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स्वच्छ भारत मिशन से साल भर में हर परिवार को हुआ करीब 53,536 रुपए का फायदा

-डाउन टू अर्थ,

एक शोध से पता चला है कि स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) से साल भर में हर घर को करीब 53,536 रुपए (727 डॉलर) का फायदा हुआ। जर्नल वर्ल्ड डेवलपमेंट में छपे इस अध्ययन के अनुसार यदि इस मिशन से हुए फायदे को देखें तो, 10 वर्षों के दौरान इस परियोजना पर जितना खर्च किया गया है वो उससे 4.3 गुना ज्यादा है। 

शोध के अनुसार जहां इस मिशन के चलते गरीब तबके को इसकी लागत का करीब 2.6 गुना फायदा हुआ है, वहीं समाज को 5.7 गुना फायदा पहुंचा है। यदि इसकी लागत और लाभ के अनुपात को देखें तो दस सालों में घरेलू खर्च पर जो रिटर्न है वह लागत का 1.7 गुना है। जबकि समाज को इसकी लागत की तुलना में करीब 4.3 गुना ज्यादा पंहुचा फायदा है।  

अध्ययन के अनुसार साल भर में हर घर को जो करीब 53,536 रुपए का लाभ पहुंचा है, उसका 55 फीसदी दस्त की घटनाओं में कमी के कारण स्वास्थ्य को हुए लाभ के रूप में है। जबकि इससे समय की जो बचत हुई है वो इसके लाभ के 45 फीसदी के बराबर है। 

गौरतलब है कि स्वच्छ भारत मिशन की शुरुवात अक्टूबर 2014 में की गई थी। यह मिशन दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान है। जिसका उद्देश्य खुले में शौच की प्रथा को खत्म करना और बीमारियों से मुक्त करना था। जहां एक दशक से टोटल सैनिटेशन मिशन और निर्मल भारत अभियान के बावजूद 2015 में देश के 59 फीसदी ग्रामीण और 12 फीसदी शहरी घरों में शौचालय नहीं थे। साथ ही  52.2 करोड़ लोग खुले में शौच कर रहे थे। वहीं इस मिशन के अंतर्गत करीब 10,69,67,234 शौचालय बनाए गए थे। आज 6 लाख से ज्यादा गांव खुले में शौच जैसी कुरीति से मुक्त हो चुके हैं।  

हर शौचालय पर किए गए करीब 29,162 रुपए (396 डॉलर) खर्च 

इस मिशन में हर शौचालय के लिए औसतन 29,162 रुपए (396 डॉलर) का भुगतान किया गया था, जोकि प्राप्त सब्सिडी से दोगुना है। जिसमें सरकार की हिस्सेदारी 9,352.4 रुपए (127 डॉलर) और परिवार की हिस्सेदारी 19,736 रुपए (268 डॉलर)  की थी। इस 19,736 रुपए में से 18,926 रुपए (257 डॉलर) नकद और 810 रुपए (11 डॉलर) समय के रूप में खर्च किये गए थे। 

अध्ययन के अनुसार दो-तिहाई (69.5 फीसदी) से अधिक परिवारों को औसतन 13,476 रुपए (183 डॉलर) की सरकारी सब्सिडी मिली थी। जबकि इन परिवारों में से 63.8 फीसदी ने सरकारी सब्सिडी के ऊपर हर टॉयलेट पर औसतन 11,341 रुपए (154 डॉलर) का खर्च अपनी जेब से किया था। 

इस शोध के लिए किए गए सर्वे में 12 राज्यों के 10,051 ग्रामीण परिवार को शामिल किया गया था। इसमें बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, झारखंड और असम शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार देश में खुले में शौच करने वालों में से 90 फीसदी लोग इन्हीं राज्यों से थे। 

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