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अमेरिकी अखबार ने फेसबुक और बीजेपी पर नए इल्ज़ाम लगाए हैं, जो बेहद गंभीर हैं.

-द लल्लनटॉप,

फेसबुक इंडिया के अधिकारियों और बीजेपी के बीच कथित साठगांठ के अपने आरोप को लेकर अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने नया दावा किया है. अखबार ने फेसबुक इंडिया की पॉलिसी हेड अंखी दास पर आरोप लगाया है कि वह नरेंद्र मोदी की समर्थक हैं. इस आरोप को कांग्रेस पार्टी ने नया हथियार बना लिया है. आइए जानते हैं,  क्या है पूरा मामला.

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में भारत में फेसबुक की नीतियां तय करने वाली सबसे बड़ी अधिकारी अंखी दास के काम करने के तरीके और उनकी फेसबुक पोस्ट्स को तफ्सील से खंगाला है. नई रिपोर्ट में अखबार ने अंखी दास के 2014 के आम चुनाव में बीजेपी की बंपर जीत के बाद लिखी एक पोस्ट का हवाला दिया है. अखबार के मुताबिक, अंखी दास ने फेसबुक के कर्मचारियों के लिए बने ग्रुप पर अपनी पोस्ट में लिखा था-

हमने उनके (नरेंद्र मोदी) सोशल मीडिया कैंपेन के लिए अलख जगाई और बाकी अब सब इतिहास के पन्नों में दर्ज है. ऐसा करने में 30 साल की जमीनी मेहनत लगी है, जिससे आखिरकार भारत से सरकार पोषित समाजवाद को खत्म किया जा सका है.

अखबार का आरोप है कि अंखी दास ने अपनी दूसरी पोस्ट में कांग्रेस को हराने के लिए मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें स्ट्रांगमैन यानी बाहुबली कहा. मोदी को ऐसा शख्स बताया गया, जिसने लंबे वक्त से राज कर रही पार्टी को पटखनी दी.

इसके अलावा, रिपोर्ट में अखबार का दावा है कि 2012 के गुजरात इलेक्शन के बाद अंखी दास ने भारतीय जनता पार्टी और मोदी का जिक्र करते हुए लिखा था कि-

‘हमारा गुजरात कैंपेन बहुत सफल रहा है.’

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने मोदी के लिए पीएम पद का कैंपेन शुरू किया. इसके लिए फेसबुक ने ट्रेनिंग और सहायता उपलब्ध कराई. इसी के बाद उनके फॉलोअर्स की संख्या 10 लाख को पार कर गई थी. अखबार ने फेसबुक की एक अन्य कर्मचारी मिस हरबर्थ के हवाले से बताया कि अंखी दास ने एक पोस्ट में नरेंद्र मोदी को ‘द जॉर्ज वॉशिंगटन ऑफ इंडिया’ लिखा था.

अखबार का आरोप है कि इस दौरान अंखी दास ने अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त की थीं. जब एक सहकर्मी ने ग्रुप में लिखा कि फेसबुक पर कांग्रेस की फॉलोइंग नरेंद्र मोदी के पेज से ज्यादा है तो दास ने कथित तौर पर जवाबी पोस्ट में लिखा- उनकी (नरेंद्र मोदी) तुलना कांग्रेस से करके उन्हें अपमानित मत करो.

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अंखी दास ने फेसबुक में अपने इस व्यवहार के बारे में यही जताया कि इससे कंपनी को आगे जाकर फायदा होगा. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 2014 के अंत तक अंखी दास ने फेसबुक के अपने साथियों से बीजेपी की जीत को लेकर भविष्यवाणियां करनी शुरू कर दीं. उनके अनुसार, इस दावे के पीछे एक बड़े और सीनियर बीजेपी नेता थे, जो उनके दोस्त रहे हैं.

फेसबुक कर्मचारी ही कर रहे विरोध
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि फेसबुक के कुछ कर्मचारियों ने माना है कि इस तरह के पोस्ट फेसबुक की न्यूट्रल बने रहने की पॉलिसी के खिलाफ हैं. उनका कहना है कि एक तरफ फेसबुक आपत्तिजनक कंटेंट को सख्ती से मॉनिटर करने की बात करता है, दूसरी तरफ सरकार के सामने अपने हितों को लेकर खड़ा रहता है. रिपोर्ट में इस तरह के आरोप भी लगाए गए कि फेसबुक से जुड़े और पहले यहां काम कर चुके कर्मचारियों ने भी फेसबुक की पॉलिसी को लेकर विरोध जताया.

अंखी दास ने इस तरह के पोस्ट 2012-14 के बीच बनाए एक ऐसे फेसबुक ग्रुप में किए, जो खासतौर पर फेसबुक इंडिया के कर्मचारियों के लिए बनाया गया था. हालांकि फेसबुक के किसी भी ऑफिस में काम करने वाला शख्स ग्रुप को जॉइन कर सकता था. दो साल के दौरान फेसबुक के सैकड़ों कर्मचारी इस ग्रुप का हिस्सा रहे.

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