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हरियाणा: मुख्यमंत्री ने कोविड फंड से क़रीब 3 करोड़ के पतंजलि उत्पादों की खरीद को मंज़ूरी दी

-द वायर, 

जीवन और स्वतंत्रता खंड के तहत दायर सूचना का अधिकार अधिनियम के एक आवेदन से पता चला है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 17 मई को तीन पतंजलि दवाओं की खरीद को मंजूरी दी थी, जिसकी कीमत 2,72,50,000 रुपये है, जिसमें विवादास्पद कोरोनिल भी शामिल है.

इसके अगले ही दिन एक खरीद आदेश भी जारी किया गया था. हालांकि, सरकार ने यह बताने से इनकार कर दिया कि इसमें कोई टेंडर प्रक्रिया शामिल है या नहीं.

हरियाणा के वकील प्रदीप रापड़िया के आवेदन में आदेश पर विवरण मांगा गया था क्योंकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने चिंता जताई थी कि कोविड-19 के लिए अस्वीकृत दवाओं का उपयोग करने से मृत्यु दर में वृद्धि हो सकती है.

इस सवाल को पूछने की आवश्यकता पर केंद्रीय सूचना आयोग और राष्ट्रीय जांच एजेंसी के साथ कानून अधिकारी के रूप में काम कर चुके रापड़िया ने कहा, ‘आईएमए के बयान के अनुसार, कोरोनिल कोविड के इलाज और निर्भरता के लिए एक सिद्ध दवा नहीं है. इससे मृत्यु दर में वृद्धि हो सकती है. जैसे कई अन्य टॉनिक की तरह कोरोनिल भी केवल एक इम्युनिटी बूस्टर टॉनिक हो सकता है.’

इस तरह के एक आदेश के लिए उचित निविदा की आवश्यकता पर उन्होंने कहा, ‘तो सरकार को एक उचित निविदा प्रक्रिया अपनानी चाहिए और विक्रेता से सबसे उचित दर पर टॉनिक खरीदना चाहिए. टेंडर प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, यह आरटीआई के जवाब से ही पता चलेगा.’

दवा की प्रभावशीलता और निविदा प्रक्रिया की नहीं दी जानकारी

रापड़िया ने 25 मई को हरियाणा के आयुष महानिदेशक के पास आरटीआई अधिनियम के जीवन और स्वतंत्रता खंड के तहत एक आरटीआई आवेदन दायर किया, जिसमें सार्वजनिक सूचना अधिकारी को 48 घंटों के भीतर जवाब देना होता है. हालांकि, सरकार ने उनके आवेदन पर उनके सभी सवालों का जवाब नहीं दिया.

सरकार ने कोरोनिल पर अपने कुल खर्च का खुलासा किया, लेकिन उसने कोविड-19 से निपटने में दवा की प्रभावशीलता के प्रमाण की प्रति या इसकी खरीद के लिए पतंजलि के साथ इसके समझौते के हिस्से को साझा करने से परहेज किया.

सरकार ने मामले में अपीलीय प्राधिकारी के निर्देशों के बावजूद आदेश के लिए निविदा की एक प्रति भी साझा नहीं की है.

आयुष के संयुक्त निदेशक ने अपने 10 जून के आदेश में स्पष्ट रूप से एनएएस शाखा के प्रभारी को एक दिन के भीतर संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था लेकिन आदेश का पालन नहीं किया गया है.

‘मुख्यमंत्री ने कोरोनिल की खरीद को मंजूरी दी’

आरटीआई आवेदन के जवाब में डीजी, आयुष हरियाणा से हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को 18 मई के एक पत्र की एक प्रति प्रदान की गई, जिसमें मेसर्स दिव्य फार्मेसी से एमआरपी पर 50 फीसदी की छूट पर आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल किट की खरीद का उल्लेख किया गया था और कहा कि यह आपको सूचित करने के लिए है कि माननीय मुख्यमंत्री ने आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल की खरीद के मामले को मंजूरी दे दी है.

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