Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/csir-agreement-with-dubai-based-businessman-close-to-modi-accused-of-fraud.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | सीएसआईआर ने मोदी के नज़दीकी से किया क़रार, अरबों डॉलर की जालसाजी के आरोप | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

सीएसआईआर ने मोदी के नज़दीकी से किया क़रार, अरबों डॉलर की जालसाजी के आरोप

-सत्यहिंदी,

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं को कैसे हज़म किया जाता है। क्यों इस देश में बड़ी बड़ी योजनाओं का फल आम लोगों तक नहीं पहुँचता और बीच में ही लपक लिया जाता है, यह रिपोर्ट उसे भी दर्शाती है? इस रिपोर्ट से आप यह भी जान पाएंगे कि किस तरह हमारे बड़े बड़े सरकारी संस्थान इसका शिकार हो सकते हैं।

मामले की शुरुआत होती है 25 अप्रैल 2020 से, जब हमारे देश के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी वैज्ञानिक संस्थान केंद्रीय वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने एक प्रेस बयान जारी किया।

प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप
इस प्रेस नोट में बताया गया कि देश में एक्टिव फ़ार्मास्यूटिकल इनग्रेडियेंट यानी एपीआई (दवा बनाने के लिए ज़रूरी कच्चा माल) के विकास के लिए सीएसआईआर ने अपनी ही सहयोगी संस्था आईआईसीटी के ज़रिए एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान से एक क़रार किया है।

यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसी वर्ष मार्च में की गई उस घोषणा को ज़मीन पर लागू करने के दिशा में है, जिसमें उन्होंने देश में ही एपीआई विकसित करने के लिये 14 हज़ार करोड़ की सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की थी।

जेनरिक दवा बनाने के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है। दुनिया भर में जितनी जेनरिक दवाएं बनती हैं, उसका लगभग 20 फ़ीसदी भारत में बनता है। भारत ने क़रीब 21 अरब डॉलर का निर्यात बीते वर्ष किया था। लेकिन हम अपनी ज़रूरत की दवा बनाने के लिए क़रीब 70 फ़ीसद कच्चा माल विदेशों से मंगाते हैं, ज़्यादातर चीन से। प्रधानमंत्री के इस ऐलान से दवाओं के लिये एपीआई देश में ही बनाने का एक बड़ा प्रयास शुरू हो सकता है।

सीएसआईआर का क़रार
सीएसआईआर व आईआईसीटी के 25 अप्रैल के प्रेस बयान को पढ़ने से पता चला कि इन्होंने लक्साई लाइफ़ लाइन्सेज नामक एक कंपनी से इस आशय का समझौता किया है। लक्साई ने बताया कि उसकी एक आनुषंगिक कंपनी है थेरापिवा प्राइवेट लिमिटेड, जिसके पास एपीआई विकसित करने का एक संयंत्र है। वह संयंत्र अमेरिकी फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन और जीएमपी जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों द्वारा प्रमाणित है। 

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.