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ग्राउंड रिपोर्टः धुंआ और राख के बीच घुटती लाखों जिंदगियां

जनचौक, 15 जुलाई 

जब मेरे इलाके में फैक्ट्रियां लगनी शुरू हुई थीं, तो मेरी उम्र लगभग 40 साल थी। मेरे गांव वाले बहुत खुश थे कि अब हमें रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। हमारे इलाके में नये-नये अस्पताल व विद्यालय भी खुलेंगे, चमचमाती सड़कें बनेंगी। लेकिन आज 30 साल बाद जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो महसूस होता है कि विकास के नाम पर हमारे इलाके का विनाश कर दिया गया है। हमारे खेत बंजर हो रहे हैं। हमारे ग्रामीण कई प्रकार की बीमारियों से त्रस्त हैं। हमारे बच्चों को अब भी रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। हमारे इलाके को इन फैक्ट्रियों से धुंआ और राख के सिवाय कुछ भी नहीं मिला है।’’-यह बोलते वक्त कल्हामांझो गांव के 70 वर्षीय भिखारी राय रोते-रोते रह गये। 

झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 290 किलोमीटर दूर गिरिडीह जिले का गिरिडीह शहर है। रांची से रामगढ़, हजारीबाग, विष्णुगढ़, बगोदर, डुमरी, पीरटांड़ होते हुए अगर आप गिरिडीह जाएंगे, तो रास्ते में पड़ने वाले पहाड़ व जंगल आपको मोहित कर लेंगे। लेकिन जैसे ही आप गिरिडीह शहर से टुंडी की ओर 5-6 किलोमीटर आगे जाएंगे, धूल और राख से आपकी गाड़ी काली होनी शुरू हो जाएगी। अगर आप मोटरसाइकिल से जा रहे हैं और हेलमेट नहीं पहने हैं, तो फिर इस रास्ते में चलना मुश्किलों भरा है और अगर हेलमेट पहने भी हैं, तो आपके पूरे कपड़े पर धूल और राख की परत जम जाएगी। अब सोचिए इस इलाके में लोग कैसे रहते होंगे?

पढ़िए इस खास रिपोर्ट को जनचौक पर