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कोविड-19 : महाराष्ट्र सहित देश के अन्य हिस्सों में ऑक्सीजन की भारी कमी, अस्पताल परेशान

-कारवां,

2 सितंबर को पनवेल में निरामय हॉस्पिटल्स के मेडिकल निदेशक डॉ. अमित थडानी 16 घंटे तक ऑक्सीजन खोजते रहे. थडानी 55 बेड वाला अस्पताल चलाते हैं जो अब कोविड-19 अस्पताल है जहां मरीजों के लिए एक दिन में 70 ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत होती है. थडानी ने ऑक्सीजन के 50 सिलेंडर मंगवाने के लिए कई ऑक्सीजन डीलरों को आर्डर दिए थे लेकिन उस दिन दोपहर तक उन्हें सिर्फ 20 मिल पाए थे. शाम होने तक वह अपने मरीजों के लिए दूसरे अस्पतालों की तलाश करने लगे. “दिन ढलने तक कई जगह फोन करने और अपने कर्मचारियों को पूरे शहर में दौड़ाने के बाद हम दैनिक ऑक्सीजन आवश्यकता को पूरा कर तो पाए लेकिन तब तक हम अपने दो सबसे गंभीर मरीजों को अन्य अस्पताल में स्थानांतरित कर चुके थे," थडानी ने बताया.

अगस्त के आखिर से ही कई तरह की चिकित्सा सुविधाएं, विशेष रूप से छोटे अस्पताल और नर्सिंग होम में ऑक्सीजन की भारी कमी है क्योंकि महाराष्ट्र में ऑक्सीजन की जरूरत वाले कोविड-19 के मामलों की संख्या बढ़ गई है. ऑक्सीजन उत्पादकों ने मुझे बताया कि महामारी फैलने के बाद से मेडिकल ऑक्सीजन की मांग दोगुनी से अधिक हो गई है. ऑक्सीजन डीलरों ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला या सप्लाई चेन के लिए बुनियादी ढांचे की कमी है जिससे ऑक्सीजन अस्पतालों तक नहीं पहुंच सकता है.

सितंबर के मध्य तक करीब तीन लाख कोविड-19 के सक्रिय रोगियों के साथ महाराष्ट्र भारत में शीर्ष स्थान पर था. उस समयावधि में यह संक्रमित लोगों की संख्या के अनुपात में मृत्यु दर में दूसरा नंबर का राज्य था. इस महामारी में यह ज्यादातर मौतें गंभीर सांस की परेशानी के बाद हुई हैं.

सितंबर के दूसरे सप्ताह तक थडानी के अस्पताल के 40 बेड भर चुके थे. इससे ज्यादा मरीजों को डॉक्टर भर्ती नहीं कर रहे थे क्योंकि वह इस बात को लेकर सुनिश्चित नहीं थे कि अगर उन्हें जरूरत हुई तो वह पर्याप्त ऑक्सीजन का इंतजाम कर पाएंगे. थडानी ने बताया, "मेरे तीस मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता है जिनमें से छह नॉन इवेसिव वेंटिलेशन पर हैं जिस स्थिति में लगातार उच्च प्रवाह में ऑक्सीजन की आवश्यकता रहती है." डॉक्टर ने ऑक्सीजन का इंतजाम करने के लिए हर दिन फोन पर बात करते हुए कम से कम 12 घंटे बिताए. उन्होंने कहा, "मुझे हर दिन विभिन्न विक्रेताओं और डीलरों को कॉल करते रहना पड़ता है क्योंकि एक विक्रेता 70 सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं कर सकता.” महामारी फैलने से पहले अस्पताल को प्रति दिन दस से अधिक सिलेंडरों की आवश्यकता नहीं पड़ती थी. उन्होंने कहा, “लेकिन अब रोज इसके लिए मेहनत करनी पड़ती है. हर दिन मुझे लगता है कि मेरे पास सारे विकल्प खत्म हो गए हैं.”

पनवेल से 170 किलोमीटर से अधिक दूरी पर नासिक में सुदर्शन अस्पताल के निदेशक डॉ. संजय धुर्जद भी इसी तरह की परेशानियों से गुजरे. उन्होंने अपने मरीजों के लिए ऑक्सीजन का इंतजाम करने के लिए घंटों फोन लगाए. "एक दिन मेरी टीम ऑक्सीजन सिलेंडरों की तलाश में 24 घंटे से अधिक समय तक शहर में घूमती रही. वे जहां कहीं ऑक्सीजन सिलेंडर ढूंढने में लगे थे." देर रात उनके कर्मचारियों को एक टेंपो मिला जिसमें दस ऑक्सीजन सिलेंडर थे लेकिन वहां कोई भी ड्राइवर या केयरटेकर नहीं था. धुर्जद ने आगे बताया किऑक्सीजन न मिलने से निराश मेरे साथी सिलेंडरों को अस्पताल ले गए. अगले दिन वे उस स्थान पर वापस आ गए जहां उन्हें टेंपो मिला था ताकि वह उसके मालिक को ढूंढकर ऑक्सीजन का भुगतान कर सकें. "मुझे पता है कि यह कैसे लगता है लेकिन यह अब जीवन और मृत्यु की बात है. उस रात ऑक्सीजन पाने के लिए हम यही कर सके."

उन्होंने कहा कि उन्होंने जिला कलेक्टर, नगर निगम के आयुक्त, स्थानीय विधायक, प्रतिनिधि सांसद और स्वास्थ्य विभाग और राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों के साथ इस मुद्दे को उठाया.

उन्होंने आश्वासन दिया कि सितंबर के अंत तक आपूर्ति श्रृंखला बहाल कर दी जाएगी. "लेकिन तब तक यही तनावपूर्ण चक्र जारी है," धुर्जद ने कहा.

अस्पताल में मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति का तरीका उसके आकार और स्थान पर निर्भर करता है. आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, लिंडे इंडिया लिमिटेड, प्रैक्सेयर और विनायक एयर प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड जैसे बड़े मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादक मुख्य रूप से तरल ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं. वे इस तरल ऑक्सीजन की आपूर्ति सीधे बड़े सरकारी और कॉरपोरेट अस्पतालों में करते हैं जहां ऑक्सीजन टैंक होते हैं. कंप्रेशर्स तरल ऑक्सीजन को संपीड़ित या कंप्रैस्ड गैस में बदल देते हैं जिसे अस्पतालों में पाइपलाइनों के माध्यम से परिचालित किया जाता है.

बड़े निर्माता उन डीलरों को भी ऑक्सीजन की आपूर्ति करते हैं जो ऑक्सीजन गैस को कंप्रैस कर सिलेंडर में भर कर छोटे अस्पतालों और नर्सिंग होम तक पहुंचाते हैं. ऐसे डीलर भारत में टियर -2 और टियर -3 शहरों में अधिकांश अस्पतालों की आपूर्ति करते हैं. छोटे पैमाने के निर्माता भी अस्पतालों और डीलरों को सीधे सिलेंडर में ऑक्सीजन की आपूर्ति करते हैं. डीलर और अस्पताल अक्सर रिफिलिंग स्टेशनों पर खाली सिलेंडरों को रिफिल करते हैं.

महाराष्ट्र में ऑक्सीजन का संकट बड़ा है लेकिन देश भर के अस्पताल भी इस कमी से जूझ रहे हैं. 30 अगस्त को असम के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने एक प्रेस वार्ता में माना था कि राज्य में ऑक्सीजन की कमी है जबकि कोरोना खतरनाक रूप से फैल रहा है. 13 सितंबर को जम्मू के स्थानीय समाचार घरानों ने इस क्षेत्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी की सूचना दी. 14 सितंबर को पंजाब सरकार ने पड़ोसी राज्यों में इस डर से तरल ऑक्सीजन की आपूर्ति में मदद करने के लिए कदम उठाया कि उनके अस्पतालों में महीने के अंत तक ऑक्सीजन खत्म हो जाएगी. इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने 15 सितंबर को एक संवाददाता सम्मेलन में सवालों का जवाब देते हुए कहा, "राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है.”

महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों में मामलों में तेजी से हुई वृद्धि ने अस्पतालों को केवल उन रोगियों को दाखिल करने पर मजबूर किया जिनमें ऑक्सीजन परिपूर्णता गंभीर स्तर पर थी. कोविड-19 अस्पताल चलाने वाले महाराष्ट्र के थडानी और अन्य डॉक्टरों ने मुझे बताया कि जुलाई तक उनके दस प्रतिशत से भी कम रोगियों को ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता थी. अब 90 प्रतिशत से अधिक रोगियों को ऑक्सीजन चिकित्सा की आवश्यकता होती है. नासिक में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रमुख डॉ. समीर चंद्रत्रे ने आशंका जताई कि अगर राज्य सरकार ने ऑक्सीजन उत्पादन में वृद्धि करने और आपूर्ति श्रृंखला को कारगर बनाने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए, तो महीने के अंत तक अस्पताल में पूरी तरह से ऑक्सीजन खत्म हो जाएगी. उन्होंने कहा, "नासिक में पहले ही मामले विस्फोटक रूप से बढ़ चुके हैं. मुझे नहीं पता कि अगले कुछ हफ्तों में हमारे शहर में क्या होगा."

महाराष्ट्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 12 सितंबर को राज्य भर के अस्पतालों में प्रतिदिन 809.22 टन ऑक्सीजन की मांग थी जबकि निर्माता और रिफिलर्स प्रति दिन केवल 765.85 टन की आपूर्ति कर पाए. राज्य भर के कोविड-19 अस्पतालों में सीमित शेष स्टॉक 389.16 टन था जो एक दिन की आवश्यकता से भी कम था.

मेडिकल ऑक्सीजन उद्योग के प्रतिनिधियों ने बताया है कि इस काम को कई चीजों ने प्रभावित किया है. कई पुरानी बाधाएं हैं जिन्हें दूर करना महामारी ने और मुश्किल कर दिया है. इन समस्याओं में सबसे पहली समस्या मार्च में महामारी के तेजी से फैलने के बाद अचानक ऑक्सीजन की मांग का बढ़ना है. एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के सेल्स हेड ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, "मुझे लगता है कि अब मांग दोगुनी से अधिक हो गई है. जबकि महामारी फैलने से पहले भारत में एक औसत दिन में मेडिकल ऑक्सीजन का बाजार 900 से 1000 टन था. यह अब कम से कम 2500 टन प्रति दिन है."

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