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गांव-देहात के हिसाब से इस बजट में क्या है?

-गांव सवेरा,

• ‘उर्वरक सब्सिडी’ पर खर्च साल 2021-22 (R.E) में 1,40,122 करोड़ रुपए से घटाकर 2022-23 (B.E.) में 1,05,222 करोड़ रुपए कर दिया गया है. उर्वरक सब्सिडी पर बजटीय आवंटन साल 2021-22 (B.E.) में 79,530 करोड़ रुपए था. 2021-22 में उर्वरक सब्सिडी पर खर्च के बजट अनुमान और संसोधित अनुमान के बीच बड़ा अंतर उर्वरकों की कीमत और इनपुट लागत में वृद्धि के कारण हुआ है.

• कुल बजटीय खर्च के अनुपात के रूप में उर्वरक सब्सिडी 2021-22 (B.E.) में 2.28 प्रतिशत थी, जो 2022-23 (B.E.) में मामूली रूप से बढ़कर 2.67 प्रतिशत हो गई.

• खाद्य सब्सिडी पर खर्च साल 2021-22 (R.E) में 2,86,469 करोड़ रुपये से घटाकर साल 2022-23 (B.E.) में 2,06,831 करोड़ रुपए कर दिया गया. खाद्य सब्सिडी पर 2021-22 में बजटीय आवंटन 2,42,836 करोड़ (B.E.) रुपए था.

• 2021-22 (B.E.) में कुल बजटीय खर्च के अनुपात के रूप में खाद्य सब्सिडी 6.97 प्रतिशत थी, जो 2022-23 (B.E.) में गिरकर लगभग 5.24 प्रतिशत हो गई.

• कृषि और संबद्ध गतिविधियों पर खर्च साल 2021-22 (R.E) में 1,47,764 करोड़ रुपए था, जिसे साल 2022-23 (B.E.) में मामूली सा बढ़ाकर 1,51,521 करोड़ रुपए कर दिया गया है. कृषि और संबद्ध गतिविधियों पर बजटीय आवंटन 2021-22 (B.E.) में 1,48,301 करोड़ रुपए था.

• कुल बजटीय व्यय के अनुपात के रूप में कृषि और संबद्ध गतिविधियों पर बजटीय आवंटन 2021-22 (B.E.) में 4.26 प्रतिशत था, जो 2022-23 (B.E.) में घटकर 3.84 प्रतिशत हो गया है.

•  ग्रामीण विकास पर खर्च साल 2021-22 (R.E) में 2,06,948 करोड़ रुपए था, जिसे मामूली सा घटाकर साल 2022-23 (B.E.) में 2,06,293 करोड़ रुपए कर दिया गया है. ग्रामीण विकास पर बजटीय आवंटन साल 2021-22 (B.E.) में 1,94,633 करोड़ रुपए था.

• 2021-22 (B.E.) में कुल बजटीय खर्च के अनुपात के रूप में ग्रामीण विकास पर बजटीय आवंटन 5.59 प्रतिशत था, जो 2022-23 (B.E.) में मामूली रूप से घटकर 5.23 प्रतिशत हो गया.

• स्वास्थ्य पर खर्च साल 2021-22 (R.E.) में 85,915 करोड़ रुपए था, जिसे इस साल 2022-23 (B.E.) में मामूली सा बढ़ाकर 86,606 करोड़ रुपए कर दिया गया है. स्वास्थ्य पर बजटीय आवंटन 2021-22 में 74,602 करोड़ रुपए (B.E.) था.

• 2021-22 (B.E.) में कुल बजटीय खर्च के अनुपात के रूप में स्वास्थ्य पर बजटीय आवंटन 2.14 प्रतिशत था, जो 2022-23 (B.E.) में मामूली रूप से बढ़कर 2.2 प्रतिशत हो गया.

• शिक्षा पर खर्च साल 2021-22 (R.E.) में 88,002 करोड़ रुपये था, जोकि साल 2022-23 (B.E.) में बढ़कर 1,04,278 करोड़ रुपए हो गया है. शिक्षा पर बजटीय आवंटन साल 2021-22 में 93,224 करोड़ (B.E.) था.

• 2021-22 (B.E.) में कुल बजटीय खर्च के अनुपात के रूप में शिक्षा पर बजटीय आवंटन 2.68 प्रतिशत था, जो 2022-23 (B.E.) में मामूली रूप से घटकर 2.64 प्रतिशत हो गया.

 • समाज कल्याण पर खर्च साल 2021-22 (R.E.) में 44,952 करोड़ रुपए था, जोकि इस साल 2022-23 (B.E.) में 51,780 करोड़ रुपए है. समाज कल्याण पर बजटीय आवंटन साल 2021-22 (B.E.) में 48,460 करोड़ रुपए था.

किसान संगठन हैं नाराज

बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि सरकार द्वारा यह ‘बजट कॉरपोरेट दोस्तों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया है न कि किसानों  के  हित  लिए नही बनाया गया हैं तिलहन पर बीकेयू के प्रेस नोट का हवाला देते हुए कहा गया था कि, सरकार तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देना चाहती है ताकि सरकार ताड़ के तेल की खेती कॉरपोरेट्स के हाथों में सौंप सके. ताड़ के तेल की खेती पर्यावरण और भूजल की दृष्टि से उपयुक्त नहीं है क्योंकि इसकी खेती से दोनों को नुकसान होगा.

योगेन्द्र यादव ने कहा है कि कृषि और संबद्ध गतिविधियों का कुल बजट पिछले साल के 4.26% से घटकर अब 3.84% हो गया है. इसके अलावा इस साल 2022 किसान की आय दोगुनी करने के 6 वर्ष पूरे हो गए हैं हर बजट में कम से कम इस पर बोला जाता था इस बार एक शब्द भी नहीं बोला गया. अब जब समय आया है किसानों के साथ देश को इस मुद्दे पर जवाब देने का तो मोदी सरकार ने चुप्पी साध ली है लेकिन जुमलों का अमृतकाल जारी है!

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