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जो थैंक्यू कहना रह गया है मोदी जी..

-न्यूजलॉन्ड्री,

मेरे वैक्सीन सर्टिफिकेट में आपकी तस्वीर टंकी हुई है. बहुत सारी बातों के लिए आप खुद ही अपने विज्ञापनों में अपना धन्यवाद करवाते रहे हैं. अब तो आपके मंत्री भी अपनी जगह आप ही का फोटो छापने लगे हैं. शायद धन्य महसूस करते भी होंगे. आपके जाने के बाद जो भी नेता आपकी पार्टी और विचारधारा को मिलेगा, वह शायद ही इतना सौभाग्यशाली हो. कौन सोच सकता है कि भारत के भक्त गण, भारत का मीडिया, भारत के उद्योगपति, भारत के फौजी जनरल, भारत के सुप्रीम कोर्ट जज, भारत के नौकरशाह कभी अमित भाई या योगी जी पर इस तरह से पुष्प-वर्षा और स्तुति गान गा सकेंगे. कुछ तो धन्यवाद आपने, आपकी पार्टी और सरकार ने अपना खुद ही करवा लिया है. यह एक अधूरी फेहरिस्त है जो, उन सारी बातों की जिनका धन्यवाद देने से रह गया है. कई मास्टर स्ट्रोक हैं, जिनकी गाथा ठीक से नहीं लिखी गई है. उम्मीद है इन्हें लेकर भी आप उतना ही गदगद और सुख का अनुभव करेंगे, जितना प्रायोजित सरकारी विज्ञापनों में प्रकाशित धन्यवाद प्रस्तावों पर.

भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी आमदनी बांग्लादेश से कम हो जाने पर तो धन्यवाद बनता है. कल तक जिन्हें हमारे गृहमंत्री दीमक कह रहे थे, (उनका आशय सभी भारतीयों को मनुष्य कहना ही रहा होगा बिना इस अंदाजे के कि दीमक इंसान से आगे निकल जाएंगे), उनका हमारे नागरिकों से आगे निकल जाना आपकी कड़ी मेहनत, कुशल प्रबंध, और निर्णायक नेतृत्व का परिणाम है. उसके लिए धन्यवाद स्वीकार करें. बांग्लादेश से भारत आये लोगों को भी आपने इस अफसोस में डाल ही दिया, कि वे वहीं रहते तो ज्यादा कमा रहे होते. इसके लिए तो आपका थैंक्यू है सर जी.

भूख के इंडेक्स पर भारत के 116 में से 101 तक लुढ़कने पर. सिर्फ 15 देश बचे हैं जो भारत से नीचे हैं. इस साजिश को देख पाना कि भारत पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से बहुत नीचे है. जबकि सरकार का दावा है कि वह 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाना मुहैया करवा रही है और यह रिपोर्ट झूठी है कि हमारे बच्चे कुपोषण, निर्बलता, कम वजन और अधिक बाल मृत्यु दर के शिकार हैं. थैंक्यू इस बात का कि इस रिपोर्ट को लेकर कोई शिकन, कोई परेशानी सरकार के माथे पर नहीं दिखलाई पड़ी. उसे इस समस्या की तरफ देखने की जरूरत नहीं थी, उसे सिर्फ रिपोर्ट को झूठा करार देना था.

भारत की आधी आबादी 28 साल और उसके नीचे है. आपने उनके लिए अनेक योजनाओं का ऐलान किया (स्टार्ट अप, स्किल अप, आत्मनिर्भर वगैरह). याद हो न याद हो आप हर साल दो करोड़ रोजगार पैदा करने की बात करते होते थे. नहीं हो पाया और बात है, पर सोचा और उसका वादा किया, इसके लिए भी आपको थैंक्यू मिलना चाहिए. इतनी घोषणाएं पहली बार भारत के लोगों के साथ की गईं, और उनका पेट घोषणाओं से ही भर गया. घोषणाओं से अघाया हुए देश अपनी खट्टी डकारों के साथ आपको धन्यवाद कह रहा है.

आपके पिछले कार्यकाल के दौरान संसद में दिये गये आश्वासनों को पूरा न करने में 300% की बढ़ोतरी हुई. उसके बाद भी और अधिक जनसमर्थन के साथ सत्ता में आना लोगों का आपको धन्यवाद ही है.

ये आपका लचीलापन ही है कि जिस मनरेगा को आप पानी पीते हुए कोस रहे थे, उसी मनरेगा पर आपने सरकारी खर्च को लगभग तिगुना कर दिया. जब देश में महामारी के चलते बेरोजगारी और भुखमरी बढ़ी तो आपकी सरकार ने ही मनरेगा के मद में 111000 करोड़ रूपए खर्च किये जबकि 2014 में ये 32000 करोड़ रुपए था और स्कीम बंद की जाने वाली थी. ऐसी नीतिगत उलटबांसी खाने की मजबूरी के बाद भी आपके दिल में गरीब जनता का ख्याल बना रहा, इसके लिए तो धन्यवाद जितना भी कहा जाए, कम है.

ये अलग बात है कि इसके बाद भी देश में बेरोजगारी बढ़ी है. सरकार खुद मान रही है कि काम कर सकने वाली आबादी में से सिर्फ 40% लोग ही या तो रोजगार में हैं या काम तलाश रहे हैं. यहां भी हम पाकिस्तान और बांग्लादेश से पीछे हैं. बाकी 60 फीसदी लोगों के पास न रोजगार है न रोजगार के मौके. 2016 में जहां काम कर सकने वाली 42 फीसदी आबादी के पास रोजगार थे, जो अब 36% पर फिसल चुका है.

मनरेगा के तहत रोजगार मांगने वाले पंजीकृत परिवारों में से 95% लोगों को पूरे 100 दिनों का रोजगार नहीं मिल पाया. सेडा के सर्वेक्षण मुताबिक 2018 में जो लोग मनरेगा के तहत काम मांग रहे थे, उनमें 18-30 आयु वर्ग के 20 फीसदी लोग थे, जो बढ़ के 37% हो चुके हैं.

आप ने रोजगार की अर्थव्यवस्था के बीच पकौड़ानॉमिक्स का जुमला उछाला था. वह भूख, बेरोजगारी, बेकारी के ऊपर भारी पड़ रहा है, ये भी कम मास्टर स्ट्रोक नहीं है. प्रजा खुश है. उन्हें आपसे और आपके जुमलों से बेइंतहा प्यार है. भारत के लोग चाहे जितने भी गर्त में गिर जाएं, आपने जुमलों की बहार कम न होने दी. उनकी सप्लाई ताबड़तोड़ बनी रही. एक के बाद दूसरा झुनझुना पकड़ाया जाता रहा. लोग गदगद होकर झुनझुने पहले तो बजाते रहे, फिर ख़ुद ही झुनझुनों में बदल गये, जिसका सुबूत हर सुबह व्हाट्सऐप पर आने वाले गुड मॉरनिंग संदेशों के साथ आने वाले आपके महिमा मंडन से चालू हो जाता है.

बेरोजगारी के साथ महंगाई की मार भी कम नहीं है. महाराष्ट्र में पेट्रोल अंग्रेजी शराब से भी महंगा हो गया है और कई लोग ट्विटर पर ये कहते पाये जा रहे हैं ‘ड्रिंक, डोंट ड्राइव’ बजाय ‘डोंट ड्रिंक एंड ड्राइव’. आपके मास्टरस्ट्रोक से पता चला है कि देश के लोग तेल और रसोई गैस के लिए बिना हुज्जत किये इतने सारे पैसे दे सकते थे. कोई बुरा ही नहीं मान रहा, जबकि 2014 से पहले ये कहां मुमकिन था. देश के लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए आपका कितना सारा थैंक्यू है मोदी जी. उपभोक्ता सूचकांक आसमान छू रहा है और आपके लिए जो देशवासियों की मुहब्बत, इज़्ज़त और कृतज्ञता है, कम ही नहीं हो रही है. आपका जादू हम सब पर चल चुका है.

आपकी फकीरी वाली अदा पर सवा सौ करोड़ की आबादी फिदा है. महामारी, भुखमरी, बेकारी के वक्त में पहली बार किसी लोकतांत्रिक तौर पर चुने गये नेता ने अपने लिए महंगे और आलीशान जहाज खरीदे हैं. पहली बार राहत कोष का रास्ता बदल एक ऐसा पीएमकेयर बनाया गया, जिसके बारे में सरकार न तो पारदर्शी है, न जवाबदेह. उसके पैसे से खरीदे गये वेंटीलेटरों ने लोगों की जिंदगी के साथ जो घपला किया, उसके लिए मरीज न सही, पर आपदा में अवसर तलाशने वालों का धन्यवाद आप तक जरूर पहुंचता होगा. भूख से बिलबिलाते, काम मांगते, मजबूर देश के लोकतंत्र के लिए संसद के भवन का काम नहीं रुक सकता था. आप देर रात अकेले अपने फोटोग्राफर के साथ वहां मुआयना करने भी गये थे.

अर्थव्यवस्था पर आपकी पकड़ और समझ कुछ इस कदर मजबूत रही कि दुनिया के सबसे पढ़े-लिखे और कुशल समझे जाने वाले अर्थशास्त्री अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले ही आपसे खूंटा तुड़ा कर भाग खड़े हुए. इनमें रघुराम राजन, अरविंद सुब्रमण्यम, उर्जित पटेल, विरल आचार्य जैसे लोग शामिल हैं, जिन्होंने दुनिया में अपने काम के बूते खासा नाम कमाया पर उन्हें लगा कि उनके बिना भी भारत का काम आपके नेतृत्व में ठीक चल सकता है. स्वदेशी प्रतिभा की आत्मनिर्भरता की जो मिसाल हमने कायम की है, उसका भी आपको तहेदिल से शुक्रिया मिल ही रहा होगा.

सिर्फ अर्थशास्त्री ही नहीं, 35000 डॉलर मिलियनेयर्स (साढ़े सात करोड़ रुपयों से ज्यादा की कूवत रखने वाले) भारतीयों के देश छोड़ने के बाद वे जहां गये हैं, आप ही का नाम जपते हुए थैंक्यू कहे जा रहे हैं. कुछ पर तो आपकी मेहरबानी रही है (नीरव और कई दूसरे), पर बहुत से ऐसे हैं, जिन्हें लग रहा था कि आपके कुशल प्रबंधन में धंधा पानी करने के वे लायक नहीं रह गये हैं. कुछ तो आपने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ बढ़ाई है, जिससे ये हुआ है. आपने एक बार उद्योगपतियों और व्यापारियों के लिए थोड़ा गुजरातोचित तरीके से कहा था कि वे फौजियों से ज्यादा हिम्मत वाले हैं. जाहिर है वे देश छोड़कर जा रहे हैं तो जहां जाएंगे, भारत का नाम ऊंचा करेंगे. इसका श्रेय आपको ही मिलेगा और विदेशों में रोड शो करने में भी सहूलियत होगी. मास्टर स्ट्रोक इतना बारीक और गहरा हो सकता है, ये अब पता चल रहा है.

फौज की बात चले और चीन की नहीं, तो गलत होगा. ये आपकी ही कुशल कूटनीति, रणनीतिक चतुराई और सूझ बूझ का ही परिचायक है कि जहां चीन की फौज लद्दाख और दूसरे मोर्चों पर भारत की सीमाओं के साथ खुले तौर पर छेड़छाड़ कर रही है, आपके नेतृत्व में चीन के साथ हमारे व्यापारिक सम्बंध मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं. आपने अद्भुत संयम और शांतिदूत होने का परिचय दिया है. उसका थैंक्यू भी बनता है. फौजी तो अपने कर्तव्य से बंधे हैं, पर उनके परिवारों की तरफ से धन्यवाद आपके लिए खास तौर पर है.

फौजी परिवारों को खास तौर पर आपका थैंक्यू इस लिए भी करे हैं कि चीन- भारत का व्यापार इस साल 100 बिलियन डॉलर को पार करने वाला है. चीन हमारा सरहद पर दुश्मन है, बाजार में दोस्त है. भले ही दोनों मोर्चों पर सौदा घाटे का ही हो. भारत को व्यापार घाटा 46.55 बिलियन डॉलर का हो रहा हो, जो झूला आपने अपने दोस्त शी जिनपिंग के लिए अहमदाबाद में सजाया था, वह दोस्ती सीमा की मुश्किलों के बाद भी बरकरार है. इस बीच आपकी वोकल फॉर लोकल की बात करना सोने पर वह सुहागा है जिसे व्याकरण में श्लेष या वक्रोक्ति कई तरह के अलंकरण लक्षित होते हैं. दीवाली पर लगी चीनी लड़ियां इस बात का सबूत है कि घुसपैठ सिर्फ सरहद तक नहीं है.

दुनिया में दो ही देश हैं जिनकी आबादी सौ करोड़ से ज्यादा है. उन दो देशों में टीकाकरण की दर और तेजी देखें तो हमारा प्रदर्शन भयानक लद्धड़ और पिछड़ा है. इसमें एक वह टीका भी शामिल है, जिसकी अभी विश्व में मान्यता ही नहीं है और उसे लेकर ब्राजील के दक्षिणपंथी राष्ट्रपति और उनके बेटों और टीके के दलालों पर भ्रष्टाचार और जनता के साथ धोखा करने का मामला चल रहा है. हमारे यहां हवाई जहाजों में आपकी फोटो के साथ आरती उतारी जा रही है. आपके मंत्री ही कहते हैं कि तेल के दाम सबको कोविड वैक्सीन देने के लिए बढ़ाए जाए रहे हैं, उधर आपके फोटो लगे विज्ञापनों में टीकों को मुफ्त बताया जा रहा है. आपके विज्ञापन तो झूठ नहीं बोल सकते. ये मास्टर स्ट्रोक है. थैंक्यू मोदी जी!

जैसे कोविड वैक्सीन प्रमाणपत्र में लोगों की जान बचाने का श्रेय आपको दिया गया है, वैसे ही उन सारे मृत्यु प्रमाणपत्रों के जरिये भी कृतज्ञता ज्ञापित की जा सकती थी, जो दवा, वेंटीलेटर, ऑक्सीजन, अस्पताल में बिस्तर, श्मशान में जगह के लिए तरसते रहे. आखिर उसके जिम्मेदार जवाहर लाल नेहरू तो नहीं थे.

आपके राज में देश में 10 साल के मुसलमान बच्चे से भी हिंदू खतरे में चले जा रहे हैं. ऐसा शायद ही कोई दिन हो जिस दिन किसी मुस्लिम औरत, बुजुर्ग, नौजवान, लड़के-लड़कियों के साथ हिंसा, बदतमीजी का वीडियो वायरल नहीं होता है. उसमें आपकी विचारधारा, आपके प्रशंसक, आपके सरकारी कारिंदे शामिल पाये जाते हैं. अब तक जिसे फ्रिंज कहा जाता था, वही मेनस्ट्रीम हो चुका है. कभी किसी को कोई अंडे बेचने से रोक रहा है, कोई मोहल्ला खाली करने को कह रहा है. कोई सड़क चलते इंसान को पीटने लगता है, कहीं पुलिस पीटते हुए राष्ट्रगान सुनाने की फरमाइश पेश कर रही है. दंगा होता है तो मरते भी ज्यादा संख्या में मुसलमान हैं और गिरफ्तार भी उन्हीं को ज्यादा संख्या में किया जाता है. जब हम पड़ौसी देशों के लोगों को शरण देने की बात करते हैं, तो उसमें सिर्फ एक धर्म का नाम नहीं लिया जाता.

आप खुद अपनी स्टाइल में कभी कपड़ों से पहचानने और कभी श्मशान-कब्रिस्तान की बात करते हैं. पूरी दुनिया में आपके राज में हो रहे इस विकृत मानसिकता की बात हो रही है. आपके ही मंत्रीमंडल के सदस्य रहे मी टू मामले के आरोपी और एक पूर्व पत्रकार ने कहीं इसीलिए तो आपकी तुलना हिटलर से नहीं की थी. ये ग़जब की बात है कि हमारे देश में बहुसंख्यकों को अल्पसंख्यकों से खतरा है. इस खतरे का ढिंढोरा सबसे ज्यादा आपके राज में पीटा जा रहा है. मुसलमानों को एक सोचे समझे तरीके से न नागरिक होने का अधिकार मिल रहा है, न इंसान रहने की गरिमा. चाहे असम हो, उत्तर प्रदेश हो, मध्यप्रदेश हो या कर्नाटक, पहले हौवा खड़ा किया जाता है, फिर हैवानियत दिखाई जाती है.

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