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अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम सिर्फ युद्ध खत्म करने के लिए नहीं गिराए थे

-सत्याग्रह,

विश्व विजयी बनना हर ताकतवर देश के तानाशाह का सपना होता है. हिटलर ने भी यही सपना देखा था. एक सितंबर 1939 को पोलैंड पर अचानक हमला करके उसने इस सपने को पूरा करने की शुरुआत की तो यह एक तरह से द्वितीय विश्वयुद्ध की भी शुरुआत थी. सुदूर पूर्व में जापान का राजवंश भी इसी सपने को पूरा करने की लालसा में 1937 से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपना विस्तार कर रहा था. जल्दी ही वह भी द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया. हिटलर ने ताव में आकर 22 जून, 1941 को सोवियत संघ (रूस) पर आक्रमण कर ‘रूसी रीछ‘ (लंबे समय तक रूस को इसी प्रतीक से दर्शाया जाता रहा है) को छेड़ दिया था. जापान ने भी उन्माद में आकर सात दिसंबर, 1941 को प्रशांत महासागर में स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर्ल हार्बर पर धुंआधार बमबारी कर अमेरिका को चुनौती दे दी थी. जापान का यह उकसावा अमेरिका लिए द्वितीय विश्वयुद्ध में कूद पड़ने का खुला न्यौता बन गया.

शुरुआत में ये दोनों देश काफी तेजी से आगे बढ़े. जर्मनी का यूरोप के एक बड़े हिस्से पर कब्जा हो गया तो जापान एशिया-प्रशांत महासागर के बहुत बड़े भू-भाग पर अपना विस्तार कर चुका था. लेकिन 1942 में हवाई के पास जापानी सेना की और 1943 में स्टालिनग्राद में जर्मन सेना की पराजय के बाद किस्मत का पहिया इन दोनों देशों के लिए उल्टा घूमने लगा.अगले दो सालों में ही जर्मनी की हार तय हो गई. अपने 56वें जन्मदिन के 10 दिन बाद, 1945 में 29-30 अप्रैल के बीच वाली रात हिटलर ने बर्लिन के अपने भूमिगत बंकर में पहले तो अपनी प्रेमिका एफ़ा ब्राउन से शादी रचाई और कुछ ही घंटे बाद दोनों ने आत्महत्या कर ली. मरने से पहले हिटलर ने अपनी वसीयत में लिखवाया, ‘मैं और मेरी पत्नी भगोड़े बनने या आत्मसमर्पण की शर्मिंदगी के बदले मृत्यु का वरण कर रहे हैं.’ हिटलर की आत्महत्या के एक ही सप्ताह बाद, सात से आठ मई वाली मध्यरात्रि को जर्मनी ने बिनाशर्त आत्मसमर्पण कर दिया. इस तरह यूरोप में तो द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत हो गया, nskfv एशिया में वह चलता रहा. जापान की भी कमर तो टूट चुकी थी पर वह घुटने टेकने में टालमटोल कर रहा था.

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