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9 राज्य सूखाग्रस्त, आंखें बंद नहीं कर सकता केंद्र

नयी दिल्ली, 6 अप्रैल (एजेंसियां)
downloadसुप्रीम कोर्ट ने देश में सूखे की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार को आज आड़े हाथों लिया। न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति एन वी रमण की पीठ ने एनजीओ ‘स्वराज अभियान' की याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि देश के 9 राज्य सूखे से प्रभावित हैं और केंद्र सरकार इस पर अपनी आंखें बंद नहीं रख सकती। पीठ ने इससे निपटने के लिए जरूरी कदम उठाये जाने की आवश्यकता भी जतायी।

कोर्ट ने केंद्र को बृहस्पतिवार तक हलफनामा देकर यह बताने का निर्देश दिया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) योजना सूखा-प्रभावित राज्यों में कैसे लागू की जा रही है। शीर्ष अदालत ने सरकार से यह जानना चाहा है कि इन राज्यों में वह किस तरह पैसा मुहैया करा रही है।

श्री योगेंद्र यादव के एनजीओ की ओर से दायर की गयी जनहित याचिका में सूखा प्रभावित राज्यों के लोगों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत खाद्यान्न उपलब्ध कराने का केंद्र को निर्देश देने की मांग की गयी है। साथ ही राहत एवं पुनर्वास के अन्य उपाय किये जाने के लिए केंद्र को आदेश देने का अनुरोध भी किया गया है। मामले की अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को होगी।

पलायन कर रहे हैं परेशान लोग

महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना समेत 9 राज्य सूखे की चपेट में हैं। कई राज्यों में सूखे से हालात इतने बदतर हो गए हैं कि लोग पीने के पानी तक को तरस गये हैं और अब पलायन करने को मजबूर हैं।

सूखाग्रस्त राज्यों में अाईपीएल क्यों : बाॅम्बे हाईकोर्ट

मुंबई (एजेंसी) : सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र में पानी की बर्बादी को लेकर बीसीसीआई और महाराष्ट्र तथा मुंबई क्रिकेट संघ को आड़े हाथों लेते हुए बाॅम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि आईपीएल के मैच ऐसी जगह कराने चाहिए जहां जलसंकट नहीं हो। अदालत ने कहा कि जब बीसीसीआई को पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाये, तभी आपको समझ में आएगा। अदालत ने यह भी कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पानी की बर्बादी को रोकने के लिए कदम उठाए। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह बताने को कहा कि इस मसले पर क्या कदम उठाये जा रहे हैं। न्यायमूर्ति वी एम कनाडे और एम एस कर्णिक ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि आप इस तरह से पानी कैसे बर्बाद कर सकते हैं?

आपके लिए लोग ज्यादा अहम हैं या आईपीएल मैच। आप इतने लापरवाह कैसे हो सकते हो। इस तरह से पानी कौन बर्बाद करता है। यह आपराधिक बर्बादी है। आपको पता है कि महाराष्ट्र के क्या हालात है।

अदालत ने यह भी पूछा कि क्या बीसीसीआई और अन्य क्रिकेट संघों के लिए क्रिकेट मैच अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आपको आईपीएल मैच दूसरे राज्य में कराने चाहिए जहां पानी की कमी न हो। जनहित याचिका में कहा गया कि तीनों स्टेडियमों में पिचों के रख रखाव पर करीब 60 लाख लीटर पानी खर्च होगा।