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महाराष्ट्र: उस्मानाबाद में पानी से लबालब बांध देखकर किसानों ने खेती में लगाए लाखों रुपए, अब खेत में सूख रही फसल

-गांव कनेक्शन,

अपने पास गांव के पास के डैम को पानी से भरा देखकर युवा किसान देवराव नलावडे करीब 2 लाख रुपए खर्चकर जलगांव के केले की पौध लाए थे। बांध से खेत तक पाइप लाइन बिछाई थी। लेकिन इससे पहले की उनके खेत में केले की रोपाई हो पाती। निचले इलाके के गांवों को खतरे से बचाने के लिए नाले के एक हिस्से को काटकर छोड़ दिया गया। पानी नदी में बह गया और पाइप लाइन में पानी का इंतजार रहे देवराव के खेत की पौध रखी रखी सूख रही है।

देवराव नलावडे (34 वर्ष) गांव कनेक्शन को बताते हैं, "वैसे तो हमारा इलाका (मराठवाड़ा) अक्सर सूखा ही रहता है। इस बार करीब 5 साल बाद पानी भरा तो हमने केले की खेती करने की सोंची। 400 किलोमीटर जलगांव से पौध लाए, बांध से खेत तक 2 किलोमीटर से ज्यादा अपनी पाइप लाइन बिछाई। इन सबमे करीब 4 लाख रुपए खर्च हुए। लेकिन जब रोपाई करने का नंबर आया तो बांध की एक हिस्से को पानी निकाल दिया गया। हम किसानों को पानी नहीं मिल रहा है।"

मराठवाड़ा में ज्यादातर सूखा रहता है इस बार अच्छी बारिश होने से किसान खुश थे। डैम में भी पानी था तो कोई किसान लाखों रुपए खर्च कर केले की पौध लाया कोई अमरूद की। क्योंकि सबको लगता था पानी है तो सिंचाई वाली खेती करेंगे आमदनी होगी लेकिन बांध का पानी छोटे जाने से सब बर्बाद हो गया। देवराज नलावडे, किसान वैसे तो हमारा इलाका (मराठवाड़ा) अक्सर सूखा ही रहता है। इस बार करीब 5 साल बाद पानी भरा तो हमने केले की खेती करने की सोंची। 400 किलोमीटर जलगांव से पौध लाए, बांध से खेत तक 2 किलोमीटर से ज्यादा अपनी पाइप लाइन बिछाई। इन सबमे करीब 4 लाख रुपए खर्च हुए। लेकिन जब रोपाई करने का नंबर आया तो बांध की एक हिस्से को पानी निकाल दिया गया। हम किसानों को पानी नहीं मिल रहा है।" सूखे मराठवाड़ा में इस साल जोरदार बारिश हुई है।

ज्यादातर जल परियोजनाएं, मिनी डैम, तालाब पानी से लबालब हैं। महाराष्ट्र के उस्मानाबाद में भी सितंबर में ही ज्यादातर तालाब भर गए थे। मुंबई से करीब 350 किलोमीटर दूर उस्मानाबाद जिले के परंडा तालुका के खंडेश्वरी गांव 10 लाख मिलियन क्यूबिक पानी भंडारण क्षमता वाली खंडेश्वरी मध्यम परियोजना है। करीब 40 साल पुराने इस मिनी डैम में 5 साल बाद भरपूर पानी भरा था। अच्छी बारिश के चलते 20 सितंबर को डैम पूरी तरह भर गया था।

खंडेश्वरवाडी समेत 16 गांव पानी के लिए इस डैम पर सीधे तौर पर निर्भर हैं। डैम भरा देखकर किसानों ने सिंचाई पर आधारित फसलों पर जोर दिया। कोई जलगांव से केले लाया तो कोई किसान विशाखापट्टनम से अरुमद की पौध तो कई किसानों ने सब्जियों की खेती शुरु की थी। लेकिन 27 सितंबर को इस डैम का एक बाजू (हिस्सा) दरकने लगा जिसके बाद अनहोनी के डर से सिंचाई विभाग ने खुद ही डैम को काटकर पानी निकाल दिया। डैम से पानी छोड़े जाने से अऩहोनी का खतरा तो टल गया लेकिन खंडेश्वरवाड़ी समेत कई गांवों में किसानों की फसलों पर संकट मंडराने लगा है।

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