Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/most-children-of-valmiki-community-leave-school-due-to-untouchability-and-humiliation.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | छुआछूत और अपमान की वजह से स्कूल छोड़ देते हैं वाल्मीकि समुदाय के ज़्यादातर बच्चे | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

छुआछूत और अपमान की वजह से स्कूल छोड़ देते हैं वाल्मीकि समुदाय के ज़्यादातर बच्चे

-गांव कनेक्शन, 

रिया के दिन स्कूल में बहुत थोड़े लेकिन दर्द भरे थे। उसे छह साल की उम्र में स्कूल में दाखिला तो मिल गया था मगर उसे बाकी बच्चों से अलग बैठाया जाता था। उसे स्कूल में बैठने के लिए अपने घर से एक ख़ाली बोरी लानी होती थी और उसे ज़मीन पर बिछाकर उसी पर बैठना होता था। रिया के साथ छुआछूत इतनी ज़्यादा थी कि उसे कुछ ही दिन बाद स्कूल छोड़ देना पड़ा। रिया अब 14 साल की हो चुकी है मगर स्कूल के उन चंद दिनों के दौरान उसके साथ हुआ छुआछूत वाला बर्ताव वो आज तक नहीं भूल पाई हैं। "हमें दूसरे बच्चों से दूर बैठाया जाता था। अगर कोई अक्षर हमें लिखना नहीं आ रहा होता तो मास्टर जी हाथ पकड़कर नहीं लिखवाते थे, वो भी हमसे छुआछूत मानते थे। ये सब हमें बहुत बुरा लगता था, हमने स्कूल जाना ही छोड़ दिया,"

स्कूल के दिनों की बातें याद करते हुए रिया रुआंसी हो जाती है। रिया यूपी के जालौन जिला मुख्यालय से लगभग 17 किलोमीटर दूर कदौरा के संदी गाँव में रहती हैं। स्कूल में रिया के साथ छुआछूत की वजह उनका वाल्मीकि समुदाय से होना था। रिया अकेली नहीं हैं जिन्हें छुआछूत की वजह से स्कूल छोड़ देना पड़ा। गांव में कुल पांच वाल्मीकि परिवार रहते हैं। रिया के घर के आस-पास जितने भी बच्चे वाल्मीकि परिवारों से हैं उनमें से कोई भी आठवीं की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाया है। ज़्यादातर बच्चे पांचवीं तक भी नहीं पढ़ पाए हैं। स्कूलों में होने वाले जातिगत भेदभाव की वजह से वाल्मीकि समाज के ज़्यादतर बच्चे स्कूल जाने से कतराते हैं। रिया की ही तरह उत्तर प्रदेश के जालौन ज़िले के कदौरा ब्लॉक के संदी, मरगायां और चमारी गाँव के लगभग 25 बच्चों ने गाँव कनेक्शन की रिपोर्टर को स्कूलों में अपने साथ हुई छुआछूत की घटनाओं को साझा किया।

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.