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न्यूनतम मज़दूरी बढ़ने से रोजगार कम नहीं होता : जानिए इस साल के अर्थशास्त्र के नोबेल की कहानी

-न्यूजक्लिक,

समाज के सबसे महत्वपूर्ण सवालों का जवाब बिना किसी छेड़छाड़ के अर्थशास्त्र कैसे दे? यही इस साल के अर्थशास्त्र में मिलने वाले नोबेल के रिसर्च का केंद्र बिंदु है। इस साल का अर्थशास्त्र का नोबेल डेविड कार्ड, जोशुआ एंग्रिस्त और गुइडो इम्बेंस को देने का ऐलान किया गया है।

65 साल के डेविड कार्ड मूल रूप से कनाडा के हैं और अभी अमेरिका के बर्कली में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। उन्हें 11 लाख डॉलर के इस पुरस्कार का आधा हिस्सा मिलेगा। दूसरा हिस्सा इजराइली-अमेरिकी अर्थशास्त्री एंग्रिस्त और उनके डच-अमेरिकी सहयोगी इम्बेंस को संयुक्त रूप से दिया जाएगा।

नोबेल समिति की सदस्य एवा मॉर्क ने इस साल के अर्थशास्त्र के क्षेत्र में मिलने वाले नोबेल के रिसर्च की जानकारी दी। उन्होंने रिसर्च की जानकारी कुछ इस तरह से पेश की:

जब लोगों की आमदनी बढ़ती है तब वह सेहतमंद होते हैं या नहीं? जब पढ़ाई लिखाई लंबी होती है तो मजदूरी बढ़ती है या नहीं? प्रवास की वजह से प्रवास से प्रभावित हो रहे देश के रोजगार और लोगों की मजदूरी पर क्या असर पड़ता है? लॉकडाउन की वजह से वायरस का संक्रमण तेज हुआ या कम? इस तरह के ढेर सारे सवालों के बारे में सोचिए। इस तरह के सवालों को कारण और कार्य/ परिणाम वाले सवाल कहा जाता है। अंग्रेजी में कहा जाए तो causal effect से जुड़े सवाल। इस तरह से जुड़े समाज के बड़े सवालों का जवाब देने के साथ दिक्कत यह है कि जब परिस्थिति बदल जाती है तब इन सवालों का जवाब देना बहुत अधिक मुश्किल हो जाता है।

एवा मारक आगे बताती हैं कि सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में कारण और परिणाम के बीच संबंध स्थापित करना बहुत बड़ी चुनौती होती है। ऐसा करने पर वैसा होगा या वैसा इसलिए हुआ क्योंकि ऐसा हो रहा है, ऐसे संबंध बताना सबसे मुश्किल काम रहा है। यह मुश्किलें इसलिए आती है क्योंकि समाज गणित की तरह नहीं होता। कई सारे कारण एक दूसरे से मिलकर परिणाम को प्रभावित कर रहे होते हैं। इसलिए किसी भी तरह का एक्सपेरिमेंट नहीं हो पाता जिसे पुख्ता तौर पर हर जगह इस्तेमाल किया जाए। इस चुनौती का सामना करते हुए कुछ अर्थशास्त्रियों ने रेंडमाइज कंट्रोल एक्सपेरिमेंट किया। यानी ऐसा एक्सपेरिमेंट जहां पर परिणाम जानने के लिए कारकों को एक्सपेरिमेंट करने वाले ही व्यवस्थित करते हो। जैसे अगर यह निष्कर्ष निकालना है कि संतुलित खाना देने से शरीर का विकास कैसा होता है तो रेंडमाइज्ड कंट्रोल एक्सपेरिमेंट वाले कुछ लोगों को संतुलित खाना देंगे और कुछ लोगों को संतुलित खाना नहीं देंगे। और लंबे समय तक अवधि करने के बाद निष्कर्ष बताएंगे। लेकिन यह अनैतिक है यहां पर जानबूझकर किसी को संतुलित भोजन से दूर रखा जा रहा है।  अगर कोई इतिहास से जुड़ी हुई परेशानी है तो रेंडमाइज्ड कंट्रोल एक्सपेरिमेंट करने वाले इसका अध्ययन नहीं कर पाएंगे क्योंकि वह इतिहास में जाकर के चीजों को व्यवस्थित नहीं कर सकते हैं।

रेंडमाइज्ड कंट्रोल करने वालों को अगर लेबर मार्केट का अध्ययन करना है तो भी वह इसका एक्सपेरिमेंट नहीं कर पाएंगे क्योंकि यह बहुत अधिक खर्चीला होगा। ऐसी तमाम कारण होंगे जिन को व्यवस्थित कर पाना रेंडमाइज्ड एक्सपेरिमेंट करने वालों के कंट्रोल से बाहर की बात होगी।

इस साल की अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार वैसे ही तीन अर्थशास्त्रियों को दिया गया है जिन्होंने यह साबित किया है कि समाज के सबसे महत्वपूर्ण सवालों का जवाब दिया जा सकता है। इसके लिए कंट्रोल एक्सपेरिमेंट करने की जरूरत नहीं है। बल्कि वैसी घटनाएं ढूंढने की जरूरत है जहां पर सरकारी नीतियां और प्रकृति खुद ही ऐसा माहौल बना रही हो, जो किसी नेचुरल एक्सपेरिमेंट की तरह हो, जिससे समाज के सबसे महत्वपूर्ण सवालों का जवाब मिल जाए।

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