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Most Polluted Cities In India : पर्यावरण के लिए सबसे खतरनाक देशों में शामिल हुए हम, 100 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 43 सिर्फ भारत में

-जनज्वार,

Most Polluted Cities In India : हाल में ही अमेरिका में बाइडेन प्रशासन (Biden Administration of USA) ने एक रिपोर्ट को सार्वजनिक किया है जिसके अनुसार जलवायु परिवर्तन और तापमान बृद्धि (Climate Change & Global Warming) के प्रभावों से पूरी दुनिया में अराजकता बढ़ेगी, पर सबसे अधिक असर 11 देशों पर पड़ेगा, जिनमें भारत भी शामिल है। इस रिपोर्ट को अमेरिका की ख़ुफिया संस्थानों और पेंटागन (Intelligence agencies & Pentagan) ने संयुक्त तौर पर तैयार किया है, और यह वहां के खुफिया विभाग और रक्षा से जुड़े संस्थानों की जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर पहली रिपोर्ट है। इसके अनुसार अमेरिका समेत पूरी दुनिया तापमान बृद्धि, लगातार सूखा और चरम प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हो रही है, इस कारण लोगों का पलायन और विस्थापन (migration) हो रहा है और पानी और खाद्यान्न जैसे संसाधनों पर अधिकार की कवायद चल रही है – जाहिर है इससे आर्थिक और सामाजिक अराजकता लगातार बढ़ रही है, पर वर्ष 2030 के बाद से इसका असर भयानक होगा। इन सब समस्याओं के असर से दुनिया अस्थिर होती जायेगी और आपस में टकराव बढेगा। इन सबसे वैश्विक समरसता प्रभावित होगी।

इस रिपोर्ट के अनुसार अस्थिरता तो पूरी दुनिया में बढ़ेगी, पर 11 देश ऐसे हैं जिसमें इसका प्रभाव सबसे अधिक होगा। ये देश हैं – अफगानिस्तान, म्यांमार, भारत, पाकिस्तान, उत्तरी कोरिया, ग्वाटेमाला, हैती, होंडुरास, निकारागुआ, कोलंबिया और इराक। पूरी सूची से स्पष्ट है कि सबसे प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण अमेरिका और मध्य-पूर्व (Indian sub-continent, South America & Middle-East) है। रिपोर्ट के अनुसार जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन और तापमान बृद्धि के भौतिक प्रभाव – यानि बाढ़, सूखा, चक्रवात, अत्यधिक गर्मी, बादलों का फटना और भू-स्खलन – जैसे प्रभाव बढेंगे, वैसे-वैसे भौगोलिक अस्थिरता बढ़ती जायेगी। इसका असर केवल प्रभावी देशों पर ही नहीं सीमित रहेगा, बल्कि अमेरिका और उसके मित्र देशों (USA & its allies) पर भी पड़ेगा क्योंकि इन देशों में उदारवादी सरकारें हैं और शरणार्थियों को शरण देने की योजनायें हैं।

रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन का असर हरेक क्षेत्र में पड़ रहा है। मध्य अफ्रीकी देश लगातार सूखे से जूझ रहे हैं, प्रशांत महासागर के देश समुद्र तल बढ़ने के कारण डूबते जा रहे हैं, मध्य-पूर्व के देशों में पेट्रोलियम पदार्थों से होने वाली कमाई घटने लगी है और ये देश लगातार सूखा और अत्यधिक गर्मी से भी प्रभावित हैं। रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन के असर से आर्थिक और सामाजिक तनाव बढेगा, इससे राजनैतिक संकट खड़ा होगा और बड़ी जनसंख्या अस्थिर और उग्र होती जायेगी। इन सबसे क्षेत्रीय स्तर पर सत्ता का बैलेंस प्रभावित होने लगेगा और संभव है अनेक देशों में सरकार और सरकारी तंत्र ही चरमरा जाए। बड़े पैमाने पर आबादी का विस्थापन केवल देशों के बाहर ही नहीं बल्कि देशों के भीतर भी होगा, और ऐसा हो भी रहा है।

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