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जिस कंपनीराज के खिलाफ हमारे पुरखे लड़े थे, वही मोदी सरकार देश पर फिर थोपना चाहती है!

-जनपथ,

कल 26 मई को किसान आंदोलन के 6 माह पूरे होने के अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा की अपील पर विरोध दिवस (काला दिवस) मनाया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा देश के हर किसान तक आंदोलन के मुद्दों को पंहुचाने के लिए 21 मई से 26 मई तक फेसबुक लाइव किया जा रहा है।

फेसबुक लाइव के आज पांचवें दिन अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के वर्किंग ग्रुप के सदस्य डॉ. अशोक धवले ने कहा कि हिसार में पुलिस लाठीचार्ज के बाद 350 किसानों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे। सरकार ने मुकदमे वापस ले लिए हैं, यह किसानों की बड़ी जीत है। किसान आंदोलन को महिला, युवा, दलित सभी का भरपूर सहयोग मिल रहा है। किसान आंदोलन से सरकार की उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीति पर अंकुश लगा है।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के वर्किंग ग्रुप के सदस्य किरण विस्सा ने कहा कि छह माह के आंदोलन के दौरान हम बहुत कुछ हासिल कर चुके हैं लेकिन हमें और आत्मविश्वास और मजबूती के साथ संघर्ष को बढ़ाना है। किसान आंदोलन देशव्यापी आंदोलन बन चुका है इसमें सभी तबके के लोग शामिल हुए हैं।

बिहार से ऑल इंडिया किसान महासभा के सुदामा प्रसाद ने कहा कि देश किसान आंदोलन के माध्यम से एकजुट हुआ है। देश और लोकतंत्र रहेगा तब ही खेती बच सकती है इसलिए हमें ‘मोदी सरकार गद्दी छोड़ो’ का नारा देना होगा। उन्होंने सरकार से लॉकडाउन के दौरान खराब हुए फल, सब्जी, दूध के नुकसान पर 5000 रू प्रति एकड़ लॉकडाउन भत्ता दिए जाने की भी मांग की है। उन्होंने एक नारा दिया है ‘देश बेचू आदमखोर, मोदी-शाह गद्दी छोड़।

ऑल इंडिया खेत मजदूर संगठन की सदस्य श्रीमती नागम्मल ने कहा कि आज मेहनतकश किसानों की उपज की बाजार में खुली लूट हो रही है। हम लॉकडाउन में रहकर भी विरोध कर रहे हैं लेकिन सरकार हमें विभाजित करना चाहती हैं। जिस तरह बॉर्डर पर किसान खड़े हैं उसी तरह  देश के हर कोने कोने में किसान आंदोलन के साथ खड़े होंगे तब सरकार को झुकना ही पड़ेगा।

हरियाणा से जय किसान आंदोलन के उपाध्यक्ष सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन ने सरकार के सांप्रदायिक एजेंडा पर रोक लगाने का काम किया है। किसान आंदोलन ने सरकार के कारपोरेट परस्त चरित्र को उजागर कर दिया है।

कर्नाटक जन क्रांति के नेता नूर श्रीधर ने कहा कि पूरा देश का भविष्य किसान आंदोलन पर अश्रित हो गया है। हमें 26 मई के बाद भी किसान आंदोलन कैसे आगे चलाना है इस पर भी विचार करना होगा और एक बड़ा राष्ट्रीय कॉल देना होगा।

बिहार से एनएपीएम के महेंद्र यादव ने कहा कि देश में नफरत और पाखंड की बुनियाद पर यह सरकार सत्ता में आई है। अब उनकी संवेदनहीनता की पोल खुल रही है। सरकार पाखंड फैला कर देश को गुमराह कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मधेपुरा जिले के किसानों को मक्का की फसल का उचित दाम नहीं मिलने से दो अरब पचपन करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है। मुनाफाखोर किसानों की उपज पर तीन गुना मुनाफा कमाते हैं।

ऑल इंडिया खेत मजदूर संगठन के उपाध्यक्ष डॉ. ए. रंगासामी ने कहा कि सरकार का मकसद किसानों को कार्पोरेट का गुलाम बनाना है, हम गुलाम बनने को तैयार नही हैं इसलिए हम संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि 65% लोगों को रोजगार देती है। कोरोना काल में खेती के काम से ही लोगों की जान बची है। अडानी-अंबानी के यहाँ काम कर लोग नहीं बचे हैं। कृषि ने ही अर्थव्यवस्था को बचाया है। हमें अपनी समस्याओं का स्थाई हल निकालना चाहिए इसके लिए हमें असंगठित क्षेत्र के लोगों को साथ लेकर चलना होगा।

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