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यूपी: चित्रकूट में काम के बदले मासूम बच्चियों का यौन शोषण!

-न्यूजक्लिक,

“हम लाचार हैं, हम मान जाते हैं। ये हमें काम देते हैं, हमारा शोषण करते हैं और फिर पूरी दिहाड़ी भी नहीं देते। जब हम जिस्मफरोशी से मना करते हैं तो हमें धमकी दी जाती है कि हमें कोई काम नहीं दिया जाएगा। अगर हमें कोई काम नहीं मिला तो हम खाएंगे क्या? ऐसे में हमें इनकी शर्तें माननी पड़ती हैं।”

ये दर्द कारवी गांव की एक नाबालिग बच्ची ने बयां किया है। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में इन छोटी बच्चियों से अवैध खदानों में मजदूरी कराई जा रही है। काम के नाम पर उनका यौन उत्पीड़न और बलात्कार तक किया जा रहा है। लेकिन हैरानी की बात ये है ‘बेहतर कानून व्यवस्था’ का दम भरने वाला प्रशासन इन बातों से अंजान है।

इस मामले के संज्ञान में आने के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने चित्रकूट के डीएम और उत्तर प्रदेश चाइल्ड राइट कमीशन को चिट्ठी लिखकर तत्काल जांच की बात कही है। इसके साथ ही एनसीपीआर की तरफ से इस मामले में एफआईआर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने भी इस मामले में संज्ञान लेते हुए इसे चिताजांक बताया है। यूनिसेफ द्वारा एक ट्वीट में कहा गया है, "चित्रकूट में लड़कियों के यौन उत्पीड़न संबंधित रिपोर्टें चिंताजनक हैं। हर बच्चे को सभी प्रकार की हिंसा और शोषण से सुरक्षा का अधिकार है। हमें विश्वास है कि अधिकारी जांच करेंगे और पीड़ितों को तत्काल सुरक्षा और सहायता प्रदान की जायेगी।"

क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका, अक्सर सूखे के कारण सुर्खियों में रहता है लेकिन इस बार यहां चित्रकूट में गरीब आदिवासी परिवारों की बच्चियों से अवैध खदानों में मजदूरी के एवज में कथित जिस्मफरोशी कराए जाने का मामला सामने आया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, चित्रकूट में 12 से 14 साल की बच्चियां अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए अवैध खदानों में काम करने को मजबूर हैं। लेकिन इन बच्चियों से यहां मज़दूरी के साथ ही कथित तौर पर 200 से 300 रुपये में जिस्मफरोशी भी कराई जा रही है। इस तरह ये बच्चियां लगातार यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं।

काम के बदले होती है जिस्मफ़रोशी की शर्त

खदानों में बच्चियों के काम करने के बावजूद इन्हें दिहाड़ी नहीं दी जाती, इसके लिए इन बच्चियों से जिस्मफरोशी कराई जाती है। चित्रकूट के कारवी गांव की एक पीड़ित बच्ची बताती है कि जब वे इन खदानों में काम मांगने जाती हैं तो ठेकेदार (कॉन्ट्रैक्टर) जिस्मफरोशी की शर्त पर इन्हें काम देने को कहते हैं।

रिपोर्ट में कारवी गांव की ही एक अन्य पीड़िता के हवाले से कहा गया, “ठेकेदारों ने खदानों के पास के टीले के पीछे बिस्तर लगा रखे हैं। वो हमें वहां ले जाते हैं, और बारी-बारी से हमारा यौन शोषण करते हैं। हमें वहां एक-एक करके जाना होता है। जब हम मना करते हैं, तो वो हमें पीटते हैं। दर्द होता है, लेकिन सह लेते हैं। हम और कर भी क्या सकते हैं। दुख़ होता है। फिर मरने का या यहां से भाग जाने का सोचते हैं।”

चित्रकूट के दफाई गांव की एक पीड़िता कहती हैं, ‘हमें धमकाया जाता है कि अगर हमें काम चाहिए तो हमें इनकी शर्तें माननी पड़ेगी। हम तैयार हो जाते हैं। ये हमें पैसों का लालच देते हैं, कई बार तो एक से अधिक आदमी हमारा उत्पीड़न करता है। अगर हम न कह दें तो हमें उठाकर बाहर करने की धमकी दी जाती है।’

इन बच्चियों के माता-पिता इनके साथ हो रहे इस अत्याचार से परिचित हैं।

इन पीड़िताओं में से एक की मां कहती हैं, ‘हम बेबस हैं। उन्होंने हमें दिन का 300 से 400 रुपये देने का वादा किया है लेकिन कभी-कभी वे हमें 150 से 200 रुपये देते हैं। जब हमारे बच्चे काम से घर लौटते हैं तो अपनी आपबीती बताते हैं लेकिन हम क्या कर सकते हैं? हम मजदूर हैं। हमें अपना परिवार चलाना है। मेरे पति बीमार हैं और उन्हें इलाज की जरूत है।’

हालांकि, चित्रकूट के जिला मजिस्ट्रेट शेषमणि पांडे ने शुरुआत में इस खबर पर ही सवाल उठाते हुए, इसका खंडन किया था लेकिन बाद में प्रशासन की छीछा-लेदर होने के बाद उन्होंने इसे गंभीरता से लेने की बात कही।

बुधवार, 8 जुलाई को चित्रकूट के डीएम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि आजतक ने अपनी एक रिपोर्ट में लड़कियों के यौन शोषण की खबर दिखाई थी, जिसको हमने गंभीरता से लिया है। प्रशासन की ओर से मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा इस बारे में आजतक के संवाददाताओं से जानकारी ली गई है।

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