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तालाबंदी से खुला अनचाहे गर्भ का रास्ता!

-इंडिया टूडे,

मुरादाबाद के हरपाल नगर चौराहे पर होप हॉस्पिटल ऐंड मैटरनिटी सेंटर में डॉ. शाजिया मोनिस ऑपरेशन थिएटर से मुस्कराते हुए निकलती हैं और बताती हैं, ‘‘आज तीन दिन बाद एक डिलिवरी हुई है.'' लॉकडाउन से पहले इस मैटरनिटी सेंटर में हर रोज तीन-चार डिलिवरी होती थी और लगभग इतना ही लीगल एबोर्शन या गर्भपात के मामले होते थे. लेकिन लॉकडाउन के बाद अचानक जच्चा-बच्चा के मामले आने कम हो गए. नियमित रूप से दिखाने वाली गर्भवती महिलाएं भी नहीं आ पा रही हैं और गर्भधारण करने वाले नए मामले तो बहुत नगण्य हैं. दरअसल, लॉकडाउन के दौरान सरकार ने आपातकाल सेवाओं को छोड़कर लगभग सभी तरह की स्वास्थ्य सेवाओं पर रोक लगा दी. ऐसे में परिवार नियोजन सेवाओं पर भी तकरीबन तालाबंदी ही है. नतीजतन, अनचाहे गर्भ और असुरक्षित गर्भपात जैसे मामलो के बढ़ने का अंदेशा बढ़ गया है.

कम हुई गर्भनिरोधकों की खपत

लॉकडाउन के दौरान हालांकि दवाई की दुकानें खुली हुई हैं लेकिन लोग केवल बेहद जरूरी काम से बाहर निकल सकते हैं. देश में गर्भनिरोधक खरीदने जाना अब भी वर्जना का विषय माना जाता है. दिल्ली के कई बड़े अस्पतालों में कंसल्टेंट गायनीकोलॉजिस्ट और फेम केयर क्लिनिक की डॉ. पूजा राणा कहती हैं, ‘‘अक्सर लोगों के घर में बड़े-बुजुर्ग रहते हैं और लॉकडाउन के दौरान बाहर निकलने का एक जायज बहाना होना चाहिए. कई युगल के पास लॉकडाउन के दौरान सुरक्षित यौन संबंध का कोई विकल्प नहीं होगा. ऐसे में अनचाहे गर्भ के मामले बढ़ सकते हैं.'' उनका अंदेशा सही लगता है. फाउंडेशन फॉर रिप्रोडक्टिव हेल्थ सर्विसेज (एफआरएचएस), इंडिया ने पूर्व (2017, 2018 और 2019) के आंकड़ों और गर्भ न ठहरने के लिए बाजार में मौजूद कॉन्ट्रासेप्टिव और आइयूसीडी (इंट्रा यूट्रीनल कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस) की बिक्री के आंकड़ों के आधार पर एक विश्लेषण किया तो पाया कि लॉकडाउन की वजह से परिवार नियोजन जैसी योजना को एक बड़ा झटका लगने का अंदेशा है. अध्ययन के दौरान सामने आए नतीजों के मुताबिक 23 लाख अनचाहे गर्भधारण किए जाने, 6.79 लाख बच्चों के जन्म लेने, 14.5 लाख गर्भपात (इसमें असुरक्षित गर्भपात भी शामिल हैं) और 1,743 माताओं की मृत्यु का अनुमान है.

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