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ट्रेन से हाथियों की टक्कर के बाद असम के लोको पायलटों के अनुभव, क्या है समाधान

मोंगाबे हिंदी, 13 फरवरी

हत्यारा कहलाना किसी को पसंद नहीं है। किसी भी प्राणी की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराना विचलित करने वाला हो सकता है। हाथी की तो बात ही छोड़िए। कुत्ते, बकरी या गाय की मौत भी उतनी ही दुखदायी होती है,” पूर्वोत्तर भारत में काम करने वाले एक लोको पायलट ने अपनी ट्रेन से एक हाथी से टकराने के बाद अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा। उस हाथी की बाद में मौत हो गई थी।

एक और लोको पायलट कहते है, “कभी-कभी इंसान भी मर जाते हैं। आप किसी भी लोको पायलट की पीड़ा की कल्पना कीजिए। जिसकी ट्रेन के सामने कोई व्यक्ति या हाथी आ जाता है और वह टकराने वाला है। लेकिन वह बेबस है। क्या कभी किसी ने सोचा है कि ऐसे मामलों में हम किस मानसिक आघात से गुजरते हैं? आखिर हमारी ट्रेन से एक जीव की मौत हुई है। जान-बूझकर या अनजाने में।”
पूरी रपट- मोंगाबे हिंदी