Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/UttarPradesh-Kamlapati-Tripathi-grandson-land-scam-in-Mirzapur-and-yogi-govt.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | मिर्ज़ापुर: यूपी में मुकदमे बने हथियार!, सियासत गरमाई | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

मिर्ज़ापुर: यूपी में मुकदमे बने हथियार!, सियासत गरमाई

-न्यूजक्लिक,

उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर जिले में योगी सरकार के निर्देश पर पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी, उनके पिता पूर्व एमएलसी राजेशपति त्रिपाठी और हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गिरधर मालवीय समेत 42 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किए जाने के बाद पूर्वांचल की सियासत गरमा गई है। इन पर भारतीय दंड विधान की धारा-419, 420, 467, 468 और 471 के तहत धोखाधड़ी,  बेईमानी और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप हैं। मिर्ज़ापुर के गोपलपुर स्थित संयुक्त सहकारी कृषि समिति की करीब साढ़े नौ हजार बीघे जमीन को खुर्द-बुर्द करने के मामले में इन्हें नामजद किया गया है।

राजेशपति यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के पौत्र और ललितेशपति प्रपौत्र हैं। पूर्व न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं। वह बीएचयू के संस्थापक और भारतरत्न पंडित मदन मोहन मालवीय के पोते हैं। गिरधर मालवीय के पिता पंडित गोविंद मालवीय भी कांग्रेस सांसद रह चुके हैं।

पिछले महीने मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंधित एक ट्विटर हैंडल के जरिए जमीन के मामले में कांग्रेसी नेताओं पर कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए गए थे। जिन लोगों को नामजद किया गया है उनमें ज्यादातर कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं। इस बाबत मिर्ज़ापुर के मड़िहान थाने में आपराधिक धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

कांग्रेस ने शासन के निर्देश पर दर्ज की गई एफआईआर की कार्रवाई को एकपक्षीय और दुर्भावनापूर्ण करार दिया है। मिर्ज़ापुर के गोपलपुर स्थित संयुक्त सहकारी कृषि समिति पूर्वांचल की सबसे बड़ी सहकारी संस्था है, जिसका गठन साल 1951 में किया गया था। उस समय जमींदारी उन्मूलन कानून भी अस्तित्व में नहीं था। संस्था के पास करीब नौ हजार बीघा जमीन थी, जिसमें करीब ढाई हजार बीघे जमीन पथरीली है। इतनी ही जमीन में जंगल है। बाकी जमीन पर लेमन ग्रास, धान, मसूर, अनार, अमरूद आदि की खेती होती है। साल 2009, 2012 और 2018 में सहकारिता विभाग की देखरेख में संस्था के पदाधिकारियों का चुनाव भी हुआ है। कुछ रोज पहले ही समिति ने जमीनों का लगान जमा किया था।

क्या चाहती है योगी सरकार

यूपी के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोपलपुर सहकारी कृषि समिति की जमीन पर फूड पार्क का निर्माण कराना चाहते हैं। मिर्ज़ापुर प्रशासन ने यहां विंध्याचल एटिवो फूड पार्क स्थापित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। योजना के मुताबिक फूड पार्क बनने पर करीब 50 हजार लोगों को रोजगार से जोड़ा जा सकेगा। जमीन पर कब्जा लेने के साथ ही विंध्याचल एटिवो फूड पार्क पर काम शुरू हो जाएगा।  

आजादी के बाद मिर्ज़ापुर, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और तेजस्वी लेखक, पत्रकार एवं स्वतंत्रता सेनानी रहे पंडित कमलापति त्रिपाठी के पुत्र पूर्व स्वास्थ्य मंत्री लोकपति त्रिपाठी की राजनीतिक कर्मभूमि हुआ करती थी। बाद में इनकी विरासत को ललितेशपति त्रिपाठी ने आगे बढ़ाया। कांग्रेस हाईकमान ने यूपी के जिन 75 नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए सिग्नल दिया है उनमें ललितेशपति त्रिपाठी का नाम शामिल है।

सूत्र बताते हैं कि भाजपा चाहती थी कि पंडित कमलापति त्रिपाठी का कुनबा कांग्रेस छोड़कर उनके खेमें में शामिल हो जाएं, लेकिन सत्तारूढ़ दल के लोग अपने मंसूबों को अंजाम दे पाने में कामयाब नहीं हो सके। कांग्रेस के पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी ने खुद इस बात की पुष्टि की है।

फिलहाल पूर्वांचल के 42 दिग्गजों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ दो बार चुनाव लड़ऩे वाले पूर्व विधायक अजय राय ने इसी 2 जुलाई को योगी सरकार पर हमला बोला और कहा, “पंडित कमलापति त्रिपाठी के खानदान के लोगों को अरदब में लेने के लिए योगी सरकार दबाव बना रही है”। 

प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को फर्जी करार देते ट्वीट किया है कि पार्टी के लोग मुकदमे से डरने वाले नहीं हैं। वक्त आने पर ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा। 

क्या है मामला?

सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (मिर्ज़ापुर) मित्रसेन वर्मा ने मड़िहान थाने में 14/15 जून 2021  की रात करीब दो बजे रपट दर्ज कराई, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के परिवार के सदस्यों के अलावा भारतरत्न पंडित मदन मोहन मालवीय के पोते समेत कुल 42 लोगों को नामजद किया गया है। इसमें विंध्याचल एग्रो नामक कंपनी का नाम भी शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक,  शासन ने राजस्व महकमे के अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति (एसआईटी) गठित की थी। यह समिति तब गठित की गई, जब 17 जुलाई 2019 को सोनभद्र के घोरावल इलाके के उम्भा गांव में 11 आदिवासियों का संहार किया गया। समिति की रिपोर्ट फरवरी 2020 के आखिरी हफ्ते में शासन को सौंप दी गई थी, लेकिन यह मामला दबा हुआ था। शासन ने 10 जून 2021 को अचानक मिर्ज़ापुर के कलेक्टर को गोपनीय-पत्र भेजा और दोषी लोगों के खिलाफ रपट दर्ज कराकर विधिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्ष्कार के निर्देश पर सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक मित्रसेन वर्मा ने मड़िहान थाने में गोपलपुर संयुक्त कृषि सहकारी समिति लिमिटेड के प्राथमिक सदस्यों और उनके वारिसान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी।

रिपोर्ट में न्यायालय और अधिकारियों को भ्रमित करने का आरोप भी लगाया गया है। मित्रसेन द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति के सचिव बैजनाथ सिंह ने 6 सितंबर 2019 को सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (मिर्ज़ापुर) को लिखित जवाब दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि निबंधन के समय समिति में कुल 17 मूल सदस्य थे। इनमें यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री नेता कमलापति त्रिपाठी के पुत्र लोकपति त्रिपाठी के अलावा करुणापति त्रिपाठी, कमच्छा (वाराणसी) के मांडवी प्रसाद सिंह, बालेश्वरनाथ भट्ट, कैप्टन विजयी प्रसाद सिंह, लक्ष्मीकुंड (वाराणसी) के पुरुषोत्तम शमशेर जंग बहादुर राणा, प्रीतम स्वरूप मलकानी, सूरजकुंड (वाराणसी) के अभय कुमार पांडेय,  गोदौलिया (वाराणसी) के सरदार विधान सिंह, पियरी (वाराणसी) के रामशीष प्रसाद सिंह,  हथियाराम (गाजीपुर) के महंत विश्वनाथपति,  मौजा बस्ती (आजमगढ़) की सुरसती देवी,  साहाबाद (बिहार) के वंशीधर उपाध्याय,  राज राजेश्वरी देवी,  मथुरा सिंह, रामानंद उपाध्याय और सासाराम (बिहार) के राधिका रमण शर्मा का नाम शामिल है। ये वो लोग हैं जो अब जीवित नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा समय में समिति के कुल 42 सदस्य हैं, जिनका नाम साल 2018 की मतदाता सूची में शामिल है। इसमें भारतरत्न पंडित मदन मोहन मालवीय के पोते और बीएचयू के कुलाधिपति पूर्व जस्टिस गिरधर मालवीय का नाम भी शामिल है।

रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि शासन ने समिति के उत्तराधिकारियों के बारे में विधिक दस्तावेज मांगे थे। समिति के सचिव बैजनाथ सिंह ने जांच समिति को अवगत कराया था कि मूल सदस्य के दिवंगत होने पर सहकारिता अधिनियम एवं उपविधि के अनुसार उनके विधिक उत्तराधिकारी समिति के सदस्य स्वतः बन जाते हैं। सहकारिता उप-विधि के अनुसार घोषणा-पत्र और शपथपत्र के अनुसार सदस्यता समिति की सदस्यता प्रदान की गई। साथ ही उसे समिति के रजिस्टर में भी अंकित किया गया। जांच समिति का दावा है कि समिति के मूल सदस्यों के विधिक उत्तराधिकारियों का कोई ऐसा वारिस प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया जो राजस्व विभाग द्वारा निर्गत हो। इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मूल सदस्यों के विधिक वारिस कौन हैं?

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का हवाला दिया है कि गोपलपुर संयुक्त कृषि सहकारी समिति लिमिटेड,  मड़िहान के निबंधन के समय समिति के मूल सदस्यों ने कोई भूमि पूल्ड नहीं की थी। निबंधन के चार दिन बाद सामूहिक रूप से 16 सदस्यों ने समिति के लिए पट्टे पर भूमि हासिल की। इनमें एक सदस्य के हिस्से में दो व्यक्तियों के नाम अंकित थे। समिति के निबंधन के बाद समिति के सदस्यों ने भूमि पूल्ड की जो विधि विरुद्ध है। समिति के पदाधिकारियों ने 1961 में समिति के 105 सदस्य होने की सूचना अपर जिला सत्र न्यायालय और परगना अधिकारी के न्यायालय में दी गई थी, जबकि समिति के मूल 17 सदस्यों के अतिरिक्त अन्य किसी सदस्य द्वारा नियमानुसार संबंधित समिति में अपनी सीरदारी अथवा भूमिधरी किसी के साथ पुल्ड नहीं की गई। समिति की प्रबंध कमेटी एवं उसके पदाधिकारियों ने मनमाने तौर पर समिति के सदस्यों की संख्या 105 बताकर राजस्व न्यायालय और कर निर्धारण न्यायालय में भ्रामक सूचना पेश कर अनुसूचित लाभ लेने का प्रयास किया। समिति के नए सदस्यों में कई ऐसे हैं जो गैर राज्यों के हैं। कोई बाहरी व्यक्ति समिति का सदस्य नहीं बन सकता है। उनकी सदस्यता नियम विरुद्ध है। समिति के पदाधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और गलत तथ्यों के आधार पर सदस्यों का नाम खारिज कराकर केवल गोपालपुर संयुक्त कृषि सहकारी समिति का नाम दर्ज कराने का आदेश प्राप्त किया जो विधि-सम्मत नहीं है।

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.