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अमीरों-नेताओं के चुनावी बॉन्ड की छपाई और बैंक कमीशन का ख़र्च करदाता उठा रहा: आरटीआई

-द वायर, 

 देश के विभिन्न वर्गों द्वारा चुनावी बॉन्ड पर सवाल उठाए जाने और सुप्रीम कोर्ट में इसकी वैधता को चुनौती देने वाली याचिका लंबित होने के बावजूद केंद्र की मोदी सरकार इसकी छपाई जारी रखे हुए है.

आलम ये है कि अब तक में करीब 19,000 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड की छपाई हो चुकी है और कुल 13 चरणों में 6200 करोड़ रुपये से ज्यादा के चुनावी बॉन्ड की बिक्री हो चुकी है. सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत दायर किये एक आवेदन के जरिये इसका खुलासा हुआ है.

दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि चुनावी बॉन्ड को छापने में जो खर्च आता है उसकी भरपाई बॉन्ड का खरीददार नहीं, बल्कि सरकार कर रही है. अप्रत्यक्ष रूप से जनता की जेब से इस खर्च का भुगतान किया जा रहा है.

एक चुनावी बॉन्ड को छापने 25 रुपये का खर्च आता है और इस पर छह फीसदी केंद्र एवं छह फीसदी राज्य जीएसटी भी लगता है.

इसके अलावा चुनावी बॉन्ड को खरीदने और इसे भुनाने के लिये बैंक का जो भी कमीशन बनता है, उसकी भरपाई भी करदाताओं के पैसों से किया जा रहा है.

आरटीआई कार्यकर्ता कोमोडोर लोकश बत्रा (रिटायर्ड) द्वारा दायर किये गए आवेदन के तहत भारतीय स्टेट बैंक ने बताया है कि वर्ष 2018 में कुल 7131.50 करोड़ रुपये के 6,042,50 चुनावी बॉन्ड की छपाई हुई थी. वहीं वर्ष 2019 में 11,400.00 करोड़ रुपये के 60,000 चुनावी बॉन्ड को छापा गया.

इन बॉन्ड्स की छपाई महाराष्ट्र के नासिक में इंडियन सिक्योरिटी प्रेस (आईएसपी नासिक) में होती है. प्राप्त दस्तावेजों से पता चलता है कि अब तक एक हजार रुपये के 256,000 बॉन्ड्स, दस हजार रुपये के 256,000 बॉन्ड्स, एक लाख रुपये के 93,000 बॉन्ड्स, 10 लाख रुपये के 26,600 बॉन्ड्स और एक करोड़ रुपये के 14,650 बॉन्ड्स की छपाई हो चुकी है.

इन 664,250 चुनावी बॉन्ड को छापने में कुल 1.86 करोड़ रुपये का खर्च आया है, जिसकी भरपाई केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग को करनी होती है यानी करदाताओं के पैसे से खर्च उठाया जा रहा है. ये राशि न तो बॉन्ड के खरीददार से वसूली जाती है और न ही राजनीति दल ये खर्च उठाते हैं.

एसबीआई के उप महाप्रबंधक एवं केंद्रीय जन सूचना अधिकारी नरेश कुमार रहेजा द्वारा दिए गए जवाब के मुताबिक अब तक में कुल 13 चरणों में 6210.40 करोड़ रुपये के 12,452 चुनावी बॉन्ड की बिक्री की गई है, जिसमें से सबसे ज्यादा 91.81 फीसदी राशि के एक करोड़ रुपये वाले चुनावी बॉन्ड बेचे गए हैं.

बाकी के 7.91 फीसदी राशि के दस लाख रुपये वाले चुनावी बॉन्डों की बिक्री हुई. एक हजार और दस हजार के चुनावी बॉन्ड की बिक्री नाममात्र ही है.

एसबीआई से प्राप्त दस्तावेज के मुताबिक अब तक में एक करोड़ रुपये के 5702 बॉन्ड, दस रुपये के 4911 बॉन्ड, एक लाख रुपये के 1722 बॉन्ड, दस हजार के 70 बॉन्ड और एक हजार के 47 बॉन्ड बेचे गए हैं.

कम राशि वाले चुनावी बॉन्ड की छपाई से करदाताओं पर बेवजह का बोझ
उपर्युक्त आंकड़ों से ये स्पष्ट है कि एक हजार और 10 रुपये के चुनावी बॉन्ड की बिक्री बहुत ही ज्यादा कम हुई है. हर एक बॉन्ड को छापने में जितना खर्चा आता है उसकी भरपाई केंद्र सरकार करती है. इसलिये इसे इस रूप में देखा जा रहा है कि सरकार कम राशि के चुनावी बॉन्ड की छपाई कर करदाताओं के पैसे की बर्बादी कर रही है.

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