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एक लड़ाई मुहब्बत की: यलगार परिषद 2021 में अरुंधति रॉय

-जनपथ,

मैं 2021 यलगार परिषद के आयोजकों का शुक्रिया अदा करती हूं कि उन्होंने मुझे आज के दिन इस मंच पर बोलने के लिए बुलाया. आज जो रोहित वेमुला की 32वीं सालगिरह रहा होता, और जो 1818 में भीमा कोरेगांव की लड़ाई में जीत का दिन है. वह जगह यहां से दूर नहीं है, जहां ब्रिटिश आर्मी में लड़ने वाले महार फौजियों ने पेशवा राजा बाजीराव द्वितीय को हराया था, जिनकी हुकूमत में महार और दूसरी दलित जातियां सताई जाती रही थीं और उन्हें इस कदर बाकायदा अपमानित किया जाता कि बयान करना मुश्किल है.

इस मंच से बाकी वक्ताओं के साथ अपनी आवाज मिलाते हुए मैं किसानों के आंदोलनों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर करती हूं, जिनकी मांग है कि उन तीन कृषि विधेयकों को फौरन वापस लिया जाए जिन्हें जबरदस्ती लाखों किसानों और खेतिहर मजदूरों के ऊपर थोप दिया गया है. इसके नतीजे में वे सड़कों पर उतर आए हैं. हम यहां उन अनेक लोगों के लिए अपना गम और गुस्सा जाहिर करने आए हैं, जिनकी मौत इस आंदोलन के दौरान हुई है. दिल्ली की सीमा पर हालत तनावपूर्ण और खतरनाक होती जा रही है, जहां दो महीनों से किसानों ने शांति के साथ डेरा डाल रखा है. इस आंदोलन में फूट डालने और इसे बदनाम करने के लिए हर संभव तरकीब अपनाई जा रही है, उकसाया जा रहा है. हमें पहले से कहीं ज्यादा इस वक्त किसानों के साथ खड़े होने की जरूरत है.

हम यहां उन दर्जनों सियासी कैदियों की रिहाई की मांग करने के लिए भी जमा हुए हैं, जिनको सख्त आतंक-विरोधी कानूनों के तहत बेतुके आरोपों में जेल में बंद रखा गया है. और इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें अब भीमा कोरेगांव सिक्सटीन के नाम से जाना जाता है. उनमें से अनेक न सिर्फ संघर्ष के साथी हैं, बल्कि मेरे निजी दोस्त हैं जिनके साथ मिल कर मैं हंसी हूं, जिनके साथ चली हूं, जिनके साथ मैंने रोटियां खाई हैं. किसी को भी इसमें यकीन नहीं है, शायद उनको कैद करने वालों को भी, कि उन्होंने सचमुच वे घिसे-पिटे अपराध किए हैं जिनके इल्जाम उन पर लगे हैं. सब जानते हैं कि वे जेल में हैं क्योंकि वे एक साफ समझदारी और नैतिक साहस रखते हैं – और ये दोनों ही खूबियां ऐसी हैं  जिन्हें यह हुकूमत एक अहम खतरे के रूप में देखती है. कोई सबूत मौजूद नहीं है, तो इसकी कमी पूरी करने के लिए कुछ लोगों के खिलाफ दसियों हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई है. एक जज को उन पर फैसला करने की बात तो दूर, उनको बस पढ़ने भर में कई साल लग जाएंगे.

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