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पीएमजेएवाई का सच: कोविड-19 की दूसरी लहर में निजी बीमा कंपनियों ने की मनमानी

-डाउन टू अर्थ,

स्वास्थ्य के क्षेत्र में बीमा केंद्रित दृष्टिकोण महामारी के दौरान कितना प्रभावी रहा?  कोरोना काल में बीमाधारकों के अनुभव बताते हैं कि उन्हें वादों के अनुरूप बीमा का लाभ नहीं मिला। ऐसे में क्या सरकार स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे पर फिर से अपना ध्यान केंद्रित करेगी? हम एक लंबी सीरीज के जरिए आपको बीमा के उन अनुभवों और सच्चाईयों से वाकिफ कराएंगे जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत जब थी, तब वह लोगों को नहीं मिला...। इससे पहले की तीन कडियों के लिंक नीचे दिए गए हैं। आज पढ़ें, चौथी कड़ी ...

एक तरफ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जल आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) जहां गरीबों को कोविड-19 के आर्थिक बोझ से कुछ खास राहत नहीं दिला सकी, तो वहीं दूसरी तरफ उन लोगों का अनुभव भी संतोषजनक नहीं रहा, जिन्होंने निजी स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को भुगतान किया था। जैसे-जैसे कोविड-19 के मामले बढ़ते गए, वैसे ही कैशलेस इलाज कराने और क्लेम की राशि पाने में परेशानियां भी बढ़ती गईं। 


केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में स्थित वेली गांव में रहने वाले केजी फिलिप और उनकी पत्नी एलिजाबेथ को कोविड-19 के संक्रमण से उबरे हुए करीब 10 महीने बीत चुके हैं। इन दोनों का इलाज राज्य सरकार की तरफ से अधिकृत तिरुवनंतपुरम के बाहरी इलाके में स्थित दो अलग-अलग महामारी देखभाल केंद्रों पर चला। इलाज के दौरान परिवार को भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनकी एकमात्र उम्मीद एक निजी बीमा कंपनी से ली गई कोरोना रक्षक पॉलिसी थी। उन्होंने यह बीमा तभी ले लिया था, जब महामारी ने देश को जकड़ना शुरू किया था।

भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने साल 2020 में खासतौर पर कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए कोरोना रक्षक और कोरोना कवच के नाम से दो शॉर्ट टर्म पॉलिसी तैयार की थीं। कोरोना कवच क्षतिपूर्ति आधारित योजना है, जो कोविड-19 के कैशलेस इलाज या फिर इलाज में खर्च की गई रकम की भरपाई का वादा करती है। वहीं, कोरोना रक्षक एक लाभ आधारित योजना है, जिसमें हर कोविड-19 मरीज को मुआवजे के तौर पर एक निश्वित राशि देने का वादा किया जाता है।

फिलिप ने प्रीमियम के तौर पर कुल 19,500 रुपए का भुगतान किया था, जिसके लिए बीमा प्रदाता ने बिल जमा करने पर परिवार के हर प्रभावित सदस्य को ढाई लाख रुपए अदा करने का वादा किया था। लेकिन, अब कंपनी उन लोगों को यह राशि देने से इनकार कर रही है, जिनका इलाज सरकार की तरफ से निर्धारित कोविड केयर सेंटरों में किया गया है। फिलिप के पक्ष में जिला कलेक्टर और बीमा लोकपाल के हस्तक्षेप करने के बाद भी उन्हें बीमा राशि हासिल करने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

इरडा की ओर से स्थापित जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के अनुसार, मार्च 2020 से सितंबर 2021 के बीच देशभर में 26 लाख निजी बीमा दावे किए गए। इनमें से 22 लाख दावों का निपटारा किया गया और 2 लाख दावे खारिज कर दिए गए। लेकिन, तमाम लाभार्थियों ने डाउन टू अर्थ को बताया कि उन्हें क्लेम से कम राशि का भुगतान किया गया। 

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