3 स्त्रियां)

 

---- साल 2015 में राजद्रोह के सर्वाधिक प्रकरण बिहार(कुल 9) के हैं. इसके बाद पश्चिम बंगाल(4),हरियाणा(3), कर्नाटक(3) तथा केरल(3) का स्थान है.

 

---- साल 2014 में राजद्रोह के सर्वाधिक प्रकरण झारखंड(18) से थे. इसके बाद बिहार(16), केरल(5), पश्चिम बंगाल(2) तथा ओड़ीशा(2) का स्थान रहा.

---- साल 2015 में राजद्रोह के कुल 9 प्रकरणों में बिहार में 40 लोगों की गिरफ्तारी हुई, पंजाब में राजद्रोह के कुल 1 प्रकरण में 10 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया. राजद्रोह के प्रकरणों में गिरफ्तार लोगों की संख्या के लिहाज से इसके बाद राजस्थान(9) और कर्नाटक(4) का स्थान शीर्ष पर है.

 

---- साल 2014 में राजद्रोह के प्रकरणों में बिहार में सर्वाधिक 28 लोगों को गिरफ्तार किया गया. राजद्रोह के प्रकरण में गिरफ्तार लोगों की संख्या के लिहाज से 2014 में झारखंड(18), केरल(4) तथा ओड़ीशा(4) शीर्ष के अन्य राज्य रहे.

 

---- 2015 में कुल 147 प्रकरणों को विधि द्वारा स्थापित राजसत्ता के विरुद्ध अपराध करार दिया गया. इसमें 20.4 फीसद प्रकरण राजद्रोह के करार दिए गए. 2014 में विधि द्वारा स्थापित राजसत्ता के विरुद्ध अपराध करार दिए गए प्रकरणों की संख्या 176 थी और इनमें 26.7 फीसद प्रकरण राजद्रोह के थे.

 

--- 2015 में विधि द्वारा स्थापित राजसत्ता के विरुद्ध अपराध करार दिए प्रकरणों में कुल 238 लोगों की गिरफ्तारी हुई जिसमें 30.7 फीसद लोगों की गिरफ्तारियां राजद्रोह के आरोप में हुईं. 2014 में विधि द्वारा स्थापित राजसत्ता के विरुद्ध अपराध करार दिए प्रकरणों में 224 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी जिसमें 25.9 फीसद लोगों की गिरफ्तारियां राजद्रोह के आरोप में हुईं.

 

----- 2015 में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कुल 73 लोगों में 29 व्यक्ति 18-30 आयुवर्ग के थे. ऐसे 32 व्यक्ति 30-45 आयुवर्ग के थे जबकि राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार 11 व्यक्ति 45-60 या इससे ज्यादा उम्र के थे.

 

----- साल 2014 में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कुल 58 लोगों में 25 व्यक्ति 18-30 आयुवर्ग के थे जबकि 31 व्यक्ति 30-45 वर्ष के थे. ऐसे केवल 2 व्यक्ति 45-60 या इससे ज्यादा उम्र के थे.

 

---- 2015 में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कुल 73 व्यक्तियों में 3 व्यक्तियों को पुलिस या मैजिस्ट्रेट ने साक्ष्य के अभाव में मुक्त कर दिया जबकि 13 व्यक्तियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किए गए.

 

------ साल 2014 में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कुल 58 लोगों में कुल 16 के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किए गए. गिरफ्तार कोई भी व्यक्ति साक्ष्य के अभाव अथवा किसी अन्य कारण के हवाले से मुक्त नहीं किया गया.

 

----- साल 2015 में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कुल 38 व्यक्तियों की अदालत में सुनवाई हुई, 2014 में ऐसे लोगों की संख्या 29 थी.

 

----- साल 2015 में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कुल 11 लोगों की अदालती सुनवाई पूरी हुई जबकि 2014 में ऐसे कुल 4 ही व्यक्तियों के मामले की सुनवाई पूरी हो सकी थी.

 

---- साल 2015 में राजद्रोह के मामले में किसी भी व्यक्ति पर दोषसिद्धि नहीं हुई, 2014 में एक व्यक्ति पर राजद्रोह के मामले में दोषसिद्धि हुई.

 

उपरोक्त कथा का विस्तार कृपया निम्नलिखित लिंक्स के सहारे करें---

 

Crime in India 2015 Statistics, National Crime Records Bureau, www.ncrb.gov.in 

Crime in India 2014 Statistics, National Crime Records Bureau, www.ncrb.gov.in 

Crime in India 2014 Compendium, NCRB, please click here to access
 

India must overhaul legal system, culture of intolerance has taken root: Report -Anirudh Bhattacharyya, Hindustan Times, 20 September, 2016, please click here to access  

8,856 ‘enemies of state’: An entire village in Tamil Nadu lives under shadow of sedition -Arun Janardhanan, The Indian Express, 12 September, 2016, please click here to access  

Reminder on sedition limit -R Balaji, The Telegraph, 6 September, 2016, please click here to access
 

Criticism of Government Does Not Constitute Sedition, Says Supreme Court -J Venkatesan, thewire.in, 5 September, 2016, please click here to access  

30 sedition cases registered in 2015; 17 less than in 2014 -Neeraj Chauhan, The Times of India, 31 August, 2016, please click here to access  

NCRB figures show 12% increase in offences against the state in 2015 -Prerna Kapoor, Livemint.com, 30 August, 2016, please click here to access

 

NCRB added sedition column to its chart, after NDA came to power -Chethan Kumar, The Times of India, 16 March, 2016, please click here to access
 

Who needs the sedition law? The police more than the judiciary -Sayantan Ghosh, Newslaundry.com, 29 February, 2016, please click here to access  

Which Indian state files the most sedition cases? -Chaitanya Mallapur, IndiaSpend.com, 19 February, 2016, please click here to access  

Only 9% of ‘Offences against the State’ are Sedition related in 2014 -Rakesh Dubbudu, Factly.in, 17 February, 2016, please click here to access   

 

पोस्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीर साभार- श्री शंभु घटक