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दिल्लीः दंगे के बाद पहली बार तबाह लोगों ने खुलकर सुनायी आपबीती, दहलाने वाली गवाहियां

-मीडियाविजिल,

हाजी अजमेरी मलिक कुछ सप्ताह पहले तक जूते के शो रूम के मालिक हुआ करते थे. नार्थ-ईस्ट दिल्ली के बृजपुरी इलाके के बाजार में वो इकलौते मुस्लिम व्यापारी हुआ करते थे. जब वे शो रूम के लिए जमीन खरीद रहे थे तब कई लोगों ने उन्हें सलाह दी कि वे हिंदुओं के इलाके में जमीन न लें. हाजी अजमेरी मलिक का जवाब होता कि उन्हें मुसलमानों से ज्यादा भरोसा अपने हिंदू भाइयों पर है, लेकिन वर्षाें का यह भरोसा 23-24 फरवरी को हुए हालिया दंगों में ढह गया.

आपबीती बयान करते हुए हाजी अजमेरी मलिक का गला कई दफा भर्रा जाता है. वे दिल्ली के दंगों पर कोंस्टिटयूशन क्लब में आयोजित किये गये पब्लिक ट्रिब्यूनल में बोल रहे थे. यहां मलिक जैसे 30 दंगा पीड़ित अपनी आपबीती सुनाने के लिए जुटे हुए थे.

घटना वाले दिन का जिक्र करते हुए हाजी मलिक कहते हैं-

“मैंने माहौल खराब होने के बाद भी 23 तारीख को दिन भर दुकान खोली थी लेकिन 24 को हालात ज्यादा खराब होने के काराण दुकान नहीं खोल पाया. थोड़ी देर बाद मोहल्ले के लोगों ने खबर दी कि दुकान में लूटपाट कर आग लगा दी गयी है. खबर सुनकर नमाज़ पढ़ रही उनकी पत्नी बेहोश हो गईं.”

अजमेरी के हाथ से रोजगार गया तो शिव विहार की रहने वाली रुख़साना के सिर से छत. दंगों को याद करते हुए वे फूट-फूट कर रोने लगती हैं. आंसुओं से सनी आवाज़ में कहती हैं-

“मेरे घर में दो एलपीजी सिलेंडर फोड़े गए. पूरे घर में आग लग गयी. हम लोग ऊपर वाली मंजिल पर थे. जैसे-तैसे जान बच पायी. नीचे की मंजिल पर जो था, सब राख हो गया. आग इतनी भयंकर थी कि दीवारों का पुराना रंग पहचानना मुश्किल हो गया है.”

ओल्ड मुस्तफाबाद इलाके के 25 फुटा रोड तिराहे पर अलहिंद नाम से एक छोटा सा क्लिनिक चलाने वाले डाक्टर एम. अनवर बताते हैं कि उनके अस्पताल में 24 तारीख की रात से पीड़ितों के आने सिलसिला शुरू हुआ जो अगले तीन दिनों तक चलता रहा. इन तीन दिनों में उनके अस्पताल में करीब 400 घायलों का इलाज किया गया. अनवर का दावा है कि उनके अस्पताल में भर्ती हुए ज्यादातर लोग गोली, पत्थर और चाकूबाज़ी के शिकार थे.

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