Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/has-crop-insurance-helped-indian-farmers-most-do-not-even-get-paid-on-time.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | क्या फसल बीमा से भारतीय किसानों को मदद मिली है? अधिकांश को समय पर भुगतान भी नहीं मिलता | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

क्या फसल बीमा से भारतीय किसानों को मदद मिली है? अधिकांश को समय पर भुगतान भी नहीं मिलता

-द प्रिंट,

हर तरह के व्यवसाय में जोखिम उठाना शामिल होता है, लेकिन भारत में सिंचाई की कम उपलब्धता को देखते हुए खेती स्वाभाविक रूप से अधिक जोखिम भरा हो जाता है, क्योंकि यह इसे मौसमी परिस्थितियों में बदलाव, खास तौर पर बारिश जो या तो सूखे या फिर बाढ़ का कारण बनती है, के प्रति बहुत संवेदनशील बनाती है. 2015-16 में केवल 49 प्रतिशत कृषि भूमि ही सिंचाई के अधीन थी और इसमें भी फसलों के हिसाब से व्यापक भिन्नता थी.

फसल में होने वाले रोगों के कारण उत्पादन का नुकसान और साथ ही कृषि उत्पादन की कीमतों में अस्थिरता भी काफी अधिक बनी हुई है, जिसके परिणामस्वरूप कृषि आय में लगातार बदलाव (उतार-चढ़ाव) होता रहता है. खेती से जुड़े जोखिमों का सामना करने के लिए एक तरीका फसल बीमा लेना भी है.

हाल ही में भारत के कुछ हिस्सों में बेमौसम भारी बारिश कई सारी मौतों और भारी विनाश का कारण बन रही है.

हालांकि, कुल मिलाकर एक राष्ट्र के रूप में हम पिछले तीन वर्षों से मानसून के मामले में भाग्यशाली रहे हैं. दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून-सितंबर के दौरान) का लगातार तीन साल तक सामान्य होना एक दुर्लभ घटना है. इस साल वर्षा के मौसम में होने वाली बारिश सामान्य रही है जबकि पिछले दो वर्षों में यह सामान्य से अधिक रही है. कोविड महामारी के कारण गैर-कृषि अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई, फिर भी कृषि क्षेत्र ने 3.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को और भी अधिक गर्त में जाने से बचाया.

पिछली बार सामान्य से कम दक्षिण-पश्चिम मानसून 2018 में देखा गया था, जब यह लंबी अवधि के औसत से 9 प्रतिशत कम था. हाल ही में जारी आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई से दिसंबर 2018 तक 40 प्रतिशत से अधिक किसानों को कई फसलों में नुकसान हुआ. अधिकांश मामलों में, इसका प्राथमिक/मुख्य कारण कम वर्षा या सूखा था, जिसके बाद फसल की बीमारी का नंबर था.

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.