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बिहार बाढ़: 8 जिलों के 2 लाख 88 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित

-वाटर पोर्टल,

कमोबेश हर साल बिहार में तबाही मचाने वाली बाढ़ इस साल भी दस्तक दे चुकी है। अब तक बिहार के 8 जिलों; सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर. गोपालगंज और पूर्वी चम्पारण के 30 ब्लॉक की 150 पंचायतों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है।

बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने कहा,

“अब तक के आकलन के मुताबिक 2 लाख 88 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें से  9,845 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और उन्हें राहत शिविरों में रखा गया है।”

लेकिन प्रभावित आबादी की तुलना में राहत शिविर कम संचालित हो रहे हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, अभी महज 5 राहत शिविर संचालित हो रहे हैं, जिनमें से दो शिविर दरभंगा में और तीन शिविर गोपालगंज में हैं। इन राहत शिविरों में 2081 लोग ठहरे हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राहत शिविरों में रहने वालों के लिए 28 सामुदायिक रसोईयां संचालित हो रही हैं।

सुपौल और सीतामढ़ी में एक भी राहत शिविर नहीं

आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक, कोसी नदी से हर साल प्रभावित होने वाले सुपौल जिले के 5 प्रखंडों के 53223 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। लेकिन, एक भी राहत शिविर सुपौल में संचालित नहीं हो रहा है। 

इस संबंध में जब इंडिया वाटर पोर्टल ने सुपौल के डीएम महेंद्र कुमार से बात की, तो उन्होंने कहा,

“जो आबादी प्रभावित हुई है, वह कोसी के तटबंध के भीतर रह रही है। पहले कोसी में 2 लाख 76 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा था, जो अब घट कर 1 लाख 40 हजार क्यूसेक पर आ गया है। नदी का जलस्तर घट रहा है और अब लोगों के घरों से पानी निकल गया है। इसलिए राहत शिविर स्थापित करने की कोई जरूरत नहीं पड़ी।”

उन्होंने आगे कहा, “अभी सुपौल में दो सामुदायिक रसोई संचालित हो रही है, जिनमें लोगों को खाना मिल रहा है, लेकिन अब लोग घरों को लौट गए हैं, इसलिए खाना खाने भी नहीं आ रहे हैं। हम लोग जल्द ही दोनों रसोई बंद करने वाले हैं।”

सुपौल के ही एक अन्य अधिकारी ने कहा कि 13 जुलाई तक एक राहत शिविर संचालित हुआ था, जिसमें 400 लोग ठहरे हुए थे।

हालांकि, बाढ़ से प्रभावित लोग और वहां काम करने वाले गैर सरकारी संगठन सरकारी इंतजाम पर सवाल उठाते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से बाढ़ का पानी चढ़-उतर रहा है, लेकिन सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। जब पानी घरों में घुसा, तो सरकार को कम से कम सूखा राशन देना चाहिए, लेकिन कुछ नहीं मिला।

कोसी नवनिर्माण मंच से जुड़े महेंद्र यादव कहते हैं, “दो दिनों तक लोगों के घरों में पानी घुसा हुआ था। इस दौरान लोगों को बांध पर शरण लेनी पड़ी। कुछ लोग अपने रिश्तेदारों को यहां चले गए, लेकिन सरकार की तरफ से राहत शिविर नहीं बनाया गया। यहां तक कि बांध पर शरण लिए हुए लोगों के लिए भी सामुदायिक रसोई शुरू नहीं की गई।”

सीतामढ़ी जिले के भी 5 प्रखंडों के 30900 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, लेकिन यहां भी कोई राहत शिविर संचालित नहीं हो रहा है।

बाढ़ से प्रभावितों का आंकड़ा देखें, तो पता चलता है कि इसका असर दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से मिले आंकड़ों के मुताबिक, 13 जुलाई को बिहार के 7 जिलों के 23 प्रखंड बाढ़ की चपेट में थे और इससे 1,68,668 लोग प्रभावित हुए थे, जो अब बढ़कर 2.88 लाख हो चुके हैं।

उधर, बागमती नदी में उफान के कारण शिवहर जिले के पिपहारी प्रखंड में बना अस्थाई कॉफर डैम टूट गया था, जिसके बाद वहां बांध का निर्माण किया गया, ताकि पानी गांवों में न फैले। बिहार के जल संसाधन विभाग के मंत्री संजय झा ने ट्वीट कर जानकारी दी कि 36 मीटर लंबा बांध महज 36 घंटों में ही बना दिया गया है। 

दरभंगा के केवटी में  भी बागमती नदी में उफान के चलते रेललाइन के निकट बांध टूट जाने से पानी गांवों में फैल गया है। 

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