Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/Scientists-asks-to-look-beyond-rainforests-to-protect-trees.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | अकेले वर्षावन ही नहीं, दुनिया के सभी जंगलों को बचाना है जरुरी: वैज्ञानिक | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

अकेले वर्षावन ही नहीं, दुनिया के सभी जंगलों को बचाना है जरुरी: वैज्ञानिक

-डाउन टू अर्थ,

एक नए अध्ययन से पता चला है कि अकेले वर्षावन में ही नहीं बल्कि समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय शुष्क वनों में भी पेड़ों की हजारों ऐसी प्रजातियां हैं, जो अपने आप में बेजोड़ हैं| दुनियाभर में वर्षावनों को उसकी अनेकों दुर्लभ प्रजातियां के लिए जाना जाता है| यही वजह है कि जब जंगलों के संरक्षण की बात होती है, तो सबसे पहले वर्षावनों को बचाने पर ही ध्यान केंद्रित किया जाता है। पर हाल ही एडिनबर्ग और एक्सेटर विश्वविद्यालय द्वारा मिलकर किये गए अध्ययन से पता चला है कि अन्य जंगलों में भी पेड़ों की अनेकों ऐसी दुर्लभ प्रजातियां हैं जो कहीं और नहीं मिलती, इसलिए इन जंगलों को बचाने पर भी ध्यान देना चाहिए।

यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित हुआ है। जिसमें अमेरिका भर में 10 हजार से अधिक जंगलों और सवाना क्षेत्रों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है| इस शोध के अनुसार समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय शुष्क वनों में पेड़ों की करीब 30 फीसदी प्रजातियों का विकास हुआ है, जबकि उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में यह आंकड़ा 26 फीसदी का है।

एक्सेटर यूनिवर्सिटी के ग्लोबल सिस्टम्स इंस्टीट्यूट से सम्बन्ध रखने वाले प्रोफेसर टोबी पेनिंगटन ने बताया है कि "हमारे निष्कर्षों से पता चलता है कि समशीतोष्ण और शुष्क वनों में भी पेड़ों की अनेकों दुर्लभ प्रजातियों का विकास हुआ है| इसलिए इनके संरक्षण पर भी ध्यान देना जरुरी है।" उनके अनुसार "हालांकि यह सही है कि वर्षा वनों को बचाना जरुरी है, लेकिन हमें समशीतोष्ण और शुष्क वनों में मौजूद पेड़ों की अद्वितीय जैवविविधता को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।"

कैसे हुआ है पेड़ों की इन अलग-अलग प्रजातियों का विकास
इस शोध के प्रमुख और यूनिवर्सिटी ऑफ़ एडिनबर्ग के रिकार्डो सेगोविया ने बताया कि "चिली के शीतोष्ण वन, उत्तरी एंडीज और उत्तरी अमेरिका में ऐसे अनेक अलग-थलग पड़े सूखे जंगल हैं, जहां पेड़ों की अनोखी प्रजातियां हैं| यह जंगल खतरे में हैं और इनके संरक्षण के लिए तुरंत काम करने की जरुरत हैं|"

गौरतलब है कि शीतोष्ण वन, उष्णकटिबंधीय और ठंडे बोरियल क्षेत्रों के बीच पाए जाते हैं। जोकि चिली और अमेरिका में स्थित हैं| इन जंगलों में ओक और एल्म प्रजातियों के अनोखे पेड़ पाए जाते हैं| जबकि शुष्क वनों में पी (फेबासिया) और कैक्टस प्रजाति के दुर्लभ पौधे पाए जाते हैं| इसमें ब्राजील के केटिंगा और बोलिविया के चिकिटेनिया क्षेत्र में मिलने वाली वनस्पति शामिल है| इस शोध की सबसे ख़ास बात यह है कि इसमें हजारों प्रजातियों के पेड़ों के डीएनए सीक्वेंस और उससे जुडी जानकारी का विश्लेषण किया गया है| जिससे कहां यह प्रजातियां मुख्य रूप से पाई जाती हैं| इसकी सटीक जानकारी प्राप्त हो सके|

इसके साथ ही इन पेड़ों और प्रजातियों का विकास कैसे हुआ है, वैज्ञानिकों ने इसे भी समझने का प्रयास किया है| जिससे यह पता चल सके कि क्या वजह है कि यह प्रजातियां कुछ विशिष्ट स्थानों पर ही विकसित हुई है और क्या कारण है कि जो इनकों नयी जगह और वातावरण में बढ़ने से रोक रहा है| जिसमें उन्हें पता चला है कि इनके बीच जो अंतर है उसका मुख्य कारण तापमान है| जो कुछ प्रजातियों के विकास लिए तो बेहतर परिस्थितयां बनाता है, जबकि कुछ के लिए उनमें जिन्दा रह पाना मुश्किल हो जाता है| इसके साथ ही ट्रॉपिक्स पर मौजूद नम और शुष्क वनों में भी विकास सम्बन्धी विभिन्नता है जो इन दोनों प्रजातियों को अलग करती है|

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.