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बिहार में सूखा पड़ने की आशंका

जन चौक, 28 जुलाई 

बिहार में सूखा जैसी हालत है। वर्षा बहुत कम हुई है। इसका सीधा असर धान की खेती पर पड़ा है। बहुत बड़े इलाके में रोपनी भी नहीं हुई। जहां नलकूप आदि की सहायता से रोपनी हो गई है, वहां भी वर्षा नहीं होने से फसल सूख जाने की आशंका है।

ढंग से बरसात अभी शुरू ही नहीं हुई। जबकि मानसून का आगमन जून में ही हो गया। पर मामूली वर्षा हुई। आंकड़ों के लिहाज से इस वर्ष अभी तक पिछले साल के मुकाबले आधा से भी कम वर्षा हुई है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष एक जून से 21 जुलाई के बीच 400 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, जबकि इस वर्ष इस अवधि में मात्र 215 मिलीमीटर वर्षा हुई है। यह वर्षा भी छिट-पुट हुई है। खेतों में पानी इकट्ठा होने वाली वर्षा कभी नहीं हुई। इसलिए केवल वर्षा के आधार पर धान की रोपनी कहीं नहीं हो पाई। वहीं लोग रोपनी कर पाए जिनके पास नलकूप की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन वर्षा नहीं होने से उनकी फसल के भी नष्ट हो जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। 

कृषि विभाग से जारी धान की रोपनी के आंकड़ों के अनुसार 18 जुलाई तक राज्य में केवल 23 प्रतिशत रोपनी हुई है। हालत यह है कि 14 जिलों में पांच प्रतिशत से भी कम रोपनी हुई है। मुंगेर में तो रोपनी शुरू ही नहीं हुई है। केवल सात जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक रोपनी हो सकी है। केवल पश्चिम चंपारण और पूर्णिया में 81 प्रतिशत रोपनी हो सकी है। उल्लेखनीय है कि पश्चिम चंपारण व पूर्णिया राज्य के उत्तरी छोर पर हैं और दोनों जिलों में पहाड़ी नदियों का जाल सा है। लोगों ने पंपसेट से नदी से पानी निकालकर रोपनी कर ली है, पर वर्षा नहीं होने से उन जिलों में भी धान के बीचड़ों पर संकट है। कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष धान की रोपनी का लक्ष्य 35 लाख 12 हजार हेक्टेयर है। जबकि रोपनी महज सात लाख हेक्टेयर से कुछ अधिक इलाके में हो सकी है।

पूरी रिपोर्ट-जनचौक