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सहस्राब्दि विकास लक्ष्य- भारत किस ओर?

सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य(एमडीजी) पर केंद्रित इंडया कंट्री रिपोर्ट में कहा गया है कि भुखमरी और मातृ मृत्यु को 2015 तक कम करने के दो महत्वपूर्ण लक्ष्य से भारत पीछे रह जाएगा।



सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भोजन की कमी के शिकार लोगों की संख्या में 50 प्रतिशत कमी करने के अपने लक्ष्य से पीछे रह जाएगा। यह एमडीजी-1 के अंतर्गत लक्ष्य-2 में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार 1990 से 2015 के बीच मातृ-मृत्यु दर में तीन चौथाई कमी करने के लक्ष्य से भी भारत पीछे रहेगा। इसे एमडीजी-5 के अंतर्गत लक्ष्य-6 में रखा गया है।

 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि 3 साल से कम उम्र के मानक से कम वज़न के बच्चों की संख्या साल 1998-99 में 43 प्रतिशत थी जो साल 2005-06 में घटकर 40 प्रतिशत हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार कम वज़न के बच्चों की संख्या में होने वाली कमी की इस दर के कायम रहते 3 साल से कम उम्र के मानक से कम वज़न की संख्या को 2015 तक घटाकर बस 33 प्रतिशत किया जा सकता है, जो कि एमडीजी वर्णित लक्ष्य से पीछे है।.


गौरतलब है कि भारत राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण का चौथा दौर शुरु नहीं हो सका है। ऐसे में समाज के कमजोर तबकों की , जिसमें कम उम्र बच्चे भी शामिल हैं, पोषण और खाद्य-सुरक्षा से संबंधित स्थिति का राज्यवार ठीक-ठीक आकलन कर पाना मुश्किल हो रहा है।

 

एमडीजी में वर्णित अन्य लक्ष्यों को पूरा करने के बारे में रिपोर्ट से मिली-जुली तस्वीर हासिल होती है।एमडीजी के लक्ष्यों को पूरा करने के मामले में भारत द्वारा की गई प्रगति पर सरसरी निगाह डालने के लिए कृपया यहां दी गई तस्वीर पर क्लिक करें।

 

हाल की इस रिपोर्ट में दर्ज है कि भारत ने एमडीजी-1 में वर्णित लक्ष्य-2 यानि एक डॉलर से कम की आमदनी वाली आबादी की संख्या में 1990 से 2015 के बीच 50 प्रतिशत कमी लाने के लक्ष्य को पूरा कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में गरीबों की तादाद 1990 में 47.8 प्रतिशत थी जो साल 2011-12 में 21.9 प्रतिशत हो गई। लेकिन रंगराजन समिति(2014) के तथ्यों से रिपोर्ट के इस दावे पर शंका होती है।



रंगराजन समिति के आकलन के अनुसार भारत में गरीबों की संख्या साल 2011-12 में 29.5 प्रतिशत थी जबकि योजना आयोग ने इसी वर्ष के लिए गरीबों की संख्या 21.9 प्रतिशत बतायी थी। अगर रंगराजन समिति के तथ्य को ध्यान में रखें तो कहा जा सकता है भारत एमडीजी-1 के अंतर्गत वर्णित गरीबों की संख्या में बीते 25 सालों में 50 प्रतिशत की कमी लाने के लक्ष्य-1 को पूरा करने से दूर है।

 

हाल के समय में विकासपरक मुद्दों के विशेषज्ञ माने जाने वाले अर्थशास्त्रियों ने ध्यान दिलाया है कि समेकित बाल विकास कार्यक्रम(आईसीडीएस) तथा मिड डे मील स्कीम(एमडीएमएस) के मद में की गई बजट कटौती से कुपोषण और भुखमरी की समस्या से लड़ने के भारत के प्रयासों को धक्का पहुंच सकता है। गौरतलब है कि केंद्र प्रायोजित कई योजनाओं में वित्तीय साझेदारी करने का जिम्मा राज्यों पर बढ़ गया है क्योंकि राज्यों को दिए जाने वाले कुल राजस्व में बढोत्तरी की गई है। लेकिन अभी यह बात स्पष्ट नहीं है कि सभी राज्यों को किसी एक वित्तीय वर्ष में किसी खास योजना पर व्यय करने के लिए केंद्र की तरफ से रकम हासिल होगी या नहीं। अपनी कुछेक योजनाओं के लिए राज्यों को सीधे वित्तीय सहायता प्रदान करने के पुराने चलन से केंद्र सरकार ने नई व्यवस्था में हाथ खींच लिए हैं।



एमडीजी-2 के अंतर्गत शामिल लक्ष्य-3 साल 2015 तक सभी बच्चों को प्राथमिक स्तर की पूर्ण अवधि की शिक्षा मुहैया कराने का है। एमडीजी केंद्रित कंट्री रिपोर्ट के अनुसार भारत इस लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में अग्रसर है। साल 2005-06 में सकल नामांकन अनुपात(6-10 आयुवर्ग) 84.5 प्रतिशत था जो साल 2013-14 में बढ़कर 88.8 प्रतिशत हो गया। लेकिन इस रफ्तार से भारत सार्वभौम प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने के लक्ष्य को पूरा करने से थोड़ा पीछे रह सकता है।

 

संभावना है कि भारत में युवा-साक्षरता(15-24 वर्ष) 2015 तक 93.88 प्रतिशत तक पहुंच जाये जो कि एमडीजी वर्णित 2015 तक शत-प्रतिशत युवा-साक्षरता दर हासिल करने के लक्ष्य के बहुत करीब है।गौरतलब है कि एमडीजी रिपोर्ट में संख्यात्मक परिमाण पर ज्यादा जोर है, शिक्षा के मामले में उसकी गुणवत्ता पर रिपोर्ट में जोर नहीं दिया गया है।

 

एमडीजी-3 के अंतर्गत वर्णित लक्ष्य-4 के पूरा करने के बारे में रिपोर्ट में सकारात्मक संकेत दिए गये हैं। यह लक्ष्य साल 2015 तक शिक्षा के सभी स्तरों पर लैंगिक विषमता को दूर करने तथा साल 2005 तक प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर लैंगिक विषमता को दूर करने से संबंधित है।

 

कंट्री रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक शिक्षा के मामले में सकल नामांकन अनुपात(ग्रास एंरॉलमेंट रेशियो-जीईआर) का लैंगिक समता सूचकांक(जेंडर पैरिटी इंडेक्स-जीआरपी) साल 2013-14 में 1.03 था जबकि माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर सकल नामांकन अनुपात में लैंगिक समता सूचकांक साल 2012-13 में 0.89 था। साल 2011 की जनगणना के अनुसार युवा पुरुष साक्षरता दर तथा युवा स्त्री साक्षरता दर के बीच अनुपात 0.91 है जिसके 2015 तक 1 पर पहुंचने की संभावना है।

 

बहरहाल, जैसा कि नवीनतम असर रिपोर्ट 2014 में बताया गया है हर आयु-वर्ग में लड़कियों की तुलना में लड़कों का दाखिला निजी स्कूलों में ज्यादा परिमाण में है। मिसाल के लिए साल 2014 में 7-10 आयुवर्ग के 35.6 प्रतिशत लड़के निजी स्कूलों में नामांकित थे जबकि इस आयु-वर्ग की केवल 27.7 प्रतिशत लड़कियां ही निजी स्कूलों में नामांकित थीं।

 

कंट्री रिपोर्ट के अनुसार एमडीजी-4 के अंतर्गत वर्णित लक्ष्य-5 को पूरा करने की दिशा में भारत सामान्य रुप से अग्रसर माना जायेगा। यह लक्ष्य 1990 से 2015 के बीच पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में दो तिहाई की कमी लाने का है। भारत के लिए यह लक्ष्य 2015 तक प्रतिहजार जीवित शिशुओं पर मृत्यु-संख्या 42 तक लाने का लक्ष्य था। इस लक्ष्य तक पहुंचने से भारत कुछ ही कदम दूर है।

 

इस कथा का विस्तार निम्नलिखित लिंक के सहारे किया जा सकता है--

 

MDG India Country Report 2015, Ministry of Statistics and Programme Implementation 

Of bold strokes and fine prints: An analysis of Union Budget 2015-16, Centre for Budget and Governance Accountability (CBGA), March 2015
 

Key Indicators of Urban Slums in India, NSS 69th Round, July 2012 to December 2012 

Doubts over Maharashtra's Nutritional Progress?

India's MDG Score Card: Glass Half Full or Half Empty?

Rising burden of out-of-pocket health expenditure

Health expense is a major burden on rural citizenry

 

Missing toilets: Is India’s sanitation drive ‘In Deep Shit’?

 

MDG India Country Report 2014, Ministry of Statistics and Programme Implementation 

Rangarajan Committee Report on Measurement of Poverty 2014

Press Note on Poverty Estimates, 2011-12, Planning Commission, July, 2013

Nehruvian budget in the corporate age -Jean Drèze, The Hindu, 5 March, 2015

 

Centre's new fund distribution plan dents flagship health,
AIDS programmes
, Reuters, The Times of India, 3 March, 2015

Can India be tuberculosis-free by 2050?, The Lancet, Volume 385, No. 9965, p328–329, 24 January, 2015

 

Millennium Development Goals: A Mixed Report Card for India -Neeta Lal, IPS News, 14 February, 2015

24% of global missed TB cases in India: WHO -Kounteya Sinha, The Times of India, 24 October, 2014