Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/umar-khalid-100-days-incarceration.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | जो जनता आज उमर को आतंकवादी कह रही है, वो उसी के लिए काम करना चाहता था… | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

जो जनता आज उमर को आतंकवादी कह रही है, वो उसी के लिए काम करना चाहता था…

-द वायर,

23 दिसंबर को उमर खालिद की गिरफ़्तारी के 100 दिन पूरे हो गए.

अपनी गिरफ़्तारी से 10 दिन पहले उमर ने मुझसे कहा था कि वो कुछ ऐसे युवाओं को एक साथ जोड़ना चाहता है जो सोशल मीडिया पर नफ़रत की राजनीति पर लगाम लगा सकें और जनता के ज़रूरी मुद्दों पर बात कर सकें.

जो जनता आज उमर को आतंकवादी कह रही है, उमर उसी जनता के लिए काम करना चाहता था. ईमानदारी से बताऊं तो कभी-कभी मुझे उसकी इस उम्मीद पर हंसी आती है, मगर गर्व भी होता है.

वैसे आज मैं उमर के राजनीतिक विचारों के बारे में बात करने वाला हूं और इसके लिए मैंने उमर से हुई निजी बातचीत और उसके कुछ सार्वजनिक लेखों का सहारा लिया है.

उमर से मेरी पहली मुलाकात किसी सरकार विरोधी प्रदर्शन में नहीं हुई थी, बल्कि आतंकवाद विरोधी प्रदर्शन में हुई थी. अप्रैल 2019 में श्रीलंका में चर्च पर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 250 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

हमले के एक दिन बाद ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ नाम की संस्था ने दिल्ली के ‘सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल’ चर्च के बाहर श्रीलंका के ईसाइयों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए मानव श्रृंखला बनाने का आह्वान किया था. उमर भी उस मानव श्रृंखला में आए थे.

मगर दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशी में उमर को ‘इस्लामिक चरमपंथी’ कहा है. मुझे नहीं पता कि कौन-सा चरमपंथी संगठन आतंकवाद के ख़िलाफ़ मानव श्रृंखला बनाने की ट्रेनिंग देता है.

शायद इसी के जवाब में दिल्ली पुलिस ने आगे यह भी लिखा है कि उमर सेकुलरिज्म का चोला ओढ़कर चरमपंथ को बढ़ावा देता था. यह मुमकिन है कि उमर यहां भी सेकुलर और मानवतावादी होने का अभिनय करने आया हो.

उमर अपने इस किरदार में इस क़दर डूब चुका था कि उसने कश्मीर में कश्मीरी पंडित अजय पंडिता की हत्या के ख़िलाफ़ भी आवाज़ उठाई और ट्वीट कर कहा कि दुनिया भर में अल्पसंख्यकों पर हमले बंद होने चाहिए.

दिल्ली पुलिस के चश्मे से इसे न देखें, तो यह समझना मुश्किल नहीं है कि उमर किसी धर्म के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि ज़ुल्म के ख़िलाफ़ है.

उमर का ‘लेफ्ट चरमपंथ’

दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में उमर को ‘लेफ्ट विचारधारा का चरमपंथी’ भी बताया है. मैंने पहला चरमपंथी लेफ्टिस्ट देखा है जो सार्वजनिक रूप से अपने कई भाषणों में लोगों को महात्मा गांधी के रास्ते पर चलने के लिए कहता है!

उमर के जिस भाषण को दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में भड़काऊ बताया है उस भाषण में भी उमर ने सत्याग्रह और अहिंसा के रास्ते पर चलने की अपील की है.

इसका यह मतलब नहीं है कि उमर गांधीवादी है या गांधी का अंधभक्त है. उमर सार्वजनिक रूप से खुद को लेफ्टिस्ट बताता रहा है. मगर उमर की खासियत ही यही है कि उसके अंदर किसी भी विचार को लेकर कट्टरता नहीं है और न ही वो टेक्स्टबुक राजनीति करता है.

इसका यह भी मतलब नहीं है कि वह गांधी की कमियों को बढ़ावा देता है. इसका सिर्फ़ इतना मतलब है कि उमर उन वामपंथियों में से नहीं है जो इस सच्चाई से मुंह मोड़ ले कि आज़ादी के बाद अगर किसी ने ज़मीन पर उतरकर हिंदुओं से कहा था कि यह देश सिर्फ़ उनका नहीं, बल्कि मुसलमानों का भी है तो वह गांधी थे.

उमर ने अपने एक भाषण में इस बात का भी ज़िक्र किया है कि बंटवारे के बाद गांधी दंगा प्रभावित इलाकों में जाकर दंगे शांत कराते थे और उन्होंने अपना आखिरी सत्याग्रह भी दिल्ली में आरएसएस जैसी चरमपंथी संगठन के ख़िलाफ़ खड़े होकर हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए किया था.

इसी सत्याग्रह के कुछ दिनों बाद आरएसएस के नाथूराम गोडसे ने गांधी की हत्या कर दी थी.

पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.