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स्कूली बच्चों को कोरोनावायरस से बचाने के लिए अनिवार्य हो मास्क

-डाउन टू अर्थ,

कोरोनावायरस की मार कहने के लिए तो पूरी दुनिया पर पड़ी है लेकिन इनमें से सबसे अधिक संवेदनशील तबका बच्चों का है। यूनीसेफ की यदि रिपोर्ट में आंकड़ों पर नजर डालें तो पाएंगे कि पूरी दुनिया में सबसे अधिक कोरोना वायरस की मार बच्चों पर ही पड़ी है।

इसके अनुसार पूरी दुनिया में 1.8 अरब बच्चे किसी न किसी रूप से प्रभावित हुए हैं। अब जबकि भारत सहित दुनियाभर के कई देशों में स्कूल-कॉलेज खोल दिए गए हैं। ऐसे में यह एक बड़ा सवाल उठता है कि कोरोना वायरस से उनकी सुरक्षा के क्या प्रबंध किए गए हैं? और क्या सरकारों द्वारा किए गए सुरक्षा प्रबंध पर्याप्त हैं? क्योंकि अब तक 12 साल से नीचे के बच्चों के लिए कोई वैक्सीन नहीं बनी है। 


स्कूलों में सुरक्षा से जुड़े इस सवाल पर न्यूयार्क टाइम्स ने एक अध्ययन किया। उसमें इस बात का पता लगाया गया कि मास्क पहनने और नहीं पहनने से वायरस के बढ़ने की संभावना कितनी होती है? अध्ययन में यह बात निकलकर आई है कि कोरोना वायरस से बचने के लिए बच्चों के लिए मास्क ही सबसे आसान और कारगर तरीका है।

7,000 से अधिक बच्चों व व्यस्कों पर यह अध्ययन किया गया। ये सभी लोग एक स्कूलों में कोरोना वायरस से संक्रमित थे। अध्ययन में पाया गया कि इन लोगों के निकट संपर्क में आने के कारण 40,000 से अधिक लोगों को क्वारटाइन में रहना पड़ा।

अध्ययन के दौरान किए गए परीक्षण से पता चला कि इनमें से केवल 363 बच्चे और वयस्क ही सीधे तौर पर कोरोनावायरस से संक्रमित हुए। संचरण की यह कम दर स्कूलों में लगातार मास्क पहनने के कारण संभव हुई। संक्रमित व्यक्ति और करीबी संपर्क वाले दोनों ने मास्क पहना था। इसके अलावा स्कूल ने कोरोना वायरस के लिए लगातार परीक्षण की व्यवस्था की हुई थी और स्कूल के वेंटिलेशन सिस्टम में बड़े पैमाने पर खर्च किया गया था।  

अध्ययन में पता चला कि जब स्कूलों ने मास्क की अनिवार्यता लागू की, तब कोरोनोवायरस की स्कूल में संचरण दर कम थी। इसके विपरीत इजराइल में एक स्कूल में बिना मास्क और उचित सामाजिक दूर के कारण कोरोना वायरस अधिक तेजी से फैला।

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