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'पूरे परिवार की जिम्मेदारी है, दोबारा फिर नौकरी चली गई है, अब बस भगवान का ही भरोसा है'

-गांव कनेक्शन,

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए देश के ज्यादातर राज्यों में लॉकडाउन लगा है, कहीं आंशिक तो कहीं पूरी तरह से। ज्यादातर राज्य सरकारों ने कुछ शर्तों के साथ उद्योग-धंधों को काम जारी रखने में ढील दी है, बावजूद इसके लोगों की नौकरियां जा रही हैं। छोटे-मोटे कारोबार बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं। कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा कि अप्रैल 2021 में ही लाखों लोगों की नौकरी चली गयी। इस विषय पर हमने कुछ ऐसे लोगों से बात की जिनकी नौकरी इस विपदा की घड़ी में छूट गई या व्यापार बंद हो गया। उन्होंने क्या कहा, उन्हीं की जुबानी सुनिए- यूपी के जिला मऊ के कोपागंच के गौरव चौरसिया (24) ने बीकॉम के बाद अकाउंटेंट की नौकरी हासिल की थी, लेकिन मार्च के आखिर में उन्हें काम करने के लिए मना कर दिया गया।

गौरव कहते हैं, "निजी कंपनी में एकाउंटिंग का काम करता था। मार्च के दूसरे सप्ताह में घर से काम करने को कहा सया। फिर महीने के आखिरी में बोला कि अब काम नहीं करना है। 12 हजार रुपये महीना मिलता था, पिता जी नहीं हैं। घर पर मां-मौसी रहती हैं। जमीन जायदाद कुछ नहीं है। मौसी की दवा चलती है। 30 कैप्सूल वाली जो 110 रुपए में मिलते थे, वह अब 150 के हो गए हैं। पिछले साल तो नौकरी गंवाने वालों की खूब बात होती थी, लेकिन इस बार तो कोई पूछ ही नहीं है।"

राजस्थान के जिले झुंझुनू के ओजीटू गांव के रोहित चौधरी (30) पेशे से इंजीनियर हैं और एमटेक किया है। पिछले साल लॉकडाउन में नौकरी गंवा चुके रोहित की किस्मत ने फिर धोखा दिया और इस साल दोबारा नौकरी से हाथ धोना पड़ा। रोहित बताते हैं, "मेरी नौकरी तो पिछले साल लॉकडाउन में ही चली गयी थी। हालत कुछ सही हुए तो कॉलेज खुला। 11 जुलाई 2019 को सूरजगढ़ के एक इंजिनयरिंग कॉलेज में बतौर अस्सिटेंट इंजिनियर नौकरी की शुरुआत की थी। पिछले साल पिता जी बीमार हुए थे। डॉक्टर ने उन्हें टीबी बताया था। इलाज के बाद भी उन्हें बचा नहीं पाया। इलाज में सारी पूंजी चली गई।" "दोबारा कॉलेज जाना शुरू किया, लेकिन 23 मार्च को आने से मना कर दिया गया। इस साल तो सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है। मेरे ऊपर घर के 5 लोगों की जिम्मेदारी है। खर्च कैसे चलेगा, पता नहीं। बस उम्मीद है की सब ठीक हो जाएगा।" वे आगे कहते हैं। ऐसा नहीं कि इस दौरान बस लोगों की नौकरी ही गई है। लघु या सूक्ष्म उद्योग से जुड़े लोगों का भी व्यवसाय चौपट हो गया है।

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