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स्कैनिया बस विवाद : नितिन गडकरी के प्लॉट में खड़ी थी बस, फिर क्यों कहते हैं कि कोई लेना-देना नहीं

-द कारवां,

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पर हाल में अवैध रूप से जमीन हासिल करने और बड़ा कर्ज लेने के लिए उसे गिरवी रखने का आरोप लगा है.

10 मार्च 2021 को स्वीडन के समाचार चैनल एसवीटी ने खबर दी कि स्वीडन की कमर्शियल-व्हीकल्स (वाणिज्यिक वाहन) निर्माण कंपनी स्कैनिया ने दिसंबर 2016 में गडकरी की बेटी की शादी में "गहरे लाल रंग की चमड़े की सीट वाली" एक लक्जरी बस उपहार में दी थी. एसटीवी ने स्कैनिया की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर यह खबर दी है. एसवीटी ने आगे बताया कि "सूत्रों ने स्कैनिया की मूल कंपनी फॉक्सवैगन को जानकारी दी है कि भारतीय मंत्री को यह उपहार सरकार से काम हासिल करने की नीयत से दिया गया है. गडकरी ने "किसी भी स्कैनिया बस" या "उससे जुड़े किसी भी फर्म या व्यक्ति" से संबंध होने से इनकार किया है लेकिन कारवां की पड़ताल बताती है कि केंद्रीय मंत्री का उक्त दावा झूठा है और बस गडकरी के प्लांट पर मौजूद थी और जिन कंपनियों से बस का संबंध है उन कंपनियों के उनके बेटों- सारंग और निखिल- के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध हैं.

एसवीटी ने यह रिपोर्ट जेटीडीएस और कॉन्फ्यूएंस मीडिया के साथ मिलकर की है. ये दोनों जर्मनी और भारत की समाचार संस्थाएं हैं. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि “यह बस गडकरी परिवार से जुड़ी एक कंपनी को एक डीलर के मार्फत दी गई थी. स्कैनिया के प्रेस मैनेजर और वरिष्ठ सलाहकार हांस डेनियल्सन ने मुझे बताया कि कंपनी ने एक मोटर लिंक एचडी बस बेंगलुरु के डीलर ट्रांसप्रो मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड को 2016 में दी थी. उन्होंने कहा कि स्कैनिया की अपनी पड़ताल के अनुसार ट्रांसप्रो ने यह बस एक दूसरी भारतीय कंपनी सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को किराए पर दी थी.

डेनियल्सन ने कहा कि स्कैनिया को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि वह बस गडकरी को तोहफे में दी गई थी. लेकिन उन्होंने यह माना कि बस की डिलीवरी से संबंधित हस्तांतरण के दस्तावेजों को सटीक रूप से नहीं रखे जाने से पड़ताल करने में मुश्किल आ रही है. इस खबर के प्रकाशित होने तक अन्य किसी कंपनी या व्यक्ति ने इस पर टिप्पणी नहीं की. मैंने गडकरी और उनके बेटों और ट्रांसप्रो मोटर्स और सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी से भी सवाल पूछे थे.

कारपोरेट मंत्रालय में दायर दस्तावेजों से पता चलता है कि सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी का संबंध सारंग और निखिल गडकरी की कंपनियों मानस एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और सियान एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से है. सारंग मानस एग्रो के और निखिल सियान एग्रो के निदेशक हैं. इसके अतिरिक्त कारपोरेट मंत्रालय के दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि सारंग गडकरी की मानस एग्रो ने सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी को 2016-17 में 35 लाख रुपए का असुरक्षित कर्ज दिया था. यह तथ्य भी गडकरी के दावे को झूठलाता है.

केवल कुछ ही मीडिया संगठनों ने इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है जबकि बहुसंख्यक मुख्यधारा के मीडिया ने गडकरी के खंडन को ही प्रकाशित किया है. खबर का खुलासा होने के एक दिन बाद गडकरी के ऑफिस ने ट्वीट करते हुए आरोपों को दुर्भावनापूर्ण, मनगढंत और आधारहीन बताया और दावा किया कि किसी भी स्कैनिया बस की खरीद और बिक्री से उनका संबंध नहीं है. 31 मार्च को प्रिंट ने गडकरी का साक्षात्कार प्रकाशित किया जिसमें उन्होंने दावा किया कि एसवीटी की रिपोर्ट में जिस बस का जिक्र है वह एथेनॉल चालित बस है जिसका निर्माण स्कैनिया करती है, उसे सड़क यातायात मंत्रालय द्वारा ग्रीन बस पहल के तहत नागपुर लाया गया था. लेकिन यह दावा भी सही नहीं लगता क्योंकि स्कैनिया की एथेनॉल चालित बस मोटर लिंक एचडी से अलग है और एथेनॉल से नहीं चलती. और भी जरूरी बात यह है कि गडकरी का बयान इन सवालों के स्पष्टीकरण नहीं देता कि उन्होंने सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी के साथ अपने संबंध के बारे में क्यों छिपाया और क्यों एक मेट्रोलिंक बस, जुलाई 2018 में उनके परिसर में खड़ी थी जिसके बारे में दो साल बाद पता चल रहा है कि वह उन्हें गिफ्ट में मिली थी.

मैं जुलाई 2018 की एक दोपहर में नागपुर स्थित पूर्ति सोलर सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के परिसर में पहुंचा. यह कंपनी केंद्रीय सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से जुड़ी है. वह परिसर एकदम खाली था और जंगली घांस की घनी चादर फैली हुई थी. लग रहा था मानो फैक्ट्री बहुत लंबे समय से बंद पड़ी है. इधर-उधर औजार बिखरे पड़े थे और किसी कामगार का नामो निशान नहीं था लेकिन ताज्जुब तब हुआ जब मैंने वहां एक बड़ी सफेद स्कैनिया मेट्रोलिंक बस खड़ी देखी. मैंने उस बस एक वीडियो बना लिया. उस वीडियो में साफ देखाई देता है कि बस में दो स्टीकर लगे हैं. एक चालक के दरवाजे के पास जिसमें लिखा है स्कैनिया मेट्रोलिंक और दूसरा बड़े अक्षरों वाला स्टीकर बस की साइड में लगा है जिसमें सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी लिखा था.

आधिकारिक रिकॉर्ड में इंगित होता है कि पूर्ति सोलर कॉम्पलेक्स में खड़ी वह बस गडकरी को उपहार में दी गई स्कैनिया बस ही है.

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.