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लॉकडाउन: ट्रांसजेंडर समुदाय के सामने रोजी-रोटी का संकट, 10 राज्यों में गाँव कनेक्शन ने की बात

-गांव कनेक्शन,

ट्रेन और बसों में मांगकर, शादी-विवाह जैसे कार्यक्रमों में नाच गाकर अपना घर चलाने वाले ट्रांसजेंडर समुदाय के सामने अब रोजी-रोटी का संकट आ गया है। लॉकडाउन से जब आज हर कोई घरों में कैद है। दिहाड़ी पर काम करके खाने वाले लोगों के पास राशन नहीं है। ट्रांसजेंडर भी उसी में शामिल हैं। महामारी से ट्रेन और बसें बंद हो गईं हैं, जो ट्रांसजेंडर ट्रेनों और बसों में मांगकर अपना जीवन चलाते थे उनके सामने भारी संकट आ गया है। लॉक डाउन की वजह से सभी शादी और महोत्सव पर रोक लगा दी गयी है। ऐसे में ट्रांसजेंडर समुदाय से जो लोग बधाई बजाकर और त्योहारों में मांगकर जीवन चलाते थे वो अब बेसहारा हो गये हैं। गाँव कनेक्शन ने महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, जम्मु-कश्मीर और पश्चिम बंगाल जैसे दस राज्यों के ट्रांसजेंडर समुदाय से उनकी समस्याओं के बारे में बात की। महाराष्ट्र के वर्धा जिले में उन्नीस साल के अमन के पास अब खाने के लिए कुछ नहीं बचा है।

अमन अपने तीन साथियों के साथ एक छोटे से घर में रहते हैं। अमन बताते हैं, "जब से देश में लॉकडाउन शुरू हुआ है, किन्नरों का जीवन बर्बादी के कगार पर आ गया है। हम लोगों के साथ पहले से ही भेदभाव होता रहा है और आज इतने बड़े संकट के समय में भी वो भेद भाव हो रहा है। सरकार और समाज हमें पीछे छोड़ते जा रहे हैं। अमन अभी ग्रेजुएशन के पहले साल में हैं, उन्हें लगता है कि अगर और ज्यादा दिनों तक ऐसे ही लॉकडाउन रहा तो और भी बड़ा संकट आ जाएगा। वो कहते हैं, "लोग जगह-जगह खाना बांट रहे हैं लेकिन जब हम लोग वहां खाना लेने जाते हैं तो लोगों के द्वारा एक अजीब तरीके से प्रतिक्रिया दी जाती है। जो ठीक बात नहीं है हम लोग भी तो इसी समाज का हिस्सा हैं। सरकार की तरफ से कुछ किन्नरों को कुछ पैसा आया है वो भी जिनके पास कोई दस्तावेज है उन्हें ही मिल पाया है।"

अमन सरकार से निवेदन करते हैं कि सरकार मदद करे नहीं तो अब जीना मुश्किल हो जाएगा। महाराष्ट्र के ही मुम्बई में रहने वाली ट्रांसजेंडर माधुरी अपनी समस्या बताते हुए कहती हैं, "ट्रांसजेंडर समुदाय के ज्यादातर लोग ट्रेनों में मांगकर, शादियों में बधाई बजाकर अपना पेट पालते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सेक्स वर्क करके अपना और अपने परिवार का जीवन चलाते थे। लॉकडाउन में यह सब कुछ बंद चल रहा है। अब हम लोगों के सामने दिक्कत आ गयी है। अब न तो हम भीख मांग सकते हैं और न अपना खुद का कोई काम कर सकते हैं। जीना मुश्किल हो गया है।" देश में ट्रांसजेंडर की संख्या 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 49 लाख है जबकि सरकार दस्तावेजों में रजिस्टर्ड ट्रांसजेंडर पांच लाख के करीब हैं।

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