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कुरदती आपदाओं से मौत में बिहार अव्वल, आपदाओं पर केंद्र बना कंजूस

-इंडिया टूडे,

देश में 2019 में प्राकृतिक आपदाओं की 19 घटनाएं हुईं और उनमें कुल 1500 से अधिक लोगों की मौत हुई. इन मौतों में से करीब 63 फीसद मौतें भारी बरसात और बाढ़ आने की वजह से हुई हैं. भारत के पर्यावरण पर सेंटर फॉर साइंस ऐंड एनवायर्नमेंट की 2020 की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है.

4 जून को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राकृतिक आपदाओं में सबसे अधिक जानें गई हैं.

लेकिन कुदरती आपदाओं की संख्या भले ही जलवायु परिवर्तन या अन्य कारणों से बढ़ गई हों, पर केंद्र सरकार ने इससे निपटने के लिए जारी किए गए आवंटन में कंजूसी बरतनी शुरू कर दी है. केंद्र ने 2018-19 के मुकाबले 2019-20 में बजट आवंटन में करीब 8,353 करोड़ की कमी कर दी है.

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) के आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि बिहार में पिछले साल भारी बारिश और बाढ़ की वजह से 306 लोगों की जानें गईं, जबकि बिजली गिरने से 71 लोगों ने जान गंवा दी. यही नहीं, हीट वेव (लू) की चपेट में आने से 292 लोग मारे गए.

बिजली गिरने की घटना झारखंड में अधिक लोगों की जान लेकर गई.

रिपोर्ट में मुताबिक, झारखंड में 125 लोगों की जान आकाशीय बिजली से गई है. अपेक्षाकृत रूप से लू का प्रकोप वहां कम रहा और उसके शिकार 13 लोग हुए.

कुदरती आपदा से शिकार होने वालों में महाराष्ट्र भी शामिल है, जहां 136 लोग बाढ़ और भारी बरसात की वजह से मारे गए. लू की वजह से मरने वाले लोगों की संख्या 51 रही.

असल में जलवायु परिवर्तन ने अपना असर लोगों की जीवन शैली के साथ-साथ जीवन पर भी डालना शुरू कर दिया है. आइएमडी के मुताबिक, 2013 से 2019 के बीच हीट वेव के दिनों की संख्या में करीब 70 फीसद की बढोतरी हुई है. सीएसई की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले इन 6 सालों में 5300 से अधिक लोग लू (हीट वेव) की चपेट में आकर मारे गए हैं.

2017 से 2018 के बीच शीतलहर में भी 69 फीसद की बढोतरी हुई है. 2018 में शीतलहर का प्रकोप अधिक रहा और उसकी वजह से 279 लोगों की मौत हुई है.

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