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क्या मोदी सरकार के आर्थिक पैकेज में बैठ चुकी अर्थव्यवस्था को खड़ा करने का दम है?

-सत्याग्रह,

मोदी सरकार ने 20 लाख करोड़ रु के आर्थिक पैकेज से जुड़ी घोषणाओं का ब्योरा निपटाया ही था कि चर्चित अंतरराष्ट्रीय एजेंसी गोल्डमैन सैक्स बुरी खबर लेकर आ गई है. उसका कहना है कि भारत अब तक की सबसे बड़ी मंदी का सामना करने वाला है. गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि इस वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर में पांच फीसदी की गिरावट आएगी.

गोल्डमैन सैक्स ने अपने अनुमान में मोदी सरकार के आर्थिक पैकेज का भी जिक्र किया है. उसका कहना है कि इससे अर्थव्यवस्था पर तुरंत कोई प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है. संस्था का तर्क है कि आर्थिक पैकेज में मौजूद घोषणाओं का एक बहुत बड़ा हिस्सा राहत से ज्यादा सुधारों पर केंद्रित है. इनका असर लंबी अवधि में दिखता है.

12 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया था कि सरकार आर्थिक पैकेज के रूप में जीडीपी के 10 फीसदी के बराबर की रकम खर्च करने जा रही है. इसे उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान नाम दिया था. इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस आर्थिक पैकेज का ब्योरा देने में जुट गईं. इस कवायद के तहत 13 मई को अपनी पहली प्रेस वार्ता में उन्होंने 5.94 लाख करोड़ रुपए के ऐलान किये. इनमें मुख्य जोर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम स्तर के उद्योगों (एमएसएमई) पर था. मसलन सरकार ने एमएसएमई के लिए तीन लाख करोड़ रु के कर्ज की घोषणा की. उन्होंने कहा कि यह कर्ज कोलैटरल फ्री होगा यानी इसके लिए किसी गारंटी या कुछ गिरवी रखने की जरूरत नहीं होगी.

वित्त मंत्री ने दूसरे दिन यानी 14 मई को 3.10 लाख करोड़ रूपए की घोषणाएं कीं. इनके केंद्र में प्रवासी मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता, मध्य वर्ग के लोग और छोटे किसान थे. एक दिन बाद निर्मला सीतारमण ने 1.5 लाख करोड़ रुपए का ब्योरा दिया जिसमें मुख्य तौर पर खेती के बुनियादी ढांचे को ठीक करने और खेती से जुड़े क्षेत्रों के लिए खर्च करने की बात थी. 16 और 17 मई को उन्होंने कोयला खनन से लेकर अंतरिक्ष तक कई क्षेत्रों में प्रस्तावित बुनियादी सुधारों की जानकारी दी. राज्यों को अतिरिक्त मदद देने की भी घोषणा की गई. बताया गया कि इन कदमों पर 48,100 करोड़ रु खर्च होंगे. इन सभी को मिला दें तो करीब 11 लाख करोड़ रुपये हो जाते हैं.

बाकी के नौ लाख रुपयों के बारे में वित्त मंत्री ने यह बताया कि सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 मई के ऐलान से पहले ही राहत पैकेज शुरू कर दिया था. उनके मुताबिक इसके तहत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के लिए 1,92,800 करोड़ रुपए के खर्च की योजना बनाई गई थी. इसके अलावा उनका कहना था कि बीते कुछ महीनों में रिजर्व बैंक ने भी करीब आठ लाख करोड़ रुपए के ऐलान किए हैं. मोदी सरकार के मुताबिक अगर इन सभी राशियों को मिला दें तो आत्मनिर्भर भारत पैकेज पर कुल 20,97,053 करोड़ रुपए खर्च होने जा रहा है.

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