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उत्तराखंड: हाथियों के गोबर में मिला प्लास्टिक, कांच व इंसान के इस्तेमाल की अन्य चीजें

न्यूज़लॉन्ड्री, 12 जुलाई

पिछले कुछ वर्षों में, हिम तेंदुओं, बाघों, तेंदुओं और हिरणों सहित वन्यजीवों की खतरनाक तस्वीरें और रिपोर्टें आई हैं, जो कचरे के ढेर में अपना भोजन तलाश रहे थे या प्लास्टिक कचरा ले जा रहे थे

द जर्नल फॉर नेचर कंजर्वेशन में पिछले महीने छपे एक अध्ययन में उत्तराखंड के जंगलों में हाथी के लीद में प्लास्टिक और अन्य मानव निर्मित सामग्री के मौजूद होने का पता चला है. इस अध्ययन के लेखकों ने चार जगहों से एकत्र किए गए गोबर के नमूनों की जांच की. तीन हरिद्वार वन प्रभाग (लालढांग, गैंडीखाता, और श्यामपुर) के पास, और एक लैंसडाउन वन प्रभाग (कोटद्वार) के नजदीक. शीशे, धातु के टुकड़े, रबर बैंड, मिट्टी के बर्तन, और टाइल के टुकड़े अन्य चीजें थीं जो मोटी चमड़ी वाली आंतों में पहुंच गई थी. यह पहला व्यवस्थित दस्तावेज है जो बताता है कि हाथी गैर-बायोडिग्रेडेबल (मिट्टी में नहीं मिलने वाले), जहरीले मानवजनित कचरे को निगलते हैं और यह उनके पाचन तंत्र से आगे जा रहा है.

अध्ययन की मुख्य लेखिका गीतांजलि कतलाम कहती हैं, “हाथी के गोबर में प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे को देखना भयावह था.” उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पीएचडी के दौरान यह डेटा एकत्र किया.

जेएनयू में कतलाम की पीएचडी गाइड और अब नेचर साइंस इनीशिएटिव की शोधकर्ता सौम्या प्रसाद कहती हैं, “यह देखते हुए कि जंगल क्षेत्रों के पास कचरे के ढेर से हाथियों के खाने की खबरें आती रहती हैं, यह हैरानी की बात नहीं थी.” “मुझे लगता है कि यह आंकड़ा पूरी समस्या का एक छोटा हिस्सा भर दर्शाता है. स्थलीय जानवरों द्वारा कितना प्लास्टिक निगला जा रहा है, इस पर पर्याप्त रिसर्च नहीं हुआ है. हालांकि बीते 20 सालों में, कई प्रजातियों के मल नमूनों में प्लास्टिक होने पर कई रिपोर्टें प्रकाशित हो चुकी हैं.”

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