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राजस्थान इस कठिन समय में अपने लोक कलाकारों का साथ देने के नाम पर उनके साथ मजाक क्यों कर रहा है?

-सत्याग्रह, 

जोधपुर के विश्व प्रसिद्ध लोक कलाकार सुगनाराम भोपा हताश हैं. ‘सिरकार (सरकार) हमे कैसे-कैसे बेइज्जत करती है? मैं अनपढ़ हूं. रावणहत्था बजाकर अपने बच्चों का पेट भरता हूं. मेरे पास ये झूंपड़ी हैं. सिरकार कह रही है कि लोक कलाकार वीडियो बनाकर भेजे. उनको 2500 रु मिलेंगे. मैं क्या करूं? न तो मेरे पास ऐसा फ़ोन है जो वीडियो बना सके ओर न ही मेरे को चलाने का पता’ वे अपने दर्द को हमसे साझा करते हुए कहते हैं, ‘हम ईमेल की आईडी कैसे बनायें? एक आधार कार्ट तो बना है और कुछ तो है नहीं. ई-मित्र भी बन्द है. क्या करें?’

सुगनाराम कहते हैं कि उनके बुजर्ग रावणहत्था बजाते हुए ही मर गए. इस परंपरा को जैसे-तैसे वे जारी रखे हुए हैं. लेकिन अब ये परंपरा शायद उनके साथ ही समाप्त हो जाएगी. ‘हुकुम! इस रावणहत्थे में रेगिस्तान की आत्मा बस्ती है. वो भी इसके साथ ही मर जाएगी. सिरकार (सरकार) को चाहिए कि सभी लोक कलाकारों को भले ही एक हज़ार रु दे. सीधे उसके खाते में डाल दें. ऐसे बेइज्जत न करे.’

कोरोना संकट से बुरी तरह प्रभावित राजस्थान के लोक कलाकारों के लिए राज्य के कला एवं संस्कृति मंत्रालय ने एक योजना निकाली है - मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना. राजस्थान सरकार इस योजना का चारों तरफ जोर-शोर से प्रचार कर रही है. इस योजना में कई किंतु-परंतु हैं लेकिन सबसे पहले उसी के बारे में बात कर लेते हैं जिसके बारे में सुगनाराम भोपा हमें ऊपर बता रहे थे. इस योजना के तहत ग्रामीण लोक कलाकारों को 15 से 20 मिनट का वीडियो बनाकर ईमेल के जरिये राजस्थान सरकार को भेजना होगा.

पहली बात तो यह कि गांवों में रहने वाले सुगनाराम जैसे हज़ारों लोक कलाकार 15-20 मिनट का वीडियो बनाएंगे कैसे? योजना में यह साफ-साफ लिखा है कि ‘वीडियो कम से कम इस स्तर का हो कि लोग उसको देखकर उस प्रस्तुति का आनंद लें सकें और उसे मूल्यांकन समिति द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने योग्य समझा जाये.’ ऐसा वीडियो बनाना बहुत से लोक कलाकारों के लिए असंभव नहीं तो बेहद मुश्किल जरूर है. यदि किसी की मदद से उन्होंने ऐसा कर भी लिया तो फिर सवाल यह उठता है कि राज्य के गांवों में तो पढ़े-लिखे लोगों के पास ही ईमेल आईडी नहीं हैं. तो फिर उन लोक कलाकारों के पास ईमेल आईडी कैसे होंगी जिनको अपना नाम तक लिखना नहीं आता? यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि राजस्थान के 98 फीसदी लोक कलाकार पढ़े-लिखे नहीं हैं.

चलिये मान लिया कि उनके पास ईमेल आईडी हैं भी तो इतनी बड़ी फ़ाइलों को ई-मेल के जरिये भेजा कैसे जाएगा? अच्छी गुणवत्ता का 15-20 मिनट का वीडियो कम से कम 100 एमबी का तो होगा ही. ईमेल से इतनी बड़ी फ़ाइल कैसे भेजी जा सकती है?

योजना की घोषणा में यह भी कहा गया है कि ‘सभी लोक कलाकरों को योजना के तहत अपनी प्रस्तुति की रिकार्डिंग के समय सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही कोरोना की रोकथाम और बचाव के लिए सरकार द्वारा जारी की गई गाईडलांइस की पूर्ण पालना करनी होगी. इच्छुक लोक कलाकार यथासंभव ऐसी प्रविष्टियों का चयन करे जिसमें एक से अधिक व्यक्ति (लोक कलाकर) उस प्रस्तुति में सम्मिलित ना हों.’ इससे यह पता चलता है कि इस योजना को कितने नासमझ लोगों ने तैयार किया है.

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