Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/covid-19-experts-are-worried-about-mental-health.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | कोविड-19: मानसिक स्वास्थ्य को ले कर वैश्विक चिंता के बीच भारत के हालात? | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

कोविड-19: मानसिक स्वास्थ्य को ले कर वैश्विक चिंता के बीच भारत के हालात?

-डाउन टू अर्थ,

हाल ही में लैंसेंट साइकियाट्री जर्नल में मानसिक स्वास्थ्य को ले कर एक रिपोर्ट छपी है. यूनिवर्सिटी के साइकियाट्री डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर इड बुलमोर और उनकी टीम ने इंग्लैंड में कोविड-19 संक्रमण के बीच आयोजित एक सर्वे के आधार पर इस रिपोर्ट को तैयार किया है। बुलमोर कहते हैं कि सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यही है कि अभी और भविष्य में भी कोरोना महामारी का मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा और विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

उनका सुझाव है कि आम लोगों, जोखिम समूहों और यहां तक कि हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स के मानसिक स्वास्थ्य की रीयल टाइम मॉनिटरिंग किए जाने की सख्त जरूरत है। रिसर्च के मुताबिक, कोरोना महामारी के कारण बढती बेरोजगारी या रोजगार छिनने का डर, परिवार से दूर होना, अर्थव्यवस्था की खराब हालत, क्वरंटाइन या आइसोलेशन में रहने के कारण आम लोगों पर दीर्घकालिक नकारात्मक मानसिक असर होगा।

इसके लिए वैज्ञानिक पूर्व के कुछ उदाहरण बताते हैं। मसलन, 2003 में आए सार्स महामारी या सिएरा लियोन में इबोला वायरस से प्रभावित हुए लोगों में निराशा, चिंता या पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर (पीटीएसडी) के लक्षण पाए गए। यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लास्गो के प्रोफेसर रोरी ऑ’कॉनर तो ये भी निष्कर्ष देते हैं कि सार्स महामारी के बाद 65 साल से ऊपर के लोगों में आत्महत्या की दर 30 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ गई थी। इस टीम ने बताया कि उन नीतियों के प्रभाव की भी समीक्षा करने की जरूरत है जो कोरोना महामारी को रोकने के लिए बनाई गई हैं।

हाल ही में, न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में एक रिसर्च पेपर प्रकाशित हुआ है। यूनिवर्सिटी ऑफ ओक्लाहोमा के साइकियाट्री प्रोफेसर बेट्टी पेफरबॉम ने अपने रिसर्च पेपर में कुछ ऐसे कारकों की पहचान की हैं, जो लोगों में तनाव और निराशा बढाने का काम करते है। उन्होंने बताया कि 

महामारी की अनिश्चितता, परीक्षण और उपचार के क्रम में संसाधनों की भारी कमी लोगों में चिंता पैदा कर सकती है. आम लोगों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की सुरक्षा से समझौता करना भी तनाव का कारण बन सकता है. लोगों के लिए अब तक अपरिचित रहे सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा उपायों का इस्तेमाल (भारत के सन्दर्भ में क्वरंटाइन और सोशल डिस्टंसिंग जैसे शब्द) भी लोगों में निराशा का माहौल पैदा कर सकता है। आमतौर पर लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बाधित करने वाले उपाय मानने लगते हैं। वित्तीय नुकसान और सरकारी प्राधिकारों की तरफ से आने वाले परस्पर विरोधी बयान भी तनाव पैदा करने वाले कारक हैं। ये सभी कारक निश्चित रूप से कोविड-19 संबधी भावनात्मक निराशा और मनोविकारों को बढाने में योगदान देंगे। वो ये सुझाव भी देते हैं कि कोविड-19 मरीजों का उपचार करते वक्त हेल्थ केयर वर्कर्स को इन भावनात्मक पक्षों का भी निदान करना होगा, अन्यथा नतीजे बहुत भयावह हो सकते हैं।

अभी चीन में कोविड-19 मरीजों का इलाज कर रहे हेल्थ केयर वर्कर्स पर भी अध्ययन किया और पाया कि इन वर्कर्स ने चिंता, निराशा, नींद न आने जैसे लक्षण की बात स्वीकारी है। अब भारत में हेल्थ केयर वर्कर्स को ले कर इस तरह का कोई अध्ययन हुआ हो, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है। लेकिन, वैश्विक महामारी के दौर में वैश्विक चिंताओं और समस्याओं से क्या हम अछूते रह सकते है? शायद नहीं।

हेल्थ सर्विस के साथ ही क्राइसिस काउंसेलर और मानसिक स्वास्थ्य सलाहकारों की व्यवस्था भी बड़े पैमाने पर किए जाने की जरूरत होगी। क्राइसिस काउंसलर और मानसिक स्वास्थ्य सलाहकारों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, इसे एक डेटा से समझा जा सकता है। लॉस एंजल्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कैलिफोर्निया स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था के क्राइसिस काउंसलर्स के पास मार्च महीने में 1800 कॉल्स आए, जबकि फरवरी महीने में ये संख्या महज 20 थी। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने ये घोषणा की है कि मेडिकल इंश्योरेंस देने वाली कंपनियां मेंटल हेल्थ केयर भी कवर करेंगी। टेलीमेडिसिन के जरिये लोग इस स्वास्थ्य सुविधा का इस्तेमाल करेंगे।

पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.