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एक दिन रिया चक्रवर्ती के घर के बाहर: बार-बार उठी टेलीविज़न पत्रकारिता की अर्थी

-न्यूजलॉन्ड्री,

सुबह तकरीबन 9.15 बजे हम मुम्बई के जुहू तारा रोड पर स्थित प्रिमरोज़ बिल्डिंग पहुंचे थे. इस इमारत के एक फ्लैट में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती अपने परिवार के साथ रहती हैं. मुंबई की अलसायी सुबह में भी इमारत के बाहर कुछ रिपोर्टर और कैमरामैन उस समय पहुंच चुके थे. इनमें सबसे प्रमुख था रिपब्लिक भारत. कुछ ओबी वैन भी मौजूद थे.

टीवी-9 मराठी के एक पत्रकार ने 'पीस टू कैमरा' (पीटूसी) करने के पहले पास में खड़े आज तक के रिपोर्टर से कन्फर्म किया कि रिया चक्रवर्ती यहीं रहती है ना? हामी भरने के बाद उसने अपना पीटूसी किया.

वहां मौजूद आजतक-इंडिया टुडे के एक रिपोर्टर से मैंने बातचीत शुरू की ही थी कि तभी सड़क से गुज़रती एक कार रुकी, गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति ने हमारी तरफ देखकर खिल्ली उड़ाने के अंदाज में ताली बजायी और आगे निकल गया. यह देख आजतक का रिपोर्टर बोला, "आजकल पत्रकारों की इज़्ज़त ही नहीं बची है. रिपब्लिक वालों ने मीडिया की पूरी इज़्ज़त उतार दी है. थोड़ा बहुत ड्रामा चलता है लेकिन इन लोगों ने हद कर दिया है. इनकी वजह से बाकी रिपोर्टरों पर भी बहुत दबाव आ गया है."

वहां मौजूद एक कैमरापर्सन बोल पड़ा, "अस्सी प्रतिशत खबरें झूठी हैं. रिया का फ्लैट इस इमारत के पिछली तरफ है लेकिन उसके बावजूद भी रिपब्लिक वाले यहीं से पीटूसी देते हुए कहते कि पीछे रिया का किचन दिख रहा है.”

अगले कुछ घंटों में मैं खुद इसी तमाशे से रूबरू हुआ.

रिपब्लिक टीवी के रिपोर्टर वहां अपनी हरकतों से पत्रकारिता के हर नियम-कानून की धज्जी उड़ा रहे थे. लेकिन बाकी चैनलों की गतिविधियां भी उनसे होड़ कर रही थीं. इस सबके लिए बस एक ही शब्द है ‘शर्मिंदगी’.

दस बजते-बजते वहां पत्रकारों की तादाद बढ़ गई थी. रिपब्लिक भारत की एक रिपोर्टर पीटूसी करते हुए कह रही थीं- “रिया चक्रवर्ती चुनिंदा चैनलों से ही बात करती हैं. क्या उन्हें रिपब्लिक भारत से डर लगता है.” इसी समय प्रिमरोज़ इमारत से बाहर निकल रहे एक व्यक्ति की तरफ अपने कैमरापर्सन को कैमरा घुमाने का इशारा कर वो ऊंची आवाज में बोलने लगी, "यह रिया चक्रवर्ती का इन्फॉर्मर है." उनकी बात को नज़रअंदाज़ करते हुए वो व्यक्ति आगे चला गया.

वह व्यक्ति उसी बिल्डिंग में काम करने वाला वॉचमैन था जिसका नाम राम है. राम उस दिन कई बार रिपब्लिक टीवी के रिपोर्टरों की बदतमीज़ी का शिकार हुए. कुछ की वीडियो भी वायरल हुई. रिपब्लिक की देखादेखी बाकी रिपोर्टर भी उनसे वही बर्ताव कर रहे थे. ऐसा लगा मानों राम पर उनकी मिल्कियत है.

थोड़ी देर बाद जब राम बाहर से एक टैक्सी लेकर लौटे तो रिपब्लिक की रिपोर्टर ने फिर से अपने कैमरापर्सन की तरफ इशारा करते हुए कैमरे का रुख राम की तरफ करने कहा.

कुछ ही देर बाद उसी इमारत में रहने वाले एक बुज़ुर्ग व्यक्ति राम द्वारा लायी गयी टैक्सी में बैठकर बाहर निकले. वह टैक्सी इमारत के फाटक से बाहर निकली ही थी कि वहां मौजूद रिपोर्टरों और कैमरापर्सन ने उस टैक्सी को रोक लिया. टीवी-9, इंडिया न्यूज़, रिपब्लिक भारत, ज़ी न्यूज़ के अलावा और भी कुछ चैनलों के पत्रकारों ने अपने-अपने माइक और कैमरे टैक्सी की पिछली सीट पर बैठे बुज़र्ग की तरफ बढ़ा दिया. पत्रकार उस बुज़ुर्ग को रिया चक्रवर्ती का रिश्तेदार बताकर सवाल करने लगे.

रिपब्लिक भारत की रिपोर्टर ने टैक्सी चालक को तेज़ आवाज़ में धमकाया कि "गाड़ी आगे बढ़नी नहीं चाहिए". यह कह कर उन्होंने माइक गाड़ी के भीतर बैठ बुज़र्ग के मुंह के सामने किया और पूछने लगी कि वह कहां जा रहे हैं. जब उस बुज़ुर्ग ने टैक्सी ड्राइवर को गाड़ी वहां से आगे बढ़ाने के लिए कहा तो रिपब्लिक भारत की रिपोर्टर उस बुज़ुर्ग से कहती है- “नहीं वो (टैक्सी ड्राइवर) कहीं नहीं जाएंगे.” जब उस बुज़ुर्ग ने साफ किया की वह इमारत में रहने वाले एक रहवासी हैं तब जाकर उनको पत्रकारों ने वहां से जाने दिया.

न्यूज़-एक्स की रिपोर्टर जो थोड़ी दूर से यह सब देख रही थी कहती हैं, "रिपब्लिक के पत्रकारों ने सारी हदें पार कर दी हैं. वो व्यक्ति यहां के रहवासी थे, यह सरासर किसी को बेवजह परेशान करने वाली हरकतें है.”

शायद रिपब्लिक के पत्रकारों की रिपोर्टिंग करने के अंदाज़ से वहां कुछ पत्रकार खफा भी थे. लेकिन ऐसा सोचने वालों की तादाद बहुत कम थी.

किसी के पीछे पड़ना, उसका घेराव कर, उसके मुंह की तरफ माइक बढ़ाकर ज़बरदस्ती अपने सवालों का जवाब लेने में हर रिपोर्टर एक दूसरे से आगे थे. पता नही उन्हें वहां किस खबर के छूटने का डर था जबकि वहां ऐसा कुछ नही हो रहा था जिसे ख़बर कहा जा सके. अपने आपको सबसे आगे बताने की होड़ में टीवी चैनलों ने इन रिपोर्टरों को पूरी तरह से गिद्ध बना दिया था.

कुछ देर बाद इमारत के फाटक पर एक इनोवा गाड़ी आकर रुकी. यह देख वहां मौजूद रिपोर्टर उस गाड़ी की तरफ लपके. गाड़ी इमारत में घुसी तो पत्रकार भी उसके पीछे भागने लगे. लेकिन अपने पीछे पत्रकारों को भागता देख उस गाड़ी में मौजूद व्यक्ति ने इमारत के परिसर का तेज़ी से पूरा चक्कर लगाया और फिर से गाड़ी इमारत के गेट से तेज़ी से बाहर निकल गयी. कुछ पत्रकार कहने लगे कि गाड़ी में रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती थे.

हालांकि किसी को पक्के तौर पर कुछ पता नहीं था. उनकी अटकल थी कि अगर गाड़ी में शौविक चक्रवर्ती नहीं थे तो गाड़ी तेज़ी से इमारत के अंदर का चक्कर मार कर चली क्यों गयी.

जब इमारत में पत्रकार प्रवेश कर गए थे तब एक बार फिर रिपब्लिक भारत की रिपोर्टर वॉचमैन राम के ऊपर चिल्लाने लगी कि वह उसे इमारत में अंदर जाने से क्यों रोक रहे हैं.

थोड़ी देर बाद पीटूसी देते हुये रिपब्लिक भारत की वही पत्रकार अपने एक साथी से बार बार कह रही थीं कि उस गाड़ी में शौविक चक्रवर्ती है और वह उसका पीछा करते रहें.

यह विकृत पपराज़ी पत्रकारिता का नमूना था. हमने रिपब्लिक के कैमरापर्सन से पूछा कि तुम्हें कैसे पता कि गाड़ी में रिया का भाई ही था, तो उसने हंसते हुए बताया कि उसकी कंपनी की एक गाड़ी डीआरडीओ से ही उसका पीछा कर रही थी.

कुछ देर बाद वहां एक पुलिस कांस्टेबल पहुंचा. पत्रकारों ने उसका भी घेराव कर वहां से जाने के लिए मजबूर कर दिया. सवाल करने का ऊंचा लहजा, कैमरा लगातार चल रहा था, बेअदबी से भरे सवाल उछाले जा रहे थे. वह रिपोर्टर, उनसे सवाल कर रही थीं कि क्या वो रिया चक्रवर्ती को समन देने आए हैं या उनसे मिलने आये हैं? एक ही सवाल बार-बार कि आप यहां क्यों आए हैं.

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