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AADHAR: जानकारी लीक होने पर जानिए क्या है सजा ?

केंद्र सरकार ने भले ही बड़ी चतुराई से महत्वपूर्ण आधार विधेयक को संसद से पास करा लिया। सरकार भरोसा भी दे रही है कि आम आदमी की निजता का पूरा ख्याल रखा जाएगा। पर इस बिल में इस बात का जिक्र नहीं है कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज जिसमें सभी व्यक्तिगत जानकारी होती है, अगर लीक हो गई या किसी मकसद से सरकार ने ही इन जानकारियों का इस्तेमाल किया तो इसका क्या।

 

 

इस बिल में सजा का जो प्रावधान किया गया है वह इतना सख्त नहीं जान पड़ता। साथ ही किसी नागरिक का डाटा लीक हो गया है ये जानकारी भी शायद ही उस व्यक्ति को समय पर हो। इसके अलावा इस बिल में इस बात का भी जिक्र नहीं है कि अगर किसी व्यक्ति की निजी जानकारी लीक हो जाती है तो बतौर हर्जाना पीडि़त पक्ष को क्या दिया जाएगा।

अमेरिका में NSA ने किया नागरिकों की जानकारियों का दुरुपयोग

अमेरिका में भी हर नागरिक की पहचान, फिंगर प्रिंट, रेटिना इमेज, ब्लड ग्रुप आदि तमाम जानकारियां एक सेंट्रल डाटाबेस में सुरक्षित रखा गया है। वहां भी यही तर्क दिया जाता रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ही सिर्फ इन गोपनीय जानकारियों का इस्तेमाल सरकार करेगी। लेकिन पिछले दिनों खुलासा हुआ है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी NSA ने इन दस्तावेजों को दुरुपयोग किया।

 

इन दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखेगी सरकार
आधार कार्ड के माध्यम से सरकार के पास हर नागरिक के ये डाटा होंगेः

बायोमैट्रिक डाटाः रेटिना इमेज, फिंगर प्रिंट, तस्वीर, आईआरआईएस स्कैन, ब्लड ग्रुप
डेमोग्रैफिक डाटाः नाम, जन्मतिथि, पता, बैंक अकाउंट डिटेल, मोबाइल नंबर, ईमेल एड्रेस
क्या कहता है ये आधार बिलः

अगर जिस नागरिक के पास आधार कार्ड नहीं होगा तो सरकार उससे ये बनवाने के लिए कहेगी। किसी भी तरह निजी और सार्वजनिक जरूरतों में आधार आपकी पहचान के तौर पर जरूरी दस्तावेज माना जाएगा। हालांकि अभी अमेरिका की तरह आधार नंबर को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा।

 

कितनी सुरक्षित होगी जानकारीः

नए बिल के मुताबिक सिर्फ यूआईडी अथॅारिटी के पास आपकी सभी जानकारियां सेंट्रल सर्वर में सुरक्षित होंगी। अगर किसी व्यक्ति या संस्था को किसी दूसरे की जानकारी चाहिए तो उसे पहले संबंधित व्यक्ति की इजाजत लेनी होगी। आपकी मंजूरी के बाद ही आपके दस्तावेज किसी और को दिए जा सकते हैं।

किन परिस्थितियों में साझा की जा सकती है निजी जानकारियां:

इस बिल के सेक्शन 33 के मुताबिक सिर्फ दो परिस्थितियों में ही आधार कार्ड में दर्ज आपकी गोपनीय जानकारियां साझा की जा सकती हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों में ही केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव किसी व्यक्ति के आधार नंबर से जुड़े दस्तावेज जारी करने का निर्देश दे सकेंगे।
कोर्ट के निर्देश पर भी किसी के आधार नंबर से जुड़ी जानकारियां संबंधित जांच एजेंसी या व्यक्ति को दी जा सकती हैं।
इस बिल के तहत क्या है अपराध और क्या होगी सजा

अगर आपके आधार का डाटा लीक होता है या कोई व्यक्ति साझा कर देता है तो इसके तहत 3 साल की जेल और 10 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान इस बिल में किया गया है। अगर यूआईडी एजेंसी नियमों का उल्लंघन करती है तो उसको एक साल की जेल अथवा 10000 रुपये या एक लाख रुपये (कंपनी के मामले में) का प्रावधान है।

जेटली ने दुरुपयोग न होने की गारंटी दी

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में जवाब दिया कि सुरक्षा से जुड़े मामले में ही आधार के बायोमीट्रिक आंकड़े साझा किए जा सकते हैं। आंकड़े साझा करने का फैसला संयुक्त सचिव रैंक से ऊपर के अधिकारी कर सकेंगे। साथ ही कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक समिति इसकी समीक्षा करेगी। आधार से जुड़ी सभी जानकारियां एक सेंट्रलाइज डेटाबस में एकत्रित की जाएंगी।