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महिला हेल्पलाइन 181 के 390 कर्मचारियों को एक साल से नहीं मिली सैलरी, महिला ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान

-गांव कनेक्शन, 

महिला हेल्पलाइन 181 में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी आयुषी सिंह ने तीन जुलाई को कानपुर में ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली। आयुषी के परिजन और साथ में काम करने वाले कर्मचारियों का आरोप है कि आयुषी (32 वर्ष) मानदेय न मिलने और नौकरी से निकाले जाने की वजह से काफी तनाव में थीं जिसकी वजह से उसने यह कदम उठाया। आयुषी जिस महिला हेल्पलाइन 181 में काम करती थी यह यूपी सरकार की महिला सशक्तिकरण की दिशा में महिला सुरक्षा के लिए सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक थी। बीते एक साल से सरकार की अनदेखी की वजह से महिला एवं बाल विकास कल्याण विभाग द्वारा सेवा प्रदाता कंपनी जीवीके को बजट जारी नहीं किया गया।

सरकार द्वारा महिला हेल्पलाइन के संचालन की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की कम्पनी 'जीवीके एमआरआई' को पांच वर्षों के लिए दी गयी थी। विभाग की तरफ से फरवरी 2019 से इस कम्पनी का भुगतान रोक दिया गया था। कम्पनी का कहना है कि कर्मचारियों को जून 2019 महीने तक का वेतन खुद से दिया, जिससे ये योजना ठप्प न हो, लेकिन फिर भी बजट पास नहीं हुआ। सेवा प्रदाता कम्पनी ने पांच जून 2020 को सभी कर्मचारियों को सेवा समाप्ति का लेटर भेज दिया। इस लेटर के मिलने के बाद से कर्मचारियों की रही बची आख़िरी उम्मीद भी खत्म हो गयी। ये भी पढ़ें-लॉकडाउन में बढ़े घरेलू हिंसा के मामले, वहीं बजट के अभाव में बंद पड़ी यूपी महिला हेल्पलाइन 181 आयुषी मूलरूप से कानपुर के श्यामनगर की रहने वाली थीं इनकी शादी कल्यानपुर में हुई थी। इनके पति शारीरिक रूप से स्वस्थ्य नहीं हैं कि वे कोई काम कर सकें, पांच साल की एक बेटी भी है। आयुषी महिला हेल्पलाइन 181 में रेस्क्यू वैन फैसिलिटेटर के पद पर उन्नाव में कार्यरत थीं। परिवार के खर्चे की जिम्मेदारी आयुषी के ही कंधों पर थी। आयुषी के पिता सुरेन्द्र सिंह बताते हैं, "नौकरी से निकाले जाने की जबसे उसे नोटिस मिली थी वो बहुत परेशान थी। पति दिव्यांग हैं घर का पूरा खर्चा वही उठाती थी। अभी एक साल से पैसा नहीं मिला था, उसने कर्ज ले रखा था। शाम छह बजे वो दूसरी नौकरी के लिए रिज्यूम बनवाने को कहकर निकली थी। सात बजे जब उसे फोन किया तो चकेरी थाना की पुलिस ने उठाया।"

उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए काम करने वाली सरकार की 2 महत्वपूर्ण योजनाएं बजट के अभाव में बीते एक साल से शिथिल पड़ी हैं। पहली यूपी महिला हेल्पलाइन 181 में काम करने वाले 390 कर्मचारियों को बीते एक साल से और दूसरी महिला समाख्या से जुड़े 650 कर्मचारियों को 17 महीने से महिला एवं बाल विकास कल्याण विभाग द्वारा फंड जारी नहीं किया गया है। ये कर्मचारी बीते एक साल में कई बार धरना प्रदर्शन कर चुके हैं, कई बार विभाग में पत्राचार कर चुके पर सरकार की अनदेखी की वजह से कोई सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान महिला समाख्या में काम करने वाले चार कर्मचारियों की मौत हो गई। साथी कर्मचारियों का आरपोप है कि पैसे के अभाव में इलाज न होने से उनकी मौत हुई।

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