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कैसे चुनाव के आगे कोरोना जैसा वायरस भी फेल हो जाता है

-सत्याग्रह,

बीते 18 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने देश में कोरोना वायरस के प्रसार को लेकर एक प्रेस कांफ्रेंस की. कांफ्रेंस में बताया गया कि कोरोना पर बनाई गई विशेषज्ञों की एक समिति ने बताया है कि देश महामारी के चरम स्थान को पार कर चुका है और अगर बचाव के पर्याप्त कदमों में कोई ढील न दी जाए तो अब यहां से स्थिति में लगातार सुधार होता नजर आएगा. समिति ने कहा कि अगर पूरे प्रोटोकॉल का पालन किया गया तो देश फरवरी 2021 के अंत तक महामारी के प्रसार को रोकने में सफल हो जाएगा. हालांकि, उसने यह चेतावनी भी दी कि आने वाले त्योहारों और सर्दी के दिनों में इसका संक्रमण फिर फैल सकता है. इसलिये वास्तविक सावधानी, सर्तकता, सामाजिक दूरी, मास्क, उपचार आदि पर विशेष ध्यान देने की जरूरत अब पहले से ज्यादा है. समिति का यह भी कहना था कि अगर नियमों का पालन नहीं किया गया तो एक महीने में कोविड-19 के 26 लाख से भी ज्यादा नए मामले सामने आ सकते हैं.

विशेषज्ञों की इस चेतावनी के दो रोज बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया, यह संबोधन कोरोना वायरस पर ही था. प्रधानमंत्री ने लोगों को चेताते हुए कहा, ‘अधिकांश लोग अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए और जीवन को गति देने के लिए घर से बाहर निकल रहे हैं. त्योहारों पर बाजारों में रौनक लौट रही है, लेकिन हमें यह भूलना नहीं है कि लॉकडाउन भले चला गया हो, वायरस नहीं गया है. भारत आज जिस संभली हुई स्थिति में है हमें उसे बिगड़ने नहीं देना है और अधिक सुधार करना है... ये समय लापरवाह होने का नहीं है, यह मान लेने का नहीं है कि कोरोना चला गया है या इससे कोई खतरा नहीं है. हाल के दिनों में दिखा है कि कई लोगों ने सावधानी बरतना बंद कर दिया है, ये बिलकुल नहीं करना है... अगर आप बिना मास्क के बाहर निकल रहे हैं तो आप अपने आपको और घरवालों को बड़े संकट में डाल रहे हैं. एक कठिन समय से निकल कर हम आगे बढ़ रहे हैं थोड़ी सी लापरवाही हमारी गति को रोक सकती है. दो गज दूरी, साबुन से हाथ धोने और मास्क लगाने का ध्यान रखिये, मैं आपको सुरक्षित देखना चाहता हूं... याद रखिये जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं.’

प्रधानमंत्री के इस संबोधन से साफ़ लगा कि लोगों की लापरवाही और विशेषज्ञों की राय को लेकर प्रधानमंत्री काफी चिंतित हैं और इसीलिए काफी दिनों बाद उन्होंने एक बार फिर कोरोना वायरस के मामले में देश को संबोधित करना जरूरी समझा. संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री के हाव-भाव और चिंता देखकर कुछ लोग यह भी कहने लगे कि अब नरेंद्र मोदी बिहार विधानसभा चुनाव में शायद ही रैली करें. क्योंकि उनकी रैलियों में भारी भीड़ होती है जिसे संभालना शायद मुश्किल होगा. कुछ लोगों को मानना था कि पूरे देश को समझाने वाले प्रधानमंत्री कोरोना के समय में शायद ही ऐसा जोखिम उठायें. लेकिन, राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के चार दिन बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार पहुंच गए और वहां उन्होंने तीन बड़ी रैलियों को संबोधित किया.

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